फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

विकास दुबे कांड की जांच में चौंकाने वाला खुलासा, इसलिए पुलिस वालों को नहीं मिला था संभलने तक का मौका

Sun, 02 Aug 2020 02:36 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 02 Aug 2020 02:36 PM IST
विज्ञापन
Vikas Dubey News: Shocking revelation in Vikas Dubey's investigation
विकास दुबे कांड - फोटो : amar ujala
बिकरू कांड की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। दहशतगर्द विकास दुबे का भाई दीपक दुबे व उसका गुर्गा शिव तिवारी सामान्य राइफल (315 बोर) के लाइसेंस पर सेमी ऑटोमैटिक राइफलें रखते थे। दहशतगर्दों ने उस रात इन दोनों राइफलों से भी पुलिसकर्मियों पर गोलियां बरसाईं थीं। सेमी ऑटोमैटिक राइफल का लाइसेंस राष्ट्रपति या राज्यपाल की सिफारिश पर ही जारी हो सकता है।
Vikas Dubey News: Shocking revelation in Vikas Dubey's investigation
विकास दुबे कांड - फोटो : ANI
ऐसे में अब दहशतगर्दों को राइफल बेचने वाला गन हाउस मालिक एसटीएफ की रडार पर आ गया है। दो जुलाई की रात वारदात के बाद पुलिस प्रशासन ने विकास दुबे, उसके परिवारीजनों और करीबियों के शस्त्र लाइसेंसों का ब्योरा जुटाया। जिसके बाद 26 शस्त्रधारकों के 28 लाइसेंस निलंबित कराए। जांच में पता चला था कि विकास और उसके भाई दीपक दुबे के पास एनपी बोर राइफल (315 बोर) के लाइसेंस हैं।

 
Vikas Dubey News: Shocking revelation in Vikas Dubey's investigation
विकास दुबे कांड - फोटो : amar ujala
दीपक की पत्नी अंजलि के नाम पर रिवाल्वर का लाइसेंस है। इसमें दीपक ने सेमी ऑटोमैटिक राइफल खरीदी थी, वहीं उसके एक गुर्गे नामजद आरोपी शिव तिवारी के पास भी सेमी ऑटोमैटिक राइफल है। ये दोनों राइफल शहर के एक ही गन हाउस से खरीदी गई थीं। 315 बोर के लाइसेंस पर सेमी ऑटोमैटिक राइफलें नहीं खरीदी जा सकतीं। इससे दहशतगर्दों के साथ गन हाउस मालिक की मिलीभगत का भी खुलासा हुआ है। एसटीएफ गन हाउस मालिक से पूछताछ करेगी।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
Vikas Dubey News: Shocking revelation in Vikas Dubey's investigation
विकास दुबे कांड - फोटो : amar ujala
ऐसे किया खेल
एसटीएफ के एक अफसर ने बताया कि इस तरह की धांधली में गन हाउस मालिक खेल करते हैं। दरअसल सेमी ऑटोमैटिक राइफल गलत तरीके से देने के दौरान गन हाउस मालिक दावा करते हैं कि इसका सेमी ऑटोमैटिक वाला फंक्शन पंचर (खराब) कर दिया गया है। अब ये सामान्य राइफल की तरह ही है। जबकि नियमानुसार अगर सेमी ऑटोमैटिक राइफल पंचर हो जाती है तब भी उसको बेचा नहीं जाता है। पर, इन लोगों को ये राइफल पंचर दिखाकर बेची गई थी।

 
विज्ञापन
Vikas Dubey News: Shocking revelation in Vikas Dubey's investigation
विकास दुबे कांड - फोटो : अमर उजाला
एक ही बोर की होती हैं दो राइफल  
.30-06 बोर की कारतूस सेमी ऑटोमैटिक और 30 स्प्रिंगफील्ड राइफल दोनों में लगती है। फर्क ये होता है 30 स्प्रिंग फील्ड राइफल में हर बार लोड करनी होती है, जबकि सेमी ऑटोमैटिक राइफल में एक बार लोड करने के बाद ट्रिगर दबाते रहिए, गोलियां चलती रहेंगी। इसमें दो नाल होती हैं, एक से प्रेशर मिलता है जबकि दूसरे से गोली चलती है। यही वजह है कि दो जुलाई की रात पुलिसकर्मियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला था। विकास ने सेमी ऑटोमैटिक राइफल से ताबड़तोड़ गोलियां दागीं थीं। पहले इस बोर की कारतूस सिर्फ अमेरिका में बनती थी। मगर पिछले डेढ़ दशक से भारत में भी ये कारतूस बन रही हैं। लाइसेंस धारक नियमानुसार खरीद सकते हैं। 
 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed