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बिकरू कांड: केवल 623 लाइसेंसों का सत्यापन, एक और पीपीएस पर गिरेगी गाज
Tue, 09 Feb 2021 10:34 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 09 Feb 2021 10:34 AM IST
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
शस्त्र लाइसेंसों के सत्यापन के नाम पर पुलिस की खानापूरी सामने आई है। 42 हजार लाइसेंसों में सिर्फ 613 का ही सत्यापन किया। वहीं जिस आईपीएस (तत्कालीन सीओ लाइन) को एसआईटी ने दोषी ठहराया है, तब वे ट्रेनिंग पर थे। ऐसे में उनकी जगह पर तत्कालीन अनवरगंज सीओ जांच के दायरे में आ गए हैं।
कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : amar ujala
दरअसल, बिकरू कांड की जांच करने वाली एसआईटी ने बीते सप्ताह आईजी मोहित अग्रवाल को रिपोर्ट भेजी। इसमें शस्त्र लाइसेंसों के सत्यापन में 11 अफसरों (पुलिस व प्रशासन) को दोषी ठहराया। इसमें दो आईपीएस (तत्कालीन कानपुर डीआईजी अनंत देव और ट्रेनी आईपीएस व सीओ लाइन बीबीजीटीएस मूर्थी) का नाम भी शामिल है।
कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
जांच में पता चला कि जब चौबेपुर थाने से संबंधित शस्त्र लाइसेंस सत्यापित करने थे तब मूर्थी ट्रेनिंग पर थे। दो सप्ताह पहले सीओ लाइन का चार्ज छोड़ दिया था। उनकी जगह पर तत्कालीन अनवरगंज सीओ सैफुद्दीन बेग (वर्तमान एसीपी ट्रैफिक लखनऊ) के पास सीओ लाइन का चार्ज था। लिहाजा शस्त्र लाइसेंसों का सत्यापन उनकी जिम्मेदारी थी। सूत्रों के अनुसार अब जांच सैफुद्दीन के खिलाफ होगी।
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विकास दुबे एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
चौबेपुर समेत तमाम थानों के एक भी लाइसेंस का सत्यापन नहीं
25 नवंबर 2019 को शासन ने शस्त्र लाइसेंसों को सत्यापन करने संबंधी निर्देश जारी किया था। तत्कालीन एसएसपी ने इसके लिए एक टीम गठित की थी। इसका प्रभारी तत्कालीन एसपी क्राइम राजेश यादव, सीओ लाइन आईपीएस बीबीजीटीएस मूर्थी, आरआई-2 जटाशंकर पाठक, हेड मोहर्रिर सतीश शामिल थे।
इस बीच एक फरवरी 2020 को मूर्थी ट्रेनिंग पर चले गए और चार्ज सीओ सैफुद्दीन बेग को मिला। 12 फरवरी 2020 को चौबेपुर थाना क्षेत्र के सभी लाइसेंसों का सत्यापन होना था, जो नहीं हुआ। चूंकि जांच टीम का जो गठन हुआ था, उसमें मूर्थी का नाम था। इसलिए एसआईटी ने उन्हें दोषी माना है। जल्द इसमें सुधार किया जाएगा। चौबेपुर समेत तमाम थानों के एक भी शस्त्र लाइसेंसों का सत्यापन उस वक्त नहीं किया गया था।
25 नवंबर 2019 को शासन ने शस्त्र लाइसेंसों को सत्यापन करने संबंधी निर्देश जारी किया था। तत्कालीन एसएसपी ने इसके लिए एक टीम गठित की थी। इसका प्रभारी तत्कालीन एसपी क्राइम राजेश यादव, सीओ लाइन आईपीएस बीबीजीटीएस मूर्थी, आरआई-2 जटाशंकर पाठक, हेड मोहर्रिर सतीश शामिल थे।
इस बीच एक फरवरी 2020 को मूर्थी ट्रेनिंग पर चले गए और चार्ज सीओ सैफुद्दीन बेग को मिला। 12 फरवरी 2020 को चौबेपुर थाना क्षेत्र के सभी लाइसेंसों का सत्यापन होना था, जो नहीं हुआ। चूंकि जांच टीम का जो गठन हुआ था, उसमें मूर्थी का नाम था। इसलिए एसआईटी ने उन्हें दोषी माना है। जल्द इसमें सुधार किया जाएगा। चौबेपुर समेत तमाम थानों के एक भी शस्त्र लाइसेंसों का सत्यापन उस वक्त नहीं किया गया था।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
अभी जांच अधिकारी नहीं तय
एसआईटी ने जिन पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया है, उसमें आईपीएस, पीपीएस, इंस्पेक्टर व सिपाही हैं। आईजी ने मामले की रिपोर्ट डीआईजी को भेज दी है। डीआईजी अनंत देव को छोड़कर अन्य सभी की जांच डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह के अंडर में होगी। वही तय करेेंगे कि जांच कौन करेगा। अनंत देव के खिलाफ आईजी रेंज लखनऊ जांच कर रही हैं। बाकी पुलिसकर्मियों की जांच के लिए अभी जांच अधिकारी तय नहीं हैं।
एसआईटी ने जिन पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया है, उसमें आईपीएस, पीपीएस, इंस्पेक्टर व सिपाही हैं। आईजी ने मामले की रिपोर्ट डीआईजी को भेज दी है। डीआईजी अनंत देव को छोड़कर अन्य सभी की जांच डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह के अंडर में होगी। वही तय करेेंगे कि जांच कौन करेगा। अनंत देव के खिलाफ आईजी रेंज लखनऊ जांच कर रही हैं। बाकी पुलिसकर्मियों की जांच के लिए अभी जांच अधिकारी तय नहीं हैं।