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UP: ट्रैक पर मिले फायर सेफ्टी सिलिंडर में बंधा था ये वाला तार और टैग... न तो कोई कोड लिखा, न ही स्टीकर स्पष्ट
Thu, 03 Oct 2024 10:24 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर देहात
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर देहात
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 03 Oct 2024 10:24 AM IST
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UP Train News
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर देहात के अंबियापुर स्टेशन के पास डाउन ट्रैक पर मिले सिलिंडर में एक टैग लगा मिला है, जिससे उसे किसी ट्रेन का होने बताया गया है। वहीं, सिलिंडर पर न तो कोई कोड लिखा मिला न ही लगा स्टीकर स्पष्ट था। जिससे यह पता लगाया जा सके कि सिलिंडर किस ट्रेन का है। हालांकि यार्ड व कंट्रोल रूम को जानकारी दी गई है, जिससे सिलिंडर के बारे में पता लगाया जा सके।
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प्रयागराज मंडल के जनसंपर्क अधिकारी अमित सिंह का कहना है कि ट्रेन के इंजन के आगे कैटल गार्ड लगा होता है। वह इतना मजबूत होता है कि ट्रैक पर कोई पत्थर भी टकराता तो उसे अलग कर देता है यह तो फायर सेफ्टी सिलिंडर था। यदि यह फट भी जाता तो कोई फर्क नहीं पड़ता। इसके अंदर आग बुझाने वाला पाउडर होता है।
वहीं, आरपीएफ प्रभारी रजनीश राय का कहना है कि सिलिंडर में एक टैग मिला है, जो रेलवे के सिलिंडरों में लगा होता है। सिलिंडर भी लगभग खाली ही था। अब यह पता लगाया जा रहा कि यह किस ट्रेन का है।
वहीं, आरपीएफ प्रभारी रजनीश राय का कहना है कि सिलिंडर में एक टैग मिला है, जो रेलवे के सिलिंडरों में लगा होता है। सिलिंडर भी लगभग खाली ही था। अब यह पता लगाया जा रहा कि यह किस ट्रेन का है।
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- फोटो : अमर उजाला
इधर आरपीएफ, जीआरपी के बाद सीओ तनु उपाध्याय भी जांच के लिए पहुंची। उन्होंने घटना स्थल का निरीक्षण किया। मगर देर रात तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि सिलिंडर किसी ट्रेन का है या फिर उसे किसी साजिश के तहत ट्रैक पर डाला गया। हालांकि डाउन ट्रैक पर सिलिंडर मिलने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं।
स्टेशन पर मौजूद लोगों में चर्चा रही कि किसी आराजकतत्व ने शरारत की है। किसी कोच से सिलिंडर गिरकर सीधे रेलवे ट्रैक पर नहीं पहुंच सकता। ट्रेन की रफ्तार अधिक होने पर यदि गिरता भी तो वह ट्रैक से अलग पहुंच जाता। जिस स्थिति में बीचो बीच सिलिंडर रखा मिला है उससे उसके रखे जाने की संभावनाएं अधिक है।
स्टेशन पर मौजूद लोगों में चर्चा रही कि किसी आराजकतत्व ने शरारत की है। किसी कोच से सिलिंडर गिरकर सीधे रेलवे ट्रैक पर नहीं पहुंच सकता। ट्रेन की रफ्तार अधिक होने पर यदि गिरता भी तो वह ट्रैक से अलग पहुंच जाता। जिस स्थिति में बीचो बीच सिलिंडर रखा मिला है उससे उसके रखे जाने की संभावनाएं अधिक है।
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- फोटो : अमर उजाला
वहीं लोगों ने यह भी सवाल उठाए हैं कि ट्रेन की कोच में लगे फायर सेफ्टी सिलिंडर होल्डर से अच्छी तरह से फंसे हुए रहते हैं, बिना छेड़छाड़ के गिरने की संभावना कम है। सीओ तनु उपाध्याय ने बताया कि मौके पर जाकर जांच की गई है, अभी तक की जानकारी में सिलिंडर किसी ट्रेन से गिरना बताया गया। मालगाड़ी के गुजरने से पहले दो ट्रेन गुजरी है, पता लगाया जा रहा कि किस ट्रेन का सिलिंडर है।
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रिफीलिंग व एक्सपायरी डेट स्पष्ट नहीं
फायर सेफ्टी सिलिंडर में करीब एक मीटर एल्यूमीनियम का वायर बंधा था। एक तरफ नीले व काले रंग का स्टीकर लगा था। जिसमें एबीसी लिखा था। जबकि दूसरे तरफ एक सफेद खुदरा हुआ स्टीकर लगा था। इसमें सिलिंडर के टाइप, सर्विस डेट, रिफीलिंग डेट व एक्सपायरिंग डेट स्पष्ट नहीं थी। इसको लेकर भी सवाल उठे कि यदि किसी ट्रेन का यह सिलिंडर है तो इस स्थिति में कैसे, जबकि तार बंधा मिलने से लोगों में चर्चा रही कि क्या कोच के अंदर सिलिंडर तार से बंधा था। यदि तार से बंधा था स्वयं में सुरक्षा पर बड़ा सवाल है।
फायर सेफ्टी सिलिंडर में करीब एक मीटर एल्यूमीनियम का वायर बंधा था। एक तरफ नीले व काले रंग का स्टीकर लगा था। जिसमें एबीसी लिखा था। जबकि दूसरे तरफ एक सफेद खुदरा हुआ स्टीकर लगा था। इसमें सिलिंडर के टाइप, सर्विस डेट, रिफीलिंग डेट व एक्सपायरिंग डेट स्पष्ट नहीं थी। इसको लेकर भी सवाल उठे कि यदि किसी ट्रेन का यह सिलिंडर है तो इस स्थिति में कैसे, जबकि तार बंधा मिलने से लोगों में चर्चा रही कि क्या कोच के अंदर सिलिंडर तार से बंधा था। यदि तार से बंधा था स्वयं में सुरक्षा पर बड़ा सवाल है।