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ब्रिक्स समिट: 'कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहींं', ओपन सेशन में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की बड़ी बातें

Sun, 13 Sep 2026 11:43 AM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Sun, 13 Sep 2026 11:43 AM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स समिट के ओपन सेशन में कहा कि आज की आपस में जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के एजेंडे को रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी के चार स्तंभों पर आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने ग्लोबल साउथ की आवाज को महत्व देने, संकटों से निपटने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने और विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया।

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BRICS Summit 2026 Second Day PM Modi Speech Highlights Four Pillars of India Presidency Updates in hindi
पीएम मोदी। - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स समिट के ओपन सेशन को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसका व्यापक असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि महामारी, जलवायु आपदा और सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने यह साबित किया है कि आपस में जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।

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पीएम मोदी ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के काम को चार प्रमुख स्तंभों पर आगे बढ़ाया गया है। इनमें रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सभी सदस्य देशों के सहयोग से साझा सोच को ऐसे प्रयासों में बदलने की कोशिश की गई है, जिनका लाभ सभी देशों को मिल सके।

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ब्रिक्स के विस्तृत परिवार का स्वागत

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत ब्रिक्स के विस्तृत परिवार में सभी का स्वागत करते हुए की। उन्होंने कहा कि आज का सभागार अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और परंपराओं को एक साथ जोड़ रहा है। यह ब्रिक्स की बढ़ती ताकत, आकर्षण और उस पर जताए जा रहे अभूतपूर्व विश्वास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के एजेंडे को चार प्रमुख स्तंभों के आधार पर आगे बढ़ाया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य साझा विजन को विन-विन सहयोग में बदलना है।

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PM मोदी बोले- ग्लोबल साउथ का बढ़ा भरोसा

प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों का ब्रिक्स पर विश्वास लगातार मजबूत हुआ है। इसकी बड़ी वजह यह है कि इस मंच पर उनकी आवाज को जगह मिलती है और उनके अनुभवों को भी अहमियत दी जाती है। पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स की असली ताकत इसमें शामिल देशों की विविधता और उनके बीच आपसी सहयोग में है। अलग-अलग परिस्थितियों और अनुभवों वाले देशों का एक मंच पर साथ आना ब्रिक्स को अधिक प्रभावशाली बनाता है।

'एक देश का संकट दूसरे देशों को प्रभावित करता है'

विश्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में रुकावटों ने दिखाया है कि आज दुनिया के देश एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसी एक जगह आने वाला संकट दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकता है।

‘ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम’ बनाने पर सहमति

पीएम ने आगे कहा कि इसी वजह से भारत ने ब्रिक्स देशों को ऐसे संकटों से निपटने के लिए पहले से तैयार रखने पर खास जोर दिया है। इसके तहत संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोकने और उनसे निपटने के लिए ‘ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम’ बनाने पर सहमति बनी है। इसके अलावा आपदाओं से निपटने के लिए अर्ली वार्निंग डेटा इंटीग्रेशन गाइडलाइंस भी तैयार की गई हैं। छोटे उद्यमों को नॉलेज, फाइनेंस और नए मार्केट से जोड़ने के लिए ब्रिक्स एमएसएमई कोऑपरेशन पोर्टल का इनिशिएटिव लिया गया है। वहीं हमारे शहरों के बीच बेस्ट प्रैक्टिस साझा करने के लिए ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब की स्थापना की गई है।

विकास और पर्यावरण में संतुलन जरूरी

पीएम ने कहा कि भारतीय सभ्यता में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है। सदियों से हमारी मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि पूरक हैं। ब्रिक्स में भी हमने मानव विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बल दिया है। यही सस्टेनेबिलिटी का आधार है और यह भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व भी है। स्मार्ट ग्रिड्स और एनर्जी स्टोरेज के लिए ब्रिक्स डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया गया है। यह हमारे क्लीन एनर्जी सिस्टम को अधिक रिलायबल, एफिशिएंट और एक्सेसिबल बनाने में मदद करेगा। एग्रो इकोलॉजी और रिजेनरेटिव एग्रीकल्चर के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पारंपरिक ज्ञान को मॉडर्न साइंस से जोड़ेंगे। कम्युनिटी बेस्ड क्लाइमेट एडाप्टेशन के लिए तैयार किए गए सिद्धांत इंडिजिनस नॉलेज को क्लाइमेट एक्शन का महत्वपूर्ण आधार बनाएंगे। इन चारों स्तंभों पर आगे बढ़ते हुए ब्रिक्स के माध्यम से हमने इनक्लूसिव ग्लोबल ग्रोथ को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। हमारा मानना है कि ब्रिक्स में विकसित सॉल्यूशंस का लाभ केवल ब्रिक्स तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

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