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PHOTOS: दर्दनाक मौत के साथ दफन हो गई शिवमंदिर बनवाने की इच्छा, घर पहुंचने से पहले 'तार बना काल'
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 08 Dec 2018 08:52 AM IST
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ड्राइवर की जलकर मौत
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी के औरैया जिले में एक दर्दनाक हादसा हुआ। कंटेनर में आग लग जाने से ड्राइवर की जलकर मौत से उसके परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। चालक बबलू पुत्र कैलाश सिसोदिया फफूंद थाने के गांव सहदुल्लापुर का निवासी था। शुक्रवार सुबह जैसे ही उसकी मौत की सूचना गांव पहुंची, परिजनों में चीख पुकार मच गई। घर के लोग बदहवास हालत में घटनास्थल की ओर रवाना हो गए।
ड्राइवर की जलकर मौत
- फोटो : अमर उजाला
परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। दो भाई ईंट भट्ठों पर पथाई का काम करके आजीविका चलाते हैं। बड़ा भाई कल्लू गुरुवार को पत्नी सहित पथाई करने भटिंडा (पंजाब) गया है। बबलू 12 साल से ड्राइवरी कर पत्नी और तीन बच्चों के साथ वृद्ध मां-बाप सहारा बना हुआ था। महंगाई में परिवार की गुजर बसर न हो पाने से पत्नी हर महीने कुछ दिनों के लिए कानपुर शहर में सब्जी बेचकर कुछ पैसे कमा लाती थी। वह गांव में ठीकठाक घर नहीं बनवा पाया था और मां-बाप के साथ झोपड़ी में रह रहा था।
ड्राइवर की जलकर मौत
बबलू के तीन बच्चे हैं, जिसमें बड़ा बेटा 10 वर्षीय शिवम, छोटा बेटा आठ वर्षीय आयुष व सबसे छोटी पांच वर्षीय बेटी सिमरन है। मृतक की पत्नी शिवानी ने बताया कि वह महीने भर में एक बार आकर गृहस्थी का पूरा बंदोबस्त कर जाते थे। अभी घर पर कुछ दिन रहकर पांच दिन पहले ही वह ट्रक पर गए थे। माल लोड करने के बाद आज गाड़ी लेकर इधर से ही जाने को थे, लेकिन क्या पता था कि वह अब वापस घर नहीं आ पाएंगे...कहती हुई अपनी सुध बुध खो बैठी।
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ड्राइवर की जलकर मौत
- फोटो : अमर उजाला
बबलू के बारे में ग्रामीणों ने बताया कि वो घर बनवाने से पहले अपने पिता के घर के पास भगवान शंकर का मंदिर बनवाने के प्रयास में लगा हुआ था। वह इसके लिए ट्रक ड्राइवरी कर उससे मिलने वाली रकम से थोड़े-थोड़े रुपये लगाकर घर के नजदीक मंदिर के लिए एक बड़ा सा पक्का चबूतरा भी बनवा चुका था। अब केवल उस पर दीवारें बनने और लेंटर डालने का काम बाकी था। वह जब गांव आया तो भट्ठे से ईंटें भी खरीद लाया था। जल्द ही गाड़ी से वापस आकर मंदिर का निर्माण कराने की बात कही थी।
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ड्राइवर की जलकर मौत
- फोटो : अमर उजाला
कंटेनर को बचाने के चलते करंट की चपेट में आकर जान खो चुके बबलू को क्या पता था कि वह अपने घर नहीं पहुंच पाएगा। पिता कैलाश ने बताया कि अजीतमल से कंटेनर मोड़ते वक्त बबलू ने फोन पर बताया था कि वह अजीतमल पहुंच गया है। थोड़ी देर में ही घर पहुंच रहा है। लेकिन भगवान को और ही कुछ मंजूर था।