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अमृता की मौत के बाद छात्र बोले, एमबीबीएस फाइनल वर्ष की सबसे सख्त परीक्षा, जारी किया ‘कंडोलेंस नोट’

Sun, 26 Jan 2020 11:47 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 26 Jan 2020 11:47 PM IST
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Students said after Amrita's death, MBBS final year toughest test
अमृता सिंह की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
कानपुर के जीएसवीएम कॉलेज की एमबीबीएस पैरा जे-2 फाइनल वर्ष की छात्रा अमृता को सोशल मीडिया पर शोक संवेदना जाहिर करने के नाम कंडोलेंस नोट में मेडिकल छात्रों ने अपना सारा दर्द उड़ेल दिया। इसमें फाइनल वर्ष की परीक्षा के स्ट्रेस को बताने के साथ सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। कहा गया कि फाइनल वर्ष में छात्रों को पढ़ने के लिए सबसे कम समय मिलता है।


 
Students said after Amrita's death, MBBS final year toughest test
अमृता सिंह की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
उन्हें जरूरत से ज्यादा दौड़ाया जाता है। इसके अलावा वायवा में एक्सरे पर सवाल ऐसे पूछे जाते हैं, जैसे किसी छात्र से नहीं बल्कि रेडियोलॉजिस्ट का इंटरव्यू लिया जा रहा हो। एमबीबीएस फाइनल वर्ष की सबसे सख्त परीक्षा होती है। सोशल मीडिया पर अमृता को शोक संवेदना मैसेज बिना किसी के नाम का उल्लेख किए हुए आम छात्र-छात्राओं ने जारी किया है।

 
Students said after Amrita's death, MBBS final year toughest test
अमृता सिंह की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
इसमें कहा गया कि जब परीक्षा करीब होती है तो समय बिल्कुल नहीं होता। एक घंटे में सारे उपकरण दिखाए जाते हैं, जबकि इन्हें पूरे साल भी दिखाया जा सकता है। फाइनल वर्ष में सिर्फ 9 महीने पढ़ने का समय मिलता है। चार दिन में चार वायवा रखे जाते हैं। बिना बताए कक्षा में रोक दिया जाता है। इस संबंध में अंतिम समय पर बताया जाता है।

 
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Students said after Amrita's death, MBBS final year toughest test
बेटी अमृता की अस्थियां गंगा में प्रवाहित करते पिता - फोटो : अमर उजाला
यह भी कहा गया कि इस अव्यवस्था में किसी शिक्षक की कमी नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया ही दोषपूर्ण है। कालेज में शिक्षकों और पीजी सीट की कमी है। सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में मेडिकल छात्रों ने बताया कि मेडिकल की पढ़ाई और उसकी प्रक्रिया पर सवाल उठना लाजमी है। 75 परसेंट से ऊपर अटेंडेंस का दबाव हर वक्त दिमाग को अपने प्रतिद्वंद्वी से आगे निकलने के लिए झकझोरता है।

 
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Students said after Amrita's death, MBBS final year toughest test
अमृता के अंतिम संस्कार के बाद बेसुध परिजन - फोटो : अमर उजाला
इस कारण हम सुकून से एक पल नहीं बिता पाते हैं। बिना कोई कारण बताए ही आखिरी क्षण में परीक्षा देने से मना कर दिया जाता है। एडमिट कार्ड मिलने तक का एक-एक दिन गिन-गिन कर काटते हैं। अमृता की मौत मेडिकल की पढ़ाई और उसकी प्रक्रिया के लिए बड़ा सवाल छोड़ गया है।
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