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बुद्ध पूर्णिमा विशेष: मन के भीतर झांकने की साधना है 'विपश्यना', रह सकते हैं 10 घंटे मौन तो पढ़ें खबर

Sat, 18 May 2019 03:12 PM IST
शिखा पांडेय प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 18 May 2019 03:12 PM IST
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sadhana center near the Dhori Ghat on Kanpur Ganga
कानपुर में गंगा किनारे ढ्योढ़ी घाट के पास स्थित साधना केंद्र - फोटो : अमर उजाला
ध्यान! यह शब्द अब आप अक्सर सुनते हैं। दरअसल, भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों में तनाव का स्तर बढ़ा है। इससे निजात पाने के लिए ‘ध्यान’ को महत्ता दी, उसे बल मिला है। देश-दुनिया में ध्यान की तमाम पद्धतियां प्रचलित हैं। इनमें से एक है विपश्यना ध्यान पद्धति। लोग इसे विपश्यना साधना के नाम से बुलाते हैं। असल में, विपश्यना मन के भीतर झांकने की साधना है। बुद्ध पूर्णिमा पर पढ़ें ये विशेष रिपोर्ट...


इस कठिन साधना को कराने और सिखाने के देश में चुनिंदा केंद्र हैं। अपना कानपुर उनमें से एक है। शहरी क्षेत्र से थोड़ा दूर (महाराजपुर में) गंगा किनारे ड्योढ़ी घाट जाने वाले रास्ते में यह केंद्र मिलता है। सोने से धमकते गुंबदों वाले इस साधना केंद्र की भव्यता देखते बनती है। कानपुर में इसकी स्थापना वर्ष 2012 में हुई थी। इसका निर्माण म्यांमार के साधना केंद्र ‘स्वेडागान पगोडा’ की तर्ज पर हुआ है।
sadhana center near the Dhori Ghat on Kanpur Ganga
कानपुर में गंगा किनारे ढ्योढ़ी घाट के पास स्थित साधना केंद्र - फोटो : अमर उजाला
विपश्यना साधना में साधक को लगातार 10-10 घंटे मौन रहना होता है। बाहरी दुनिया से संपर्क तोड़ना होता है। पढ़ाई लिखाई, धार्मिक अनुष्ठानों तथा अन्य क्रियाकलापों से दूर रहना होता है। इसमें ध्यान के अलावा पंचशील का पालन करना सिखाया जाता है।

ये पंचशील हैं झूठ न बोलना, चोरी न करना, नशा न करना, हत्या न करना और व्यभिचार न करना। ध्यान की शक्ति का अहसास करने के लिए शहरवासियों को इस कठिन साधना के शिविरों का अनुभव जरूर लेना चाहिए।
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कानपुर में गंगा किनारे ढ्योढ़ी घाट के पास स्थित साधना केंद्र - फोटो : अमर उजाला
2500 वर्ष पूर्व हुई थी साधना की खोज 
विपश्यना साधना को लभगग 2500 वर्ष पूर्व भगवान गौतम बुद्ध ने खोजा था। उन्होंने अपने जीवन के 45 वर्षों के शासन में जो अभ्यास किया और जो लोगों को प्रेरित करता है, यह उसी का सार है। साधना केंद्र के ट्रस्टी अवधेश साहू बताते हैं कि विपश्यना साधना इंसान को इस योग्य बनाती है कि वे अपने भीतर शांति और सामंजस्य का अनुभव कर सकें। यह साधना चित्त को निर्मल बनाती है। मन की व्याकुलता और उसके कारणों को दूर करती जाती है। इस साधना के निरंतर अभ्यास से इंसान अपने मानस को समस्त विकारों से दूर कर सकता है। भगवान बुद्ध ने इसी साधना के जरिये बुद्धत्व प्राप्त किया था। उन्होंने इसे सत्य की उपासना बताया है। यह सत्य में जीने का अभ्यास है। वर्तमान में जीने की कला है, जो जैसा है, उसे वैसा ही समझने की साधना है।
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कानपुर में गंगा किनारे ढ्योढ़ी घाट के पास स्थित साधना केंद्र - फोटो : अमर उजाला
शिविर के लिए ऑनलाइन आवेदन 
विपश्यना साधना केंद्र में विश्व की पुरातन ध्यान विधि को अपनाने, जानने और सीखने के लिए महीने में दो शिविर लगते हैं। प्रत्येक शिविर 10 दिन का होता है। प्रवेश पाने के लिए ऑनलाइन (www.dhammakalyana.org) आवेदन किया जाता है। शिविर के लिए चुने गए लोगों से किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता। शिविर समाप्त होने के बाद साधक चाहे तो दान दे सकता है। 
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कानपुर में गंगा किनारे ढ्योढ़ी घाट के पास स्थित साधना केंद्र - फोटो : अमर उजाला
15 बीघा में स्थापित है साधना केंद्र 
कानपुर में बने विपश्यना साधना केंद्र की भव्यता देखते बनती है। यह करीब 15 बीघा (36000 वर्ग गज) क्षेत्रफल में स्थापित है। इस साधना केंद्र में पुरुषों के लिए 104 और महिलाओं के लिए 63 कक्ष हैं। यहां शिविर के समय प्रतिदिन सुबह 4:30 बजे से रात नौ बजे तक साधना चलती है। माह का पहला शिविर पांच से 16 तारीख तक और दूसरा शिविर 20 से 31 या एक तारीख तक चलता है।
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