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राष्ट्रपति ने आखिर क्यों कहा-'कर्मण्येवाधिकारस्ते माफलेषुकदाचन', ये 10 विचार बदलेंगे आपकी सोच

Sat, 06 Oct 2018 02:49 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 06 Oct 2018 02:49 PM IST
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president ramnath kovind statement about karma in kanpur
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कानपुर में कहा कि गीता महोत्सव का सार मैंने गृहण किया। सभी को गीता ज्ञान लेना चाहिए। नैतिकता की शिक्षा से मनुष्य को अच्छा मनुष्य बनाया जा सकता है। चरित्र का निर्माण संस्कारों से होता है। संस्कारों की शिक्षा बहुत जरूरी है।


 
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
समाज के उत्थान के लिए हर व्यक्ति में संस्कार जरूरी है। सशक्त भारत का निर्माण करने के लिए सामाजिक, आर्थिक न्याय, समता और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य बहुत जरूरी हैं। संस्कारयुक्त शिक्षा देना हमारा धर्म है। स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण से शिकागो के लोगों का दिल जीत लिया था।
 
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
स्वामी जी के हृदय से निकलते हुए शब्द विश्वप्रेम को बढ़ावा देते हैंं। वेस्टर्न कंट्रीज में लेडीज एंड जेंटलमैन कहा जाता है।
 
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
जब हम इंसान दूसरे इंसान को कहेंगे भाई-बहन तो पत्नी के अतिरिक्त सभी हमारे भाई-बहन हैं, यह विचार मातृत्व शक्ति को बढ़ावा देते हैं। यही हमारी भारतीय संस्कृति की अवधारणा है। 
 
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
हर मनुष्य प्रत्येक क्षण द्वंदों का सामना करता रहता है। समय पीछे हो जाता है और द्वंद सामने आते हैं। राष्ट्रपति ने कहा-'कर्मण्येवाधिकारस्ते माफलेषुकदाचन' यानि हमें बस कर्म करते रहना चाहिए फल की चिंता बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए। 
 
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