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चंद्र ग्रहण के दिन सावधान रहें गर्भवती महिलाएं, नहीं ताे हाे सकता है...
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 31 Jan 2018 09:12 PM IST
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31 जनवरी काे 2018 का पहला खग्रास चंद्र ग्रहण पड़ेगा। इस दाैरान अापकाे कुछ बाताें पर ध्यान देने की जरूरत है। ग्रहण के वक्त वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए यह समय को अशुभ माना जाता है।
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चंद्र ग्रहण के समय मंदिर के दरवाजे बंद कर देने चाहिए और किसी भी भगवान की मूर्ति को हाथ नहीं लगाना चाहिए। इस समय तुलसी, शमी वृ्क्ष को छूना नहीं चाहिए। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ग्रहण के समय घर से बाहर न निकलें। ग्रहण के समय भोजन करना, भोजन पकाना, सोना नहीं चाहिए। इस दौरान सब्जी काटना, सीना-पिरोना आदि से बचना चाहिए।
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ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। जबकि पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए। सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना। यदि गंगा-जल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना फलदायी होता है।
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ग्रहण-काल जप, दीक्षा, मंत्र-साधना (विभिन्न देवों के निमित्त) के लिए उत्तम काल है। ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है। इस दौरान अल्ट्रावॉयलेट किरणें निकलती हैं जो एंजाइम सिस्टम को प्रभावित करती हैं इसलिए ग्रहण के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इस समय चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है।
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जिससे गुरुत्वाकर्षण का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। इसी कारण समुद्र में ज्वार भाटा आते हैं। भूकंप भी गुरुत्वाकर्षण के घटने और बढ़ने के कारण ही आते हैं। ज्योतिष के अनुसार राहु, केतु को अनिष्टकारण ग्रह माना गया है। चंद्रग्रहण की के समय राहु और केतु की छाया सूर्य और चंद्रमा पर पड़ती है। इस कारण सृष्टि इस दौरान अपवित्र और दूषित को हो जाती है।