कानपुर में किडनी के अवैध ट्रांसप्लांट मामले में मंगलवार को जेल भेजे गए आरोपियों में शामिल शिवम अग्रवाल ही मुख्य दलाल है। वह आठवीं पास एंबुलेंस चालक है लेकिन क्षेत्रीय लोगों से खुद को डॉक्टर बता रखा है। क्षेत्रीय लोग उसे डॉक्टर शिवम के नाम से जानते हैं। उसका मुख्य काम इलाके में संचालित अस्पतालों के लिए गांव-देहात से मरीज खोजकर लाना था।
पुलिस की जांच में सामने आया कि कल्याणपुर के देवी सहायनगर का रहने वाला आरोपी शिवम लोगों को झांसे में लेने के लिए एप्रेन और गले में स्टेथेस्कोप लटका कर घूमता था। शिवम मामले में वांछित डॉ. रोहित उर्फ राहुल, आहूजा हॉस्पिटल की डॉ. प्रीति आहूजा और डॉ. सुरजीत आहूजा के संपर्क में था। उसने ही देहरादून में पढ़ रहे आयुष से संपर्क किया था। आयुष को रुपये की जरूरत थी। उसे बातों में फंसा कर छह लाख रुपयों में किडनी देने के लिए राजी कर लिया।
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किडनी कांड के मरीज पारुल और आयुष चौधरी को देखते डॉक्टर
- फोटो : amar ujala
हिचक दूर करने के लिए इंटरनेट पर दिखाए कई वीडियो
पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने कबूला कि पहले आयुष किडनी देने से हिचक रहा था। ऐसे में उसे इंटरनेट पर किडनी से जुड़े कई ऐसे वीडियो दिखाए जिनमें किडनी देने वाले व्यक्ति एक किडनी से बिना किसी स्वास्थ्य समस्या के जीवन काटते दिखाए गए थे।
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आहूजा हॉस्पिटल और डॉ. प्रीति आहूजा
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वीडियो देखने के बाद और मिलने वाले छह लाख रुपयों के लालच में आकर आयुष ने हामी भर दी थी। ट्रांसप्लांट के बाद शिवम को सात लाख रुपये दिए थे जिसमें से 3.50 लाख उसने आयुष को दिए। ट्रांसप्लांट करने वाले आहूजा हॉस्पिटल को 2.75 लाख और मेड लाइफ हॉस्पिटल को ट्रीटमेंट के लिए 25 हजार रुपये दिए थे।
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कल्याणपुर स्थित प्रिया और मेड लाइफ अस्पताल
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वहीं, शिवम ने 50 हजार रुपये अपने पास बतौर कमीशन रखे थे। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि किडनी देने वाले युवक को इलाज के लिए हैलट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसके पास से कई म्यूल अकाउंट भी मिले हैं। सेहत में सुधार होने पर उससे इनके बारे में पूछताछ की जाएगी।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
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मेरठ, नोएडा, दिल्ली से आकर डॉक्टरों की टीम करती थी सर्जरी
किडनी ट्रांसप्लांट के खेल में शामिल आरोपियों के तार सीधे तौर पर मेरठ, नोएडा और दिल्ली से जुड़ रहे हैं। वहां से तय समय में सर्जन, एनेस्थीसिया के डॉक्टर, ओटी असिस्टेंट, स्टाफ नर्स शहर आते थे। निर्धारित नर्सिंगहोम में किडनी ट्रांसप्लांट कर रवाना हो जाते थे।