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पहले 'गद्दार' कहलाया, फिर लॉर्ड्स में रचा इतिहास: कैसे एक खिलाड़ी ने बदला इंग्लिश क्रिकेट? वर्ल्ड कप भी जिताया
Thu, 10 Sep 2026 12:10 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:10 PM IST
सार
डबलिन की शौकिया क्रिकेट पिचों से लॉर्ड्स में विश्व कप जीतने तक का सफर आसान नहीं था। आयरलैंड में जन्मे इस खिलाड़ी ने बेहतर क्रिकेट के लिए इंग्लैंड का रुख किया और आलोचनाओं का सामना किया। 2015 विश्व कप की शर्मनाक हार के बाद उन्होंने इंग्लैंड की सफेद गेंद की क्रिकेट को नई सोच दी और 2019 में टीम को पहली बार वनडे विश्व कप जिताया। आइए उस क्रिकेटर की कहानी जानते हैं...
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इयोन मॉर्गन की कहानी
- फोटो : Twitter
विस्तार
क्रिकेट की दुनिया में कुछ कप्तान सिर्फ ट्रॉफियां नहीं जीतते, वे पूरी टीम की सोच बदल देते हैं। उनकी कप्तानी का असर स्कोरकार्ड से कहीं आगे दिखाई देता है। इयोन मॉर्गन भी ऐसे ही कप्तानों में शामिल हैं। आयरलैंड की शौकिया क्रिकेट पिचों से निकले मॉर्गन ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड को विश्व चैंपियन बनाया। हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने की राह आसान नहीं थी। इंग्लैंड का रुख करने के बाद मॉर्गन को अपने ही देश में आलोचना और 'गद्दार' जैसे शब्दों का सामना करना पड़ा।
10 सितंबर 1986 को आयरलैंड के डबलिन में जन्मे इयोन मॉर्गन की क्रिकेट प्रतिभा ऐसे माहौल में विकसित हुई, जहां क्रिकेट बेहद सीमित लोकप्रियता वाला खेल था। उस समय आयरलैंड का स्थानीय क्रिकेट सेटअप पूरी तरह शौकिया था। राष्ट्रीय टीम में पोस्टमैन, राजमिस्त्री और मैकेनिक तक खेलते थे। हालांकि, मॉर्गन के पास एक खास खेल पृष्ठभूमि भी थी- हर्लिंग।
यह आयरलैंड का पारंपरिक और तेज रफ्तार खेल है, जिसमें लकड़ी की स्टिक का इस्तेमाल किया जाता है। हर्लिंग ने मॉर्गन की प्रतिक्रिया क्षमता और कलाई की ताकत को निखारा। आगे चलकर यही उनकी बल्लेबाजी की पहचान बनी। मॉर्गन रिवर्स स्वीप और छोटी बाउंड्री के ऊपर पिक-अप शॉट खेलने के मामले में अपने समय से काफी आगे नजर आए। उनकी प्रतिभा इतनी साफ थी कि कम उम्र में ही उन्होंने आयरलैंड की जूनियर टीमों में जगह बनानी शुरू कर दी।
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10 सितंबर 1986 को आयरलैंड के डबलिन में जन्मे इयोन मॉर्गन की क्रिकेट प्रतिभा ऐसे माहौल में विकसित हुई, जहां क्रिकेट बेहद सीमित लोकप्रियता वाला खेल था। उस समय आयरलैंड का स्थानीय क्रिकेट सेटअप पूरी तरह शौकिया था। राष्ट्रीय टीम में पोस्टमैन, राजमिस्त्री और मैकेनिक तक खेलते थे। हालांकि, मॉर्गन के पास एक खास खेल पृष्ठभूमि भी थी- हर्लिंग।
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यह आयरलैंड का पारंपरिक और तेज रफ्तार खेल है, जिसमें लकड़ी की स्टिक का इस्तेमाल किया जाता है। हर्लिंग ने मॉर्गन की प्रतिक्रिया क्षमता और कलाई की ताकत को निखारा। आगे चलकर यही उनकी बल्लेबाजी की पहचान बनी। मॉर्गन रिवर्स स्वीप और छोटी बाउंड्री के ऊपर पिक-अप शॉट खेलने के मामले में अपने समय से काफी आगे नजर आए। उनकी प्रतिभा इतनी साफ थी कि कम उम्र में ही उन्होंने आयरलैंड की जूनियर टीमों में जगह बनानी शुरू कर दी।
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मॉर्गन की कहानी
- फोटो : ANI
16 साल की उम्र में किया सीनियर डेब्यू
इयोन मॉर्गन ने सिर्फ 16 साल की उम्र में आयरलैंड की सीनियर राष्ट्रीय टीम के लिए डेब्यू किया और वह टीम के लिए खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने। हालांकि, किशोर उम्र में ही मॉर्गन के सपने सिर्फ आयरलैंड तक सीमित नहीं थे। मॉर्गन अपने स्कूल के शिक्षकों और साथियों से साफ कहते थे कि उनका सबसे बड़ा सपना आयरलैंड से आगे जाकर इंग्लैंड के लिए खेलना और टेस्ट क्रिकेट में देश का प्रतिनिधित्व करना है। 2005 में उन्होंने अपना सामान पैक किया और पेशेवर क्रिकेट खेलने के लिए मिडिलसेक्स काउंटी क्रिकेट क्लब से जुड़ गए। लंदन उनका नया घर बन गया। इसके बाद 2009 में मॉर्गन ने आधिकारिक तौर पर अपनी अंतरराष्ट्रीय निष्ठा आयरलैंड से इंग्लैंड की ओर कर ली।
इयोन मॉर्गन ने सिर्फ 16 साल की उम्र में आयरलैंड की सीनियर राष्ट्रीय टीम के लिए डेब्यू किया और वह टीम के लिए खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने। हालांकि, किशोर उम्र में ही मॉर्गन के सपने सिर्फ आयरलैंड तक सीमित नहीं थे। मॉर्गन अपने स्कूल के शिक्षकों और साथियों से साफ कहते थे कि उनका सबसे बड़ा सपना आयरलैंड से आगे जाकर इंग्लैंड के लिए खेलना और टेस्ट क्रिकेट में देश का प्रतिनिधित्व करना है। 2005 में उन्होंने अपना सामान पैक किया और पेशेवर क्रिकेट खेलने के लिए मिडिलसेक्स काउंटी क्रिकेट क्लब से जुड़ गए। लंदन उनका नया घर बन गया। इसके बाद 2009 में मॉर्गन ने आधिकारिक तौर पर अपनी अंतरराष्ट्रीय निष्ठा आयरलैंड से इंग्लैंड की ओर कर ली।
इयोन मॉर्गन
- फोटो : ANI
'गद्दार' कहे जाने के बावजूद नहीं बदला फैसला
इंग्लैंड का रुख करने का फैसला मॉर्गन के लिए आसान नहीं था। आयरलैंड में कई क्रिकेट प्रशंसकों ने उन्हें 'टर्नकोट' और 'आयरिश गद्दार' तक कहा। लोगों को लगा कि उनके सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में से एक ने उन्हें छोड़ दिया है, लेकिन आलोचनाओं के बीच मॉर्गन अपने फैसले पर कायम रहे। उनका लक्ष्य दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ सबसे बड़े मंच पर खुद को परखना था। आखिरकार उन्हें इंग्लैंड की टीम में जगह मिली और वह सपना पूरा हुआ, जिसे उन्होंने किशोर उम्र में देखा था। हालांकि, कप्तानी में मॉर्गन का सबसे बड़ा इम्तिहान अभी बाकी था।
इंग्लैंड का रुख करने का फैसला मॉर्गन के लिए आसान नहीं था। आयरलैंड में कई क्रिकेट प्रशंसकों ने उन्हें 'टर्नकोट' और 'आयरिश गद्दार' तक कहा। लोगों को लगा कि उनके सबसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में से एक ने उन्हें छोड़ दिया है, लेकिन आलोचनाओं के बीच मॉर्गन अपने फैसले पर कायम रहे। उनका लक्ष्य दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ सबसे बड़े मंच पर खुद को परखना था। आखिरकार उन्हें इंग्लैंड की टीम में जगह मिली और वह सपना पूरा हुआ, जिसे उन्होंने किशोर उम्र में देखा था। हालांकि, कप्तानी में मॉर्गन का सबसे बड़ा इम्तिहान अभी बाकी था।
मॉर्गन की कहानी
- फोटो : ANI
2015 में टूटी टीम, कप्तान के रूप में मिली सबसे बड़ी चुनौती
2015 वनडे विश्व कप से कुछ ही दिन पहले एलिस्टेयर कुक को कप्तानी से हटा दिया गया और टीम की कमान इयोन मॉर्गन को सौंप दी गई। इंग्लैंड उस समय सफेद गेंद की क्रिकेट में एक पुराने और डिफेंसिव अंदाज के साथ खेल रहा था। विश्व कप में टीम का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। इंग्लैंड को बांग्लादेश के खिलाफ हार के बाद ग्रुप चरण में ही टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा। मीडिया की आलोचना तेज थी और प्रशंसक भी निराश थे। इंग्लैंड की सफेद गेंद की क्रिकेट अपने सबसे निचले दौर में पहुंच गई थी।
हार के बाद मॉर्गन ने बदल दी पूरी सोच
इस हार से पीछे हटने के बजाय इयोन मॉर्गन ने इसे बदलाव का आधार बनाया। कोच ट्रेवर बेलिस के साथ मिलकर उन्होंने टीम की सोच बदलने की कोशिश की। मॉर्गन ने अपने खिलाड़ियों को साफ संदेश दिया कि उन्हें बिना डर के क्रिकेट खेलनी होगी। उनका संदेश था, 'अगर आप छक्का लगाने की कोशिश में आउट होते हैं, तो मैं आपको टीम से बाहर नहीं करूंगा। अगर आप अपना विकेट बचाने के लिए डिफेंसिव क्रिकेट खेलते हैं, तो आप मेरी टीम में नहीं खेलेंगे।' मॉर्गन की इसी सोच के साथ जोस बटलर, जेसन रॉय और बेन स्टोक्स जैसे खिलाड़ियों को आक्रामक क्रिकेट खेलने की आजादी मिली। इंग्लैंड ने बड़े स्कोर बनाने शुरू किए और कई मौकों पर टीम ने 400 से ज्यादा रन भी बनाए।
2015 वनडे विश्व कप से कुछ ही दिन पहले एलिस्टेयर कुक को कप्तानी से हटा दिया गया और टीम की कमान इयोन मॉर्गन को सौंप दी गई। इंग्लैंड उस समय सफेद गेंद की क्रिकेट में एक पुराने और डिफेंसिव अंदाज के साथ खेल रहा था। विश्व कप में टीम का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। इंग्लैंड को बांग्लादेश के खिलाफ हार के बाद ग्रुप चरण में ही टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा। मीडिया की आलोचना तेज थी और प्रशंसक भी निराश थे। इंग्लैंड की सफेद गेंद की क्रिकेट अपने सबसे निचले दौर में पहुंच गई थी।
हार के बाद मॉर्गन ने बदल दी पूरी सोच
इस हार से पीछे हटने के बजाय इयोन मॉर्गन ने इसे बदलाव का आधार बनाया। कोच ट्रेवर बेलिस के साथ मिलकर उन्होंने टीम की सोच बदलने की कोशिश की। मॉर्गन ने अपने खिलाड़ियों को साफ संदेश दिया कि उन्हें बिना डर के क्रिकेट खेलनी होगी। उनका संदेश था, 'अगर आप छक्का लगाने की कोशिश में आउट होते हैं, तो मैं आपको टीम से बाहर नहीं करूंगा। अगर आप अपना विकेट बचाने के लिए डिफेंसिव क्रिकेट खेलते हैं, तो आप मेरी टीम में नहीं खेलेंगे।' मॉर्गन की इसी सोच के साथ जोस बटलर, जेसन रॉय और बेन स्टोक्स जैसे खिलाड़ियों को आक्रामक क्रिकेट खेलने की आजादी मिली। इंग्लैंड ने बड़े स्कोर बनाने शुरू किए और कई मौकों पर टीम ने 400 से ज्यादा रन भी बनाए।
मॉर्गन की कहानी
- फोटो : ANI
लॉर्ड्स में पूरा हुआ मॉर्गन का सबसे बड़ा सपना
मॉर्गन की कप्तानी में इंग्लैंड के सफेद गेंद क्रिकेट में आया बदलाव 2019 वनडे विश्व कप में अपने सबसे बड़े मुकाम पर पहुंचा। इंग्लैंड ने फाइनल में न्यूजीलैंड का सामना किया और लॉर्ड्स में मुकाबला रोमांच की सारी हदें पार कर गया। मैच टाई हुआ। इसके बाद सुपर ओवर भी बराबरी पर खत्म हुआ और बेहद नाटकीय अंदाज में इंग्लैंड ने विश्व कप अपने नाम किया। यह पुरुष वनडे विश्व कप में इंग्लैंड का पहला खिताब था। डबलिन की शौकिया पिचों से निकले इयोन मॉर्गन अब लॉर्ड्स में इंग्लैंड को विश्व चैंपियन बना चुके थे। जिस कप्तान को कभी टीम की खराब शुरुआत के बाद आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था, वही अब इंग्लैंड के क्रिकेट इतिहास में सबसे यादगार अध्याय लिख चुका था।
कप्तानी छोड़ी, लेकिन विरासत छोड़ गए
2022 तक लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का असर और खराब होती व्यक्तिगत फॉर्म सामने आने लगी। फिटनेस से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ीं। आखिरकार जून 2022 में इयोन मॉर्गन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का एलान कर दिया और कप्तानी की जिम्मेदारी जोस बटलर को सौंप दी।
मॉर्गन की कप्तानी में इंग्लैंड के सफेद गेंद क्रिकेट में आया बदलाव 2019 वनडे विश्व कप में अपने सबसे बड़े मुकाम पर पहुंचा। इंग्लैंड ने फाइनल में न्यूजीलैंड का सामना किया और लॉर्ड्स में मुकाबला रोमांच की सारी हदें पार कर गया। मैच टाई हुआ। इसके बाद सुपर ओवर भी बराबरी पर खत्म हुआ और बेहद नाटकीय अंदाज में इंग्लैंड ने विश्व कप अपने नाम किया। यह पुरुष वनडे विश्व कप में इंग्लैंड का पहला खिताब था। डबलिन की शौकिया पिचों से निकले इयोन मॉर्गन अब लॉर्ड्स में इंग्लैंड को विश्व चैंपियन बना चुके थे। जिस कप्तान को कभी टीम की खराब शुरुआत के बाद आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था, वही अब इंग्लैंड के क्रिकेट इतिहास में सबसे यादगार अध्याय लिख चुका था।
कप्तानी छोड़ी, लेकिन विरासत छोड़ गए
2022 तक लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का असर और खराब होती व्यक्तिगत फॉर्म सामने आने लगी। फिटनेस से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ीं। आखिरकार जून 2022 में इयोन मॉर्गन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का एलान कर दिया और कप्तानी की जिम्मेदारी जोस बटलर को सौंप दी।
मॉर्गन की कहानी
- फोटो : ANI
2023 की शुरुआत में मॉर्गन ने बाकी वैश्विक फ्रेंचाइजी लीग से भी संन्यास ले लिया। हालांकि, क्रिकेट से उनका रिश्ता खत्म नहीं हुआ। वह स्काई स्पोर्ट्स क्रिकेट के लिए विश्लेषक और कमेंटेटर के तौर पर नजर आते हैं। इसके अलावा उन्हें मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (MCC) की मुख्य समिति में क्रिकेट चेयर की जिम्मेदारी भी मिली है।
खिलाड़ियों में जोश भरने की उनकी काबीलियत और जीत का जज्बा लाने की उनकी खासियत की वजह से वह आईपीएल में भी हिट रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, मॉर्गन चेन्नई सुपर किंग्स के हेड कोच बनने की रेस में सबसे आगे हैं। डबलिन के शौकिया मैदान से लॉर्ड्स की विश्व चैंपियन टीम की कप्तानी तक इयोन मॉर्गन का सफर सिर्फ एक क्रिकेटर की कहानी नहीं है। यह उस सोच की कहानी है, जिसने इंग्लैंड के सफेद गेंद क्रिकेट खेलने का तरीका ही बदल दिया।
खिलाड़ियों में जोश भरने की उनकी काबीलियत और जीत का जज्बा लाने की उनकी खासियत की वजह से वह आईपीएल में भी हिट रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, मॉर्गन चेन्नई सुपर किंग्स के हेड कोच बनने की रेस में सबसे आगे हैं। डबलिन के शौकिया मैदान से लॉर्ड्स की विश्व चैंपियन टीम की कप्तानी तक इयोन मॉर्गन का सफर सिर्फ एक क्रिकेटर की कहानी नहीं है। यह उस सोच की कहानी है, जिसने इंग्लैंड के सफेद गेंद क्रिकेट खेलने का तरीका ही बदल दिया।