इटावा जिले में मम्मी-पापा के लाड़ले छोटू उर्फ लव का शव उनके ही साथ बुधवार सुबह पहुंचा, तो कोहराम मच गया। रोते-बिलखते परिजन बस यही कह रहे थे कि सबको हंसते खेलते लाने का वादा करके अनिल क्यों बच्चों को अपने साथ लेकर चला गया।
जाग जा मेरे लाल...ताई तुझे खिला रही है: मन्नतों से मिला था छोटू, मम्मी-पापा के साथ ही छोड़ गया दुनिया
उठ जा मेरे लाल, ताई तुझे खिला रही है
बोली- जाग जा मेरे लाल...देख ताई तुझे खिला रही है...हर बार तो चाची की गोद में आकर खिलखिला उठता था, आज क्या हुआ, उठ जा मेरे लाल। वहीं, अनिल का भाई राजू कह रहा था, किसी ने भी ऐसे कंधों पर तुझे लाने की नहीं सोची थी...उठ जा मेरे भाई।
एक बजे हुए तीनों का अंतिम संस्कार
अन्य भाई सुरेश, राजेश सतीश भी रो-रोकर यही कह रहे थे कि हम सब बड़े थे तुझे इतनी जल्दी जाने की क्या थी। प्रभु हम में से किसी को उठा लेता। करीब छह घंटे तक तीनों के शव घर पर ही रखे रहे। इसके बाद श्मशान घाट ले जाए गए। यहां लगभग एक बजे तीनों का अंतिम संस्कार किया गया।
चार बेटियों के बाद छोटू ने भरी थी गोद
अनिल और यशोदा के चार बेटियां थीं। सबसे बड़ी पायल (10), प्रियांशी (8), सौम्या (7), पल्लवी (3) बेटियां थीं। ऐसे में दोनों को एक बेटे की चाहत थी। इसके लिए उन्होंने कई मंदिरों और दरगाहों में मन्नतें भी मांगीं। लगभग दो साल पहले अनिल अपनी पत्नी के साथ ससुराल मूसानगर के शिव मंदिर में दर्शन करने गया था।
मन्नतों से हुआ था बेटा
यहां पर भी दोनों ने बेटा होने की मन्नत मांगी थी। इसके बाद ही यशोदा गर्भवती हो गई थी। ऐसे में छोटू के छह माह होने के बाद करीब डेढ़ माह पहले दोनों ने इसी मंदिर में मुंडन कराकर मन्नत पूरी करने के लिए का धन्यवाद दिया था। सास-ससुर के दबाव बनाने पर अनिल परिवार के साथ वहीं रुक गया था।