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कर्नाटक एसआईआर विवाद: भाजपा नेता रवि पाटिल समेत कई लोगों पर दर्ज की गई एफआईआर, शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाए?
Fri, 02 Oct 2026 01:33 PM IST
अमन मौर्या
पीटीआई, बेलगावी, कर्नाटक
पीटीआई, बेलगावी, कर्नाटक
Published by: अमन मौर्या
Updated Fri, 02 Oct 2026 01:33 PM IST
सार
कर्नाटक के बेलगावी में एसआईआर विवाद के बीच बीजेपी नेता रवि पाटिल व अन्य पर एफआईआर दर्ज किया गया है। राज्य के बीदर और मैसूरु से भी ऐसे मामले सामने आए हैं। गुरुवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने धरना भी दिया था।
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कर्नाटक एसआईआर विवाद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कर्नाटक में बीजेपी नेता रवि पाटिल और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने बेलगावी जिले में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान 'फॉर्म-7' एप्लीकेशन का इस्तेमाल करके अल्पसंख्यक समुदाय के 198 वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की कोशिश की। 30 सितंबर को बेलगावी मार्केट पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज किया गया था। यह शिकायत मीरसाब सनादी ने की थी, जो बेलगावी उत्तर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 12 में बूथ लेवल एजेंट के तौर पर काम कर रहे थे। एफआईआर के मुताबिक, शिकायतकर्ता का आरोप है कि हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा की जा रही एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 22 सितंबर को दोपहर करीब 2.30 बजे बीएलओ की मदद करते हुए आरोपी पाटिल, शंकर बीरप्पा नाइक और प्रशांत दीपक मुंडीमनी 20-25 अन्य लोगों के साथ बुरी नीयत से आए और सिर्फ मुस्लिम समुदाय के वोटरों को निशाना बनाने की साजिश रची।
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शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाए?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने वोटर लिस्ट से 198 वोटरों के नाम हटाने की साजिश रची, नकली दस्तावेज बनाए और उन्हें बीएलओ को सौंपे। साथ ही, उन्होंने झूठा दावा किया कि ये दस्तावेज असली हैं और ईआरओ द्वारा जारी किए गए हैं। शिकायत में यह भी कहा कि आरोपियों द्वारा नकली दस्तावेजों के साथ लाए गए 'फॉर्म-7' एप्लीकेशन में उनका और उनके परिवार के सदस्यों का नाम भी शामिल था। बता दें कि 'फॉर्म-7' एक वोटर एप्लीकेशन फॉर्म है, जिसका इस्तेमाल मौजूदा वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताने के लिए किया जाता है। एफआईआर में कहा गया कि उन्होंने बीएलओ पर दबाव डाला और एक अन्य व्यक्ति से फोन पर ईआरओ बनकर बात करवाई और उनके हस्ताक्षर हासिल किए। इससे शिकायतकर्ता और वोटरों के साथ धोखाधड़ी हुई।
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शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि ऐसी स्थिति बनाने की कोशिश की गई थी, जिसमें अगर वोटर लिस्ट से 198 मुस्लिम समुदाय के वोटरों के नाम हटा दिए जाते, तो प्रभावित लोग भड़क सकते थे, जिससे शांति और कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती थी। पुलिस ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 336(3), 336(4), 353, 61(2), 3(5), 192और 190 के तहत FIR दर्ज की गई है और आगे की जांच चल रही है।
कितने लोगों पर हुआ एफआईआर?
बीदर के एक और मामले में, भालकी के 40 वर्षीय व्यवसायी और वोटर मोहम्मद अतीक अहमद ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान फॉर्म-7 आवेदनों के जरिए उन्हें और 3,244 अन्य वोटरों को गलत तरीके से 'शिफ्टेड/अनुपस्थित' (कहीं और चले गए/मौजूद नहीं) दिखाया गया था। एफआईआर के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित वोटरों से प्रमाणित दस्तावेज लिए बिना ही आवेदन जमा किए गए थे और वोटर लिस्ट से नाम हटवाने के इरादे से हस्ताक्षर भी फर्जी तरीके से किए गए थे। उनकी शिकायत के बाद, 1 अक्टूबर को कथित अनियमितताओं के सिलसिले में 32 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कि गया।
मैसूरु में, एक सामाजिक कार्यकर्ता सैयद हसरत उल्ला ने शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-7 आवेदन जमा किए गए थे, जिनमें दावा किया गया था कि वे और उनके परिवार के सदस्य अपने रजिस्टर्ड पते पर नहीं रह रहे हैं, जबकि वे काफी समय से वहीं रह रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म में गलत जानकारी भरी गई थी और चुनाव आयोग को जमा की गई थी, ताकि उनका और उनके परिवार के सदस्यों का नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा सके।
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किन नेताओं पर हुआ एफआईआर?
शिकायतकर्ता ने यह आरोप भी लगाया कि गलत जानकारी वाले ऐसे ही फॉर्म-7 आवेदन 28 अन्य वोटरों के खिलाफ भी जमा किए गए थे। शिकायत के बाद, नरसिम्हाराजा पुलिस स्टेशन में हरीश कुमार सी, राघवेंद्र एम और अनिल थॉमस (बीजेपी माइनॉरिटी प्रेसिडेंट) और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता, उनके परिवार और मुस्लिम समुदाय के अन्य सदस्यों के वोट हटवाने की साजिश रची, जिससे समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची और समाज में अशांति फैली।
इस बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अपने कैबिनेट सहयोगियों और विधायकों के साथ मिलकर गुरुवार को मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अनबुकुमार के कार्यालय के बाहर धरना दिया। उन्होंने वोटर लिस्ट के एसआईआर के दौरान 'चुनावी धोखाधड़ी' को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
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शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाए?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने वोटर लिस्ट से 198 वोटरों के नाम हटाने की साजिश रची, नकली दस्तावेज बनाए और उन्हें बीएलओ को सौंपे। साथ ही, उन्होंने झूठा दावा किया कि ये दस्तावेज असली हैं और ईआरओ द्वारा जारी किए गए हैं। शिकायत में यह भी कहा कि आरोपियों द्वारा नकली दस्तावेजों के साथ लाए गए 'फॉर्म-7' एप्लीकेशन में उनका और उनके परिवार के सदस्यों का नाम भी शामिल था। बता दें कि 'फॉर्म-7' एक वोटर एप्लीकेशन फॉर्म है, जिसका इस्तेमाल मौजूदा वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताने के लिए किया जाता है। एफआईआर में कहा गया कि उन्होंने बीएलओ पर दबाव डाला और एक अन्य व्यक्ति से फोन पर ईआरओ बनकर बात करवाई और उनके हस्ताक्षर हासिल किए। इससे शिकायतकर्ता और वोटरों के साथ धोखाधड़ी हुई।
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शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि ऐसी स्थिति बनाने की कोशिश की गई थी, जिसमें अगर वोटर लिस्ट से 198 मुस्लिम समुदाय के वोटरों के नाम हटा दिए जाते, तो प्रभावित लोग भड़क सकते थे, जिससे शांति और कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती थी। पुलिस ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 336(3), 336(4), 353, 61(2), 3(5), 192और 190 के तहत FIR दर्ज की गई है और आगे की जांच चल रही है।
कितने लोगों पर हुआ एफआईआर?
बीदर के एक और मामले में, भालकी के 40 वर्षीय व्यवसायी और वोटर मोहम्मद अतीक अहमद ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान फॉर्म-7 आवेदनों के जरिए उन्हें और 3,244 अन्य वोटरों को गलत तरीके से 'शिफ्टेड/अनुपस्थित' (कहीं और चले गए/मौजूद नहीं) दिखाया गया था। एफआईआर के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावित वोटरों से प्रमाणित दस्तावेज लिए बिना ही आवेदन जमा किए गए थे और वोटर लिस्ट से नाम हटवाने के इरादे से हस्ताक्षर भी फर्जी तरीके से किए गए थे। उनकी शिकायत के बाद, 1 अक्टूबर को कथित अनियमितताओं के सिलसिले में 32 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कि गया।
मैसूरु में, एक सामाजिक कार्यकर्ता सैयद हसरत उल्ला ने शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-7 आवेदन जमा किए गए थे, जिनमें दावा किया गया था कि वे और उनके परिवार के सदस्य अपने रजिस्टर्ड पते पर नहीं रह रहे हैं, जबकि वे काफी समय से वहीं रह रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म में गलत जानकारी भरी गई थी और चुनाव आयोग को जमा की गई थी, ताकि उनका और उनके परिवार के सदस्यों का नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा सके।
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किन नेताओं पर हुआ एफआईआर?
शिकायतकर्ता ने यह आरोप भी लगाया कि गलत जानकारी वाले ऐसे ही फॉर्म-7 आवेदन 28 अन्य वोटरों के खिलाफ भी जमा किए गए थे। शिकायत के बाद, नरसिम्हाराजा पुलिस स्टेशन में हरीश कुमार सी, राघवेंद्र एम और अनिल थॉमस (बीजेपी माइनॉरिटी प्रेसिडेंट) और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता, उनके परिवार और मुस्लिम समुदाय के अन्य सदस्यों के वोट हटवाने की साजिश रची, जिससे समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची और समाज में अशांति फैली।
इस बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अपने कैबिनेट सहयोगियों और विधायकों के साथ मिलकर गुरुवार को मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अनबुकुमार के कार्यालय के बाहर धरना दिया। उन्होंने वोटर लिस्ट के एसआईआर के दौरान 'चुनावी धोखाधड़ी' को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की।