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दिनदहाड़े हत्या, चश्मदीद 9 गवाह, '...तो फिर देखा क्यों नहीं'

Tue, 30 Oct 2018 10:13 PM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 30 Oct 2018 10:13 PM IST
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Most famous murder case of kanpur
डेमो पिक
कानपुर के व्यस्ततम चौराहे पर दिनदहाड़े हत्या के मामले में जिन चश्मदीदों के बूते पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर आरोपियों को गिरफ्तार किया, वही एक-एक कर मुकरते चले गए। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय की अदालत में चल रहे इस मुकदमे का हश्र क्या होगा, यह वक्त बताएगा। लेकिन, एक सनसनीखेज वारदात में सभी चश्मदीद गवाहों का कोर्ट में मुकर जाना पुलिस विवेचना को कठघरे में जरूर खड़ा कर रहा है।

 
Most famous murder case of kanpur
डेमो पिक
12 मई 2010 को सुबह साढ़े नौ बजे विजय नगर निवासी अनिल वाल्मीकि अपनी शादी का कार्ड बांटने बाइक से निकला था। महात्मा गांधी इंटर कॉलेज के पास ट्रांसफार्मर के सामने कुछ लोगों ने बीच सड़क पर तमंचे से गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। उसके भाई सुनील कुमार ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। मामले में पुलिस ने दलेलपुरवा अनवरगंज निवासी बबीश उर्फ भविष्य, बर्रा-6 निवासी राजा पासवान, महेश सुमन, जितेंद्र वाल्मीकि और बर्रा-7 निवासी अंशू यादव को 29 अगस्त को आर्डनेंस फैक्ट्री के पास से कार से जाते समय गिरफ्तार किया। सभी के खिलाफ हत्या का मुकदमा चला। इनमें से राजा, महेश, जितेंद्र व अंशू के पास से तमंचा भी बरामद दिखाया। चारों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज है।
 
Most famous murder case of kanpur
डेमो पिक
कोर्ट में मुकरे चश्मदीद गवाह
विशेष अभियोजन अधिकारी राजेश शुक्ला ने बताया कि विवेचक हेमंत राय ने मामले की विवेचना की और बलवंत चौधरी ने 20 दिसंबर 2010 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। हेमंत राय ने 27 गवाह बनाए, इनमें से नौ को चश्मदीद के रूप में रखा। हेमंत के अनुसार पुलिस को दिए बयानों में इन गवाहों ने आरोपियों को पहचानकर उनकी शिनाख्त की। किसी ने मौके पर आरोपियों को देखने की बात कही तो किसी ने समाचार पत्र या टीवी पर आरोपियों को देखकर पहचाना, लेकिन कोर्ट में आए सभी नौ चश्मदीद गवाह पक्षद्रोही हो गए। सभी ने कहा कि वे आरोपियों को नहीं पहचानते। न ही उन्होंने हेमंत को कोई बयान दिया। कोर्ट में 19 गवाह परीक्षित किए जा चुके हैं। सभी चश्मदीद गवाहों के बयानों से मुकरने के बाद मुकदमे में नया मोड़ आ गया है।
 
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डेमो पिक
ब्याज पर रुपये देने की रंजिश
पुलिस चार्जशीट के मुताबिक, बबीश ब्याज पर रुपये देने का काम करता था। अनिल ने भी ब्याज पर रकम उठानी शुरू कर दी। अनिल के कारण बबीश के कई ग्राहक कट गए थे। इस पर बबीश अनिल से रंजिश मानने लगा था। बबीश ने उससे धंधा छोड़ने को कहा। नहीं मानने पर अनिल की हत्या कर दी गई।
 
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डेमो पिक
बयानों की सीडी तैयार करनी चाहिए
एसपीओ राजेश शुक्ला का कहना है कि ऐसे गंभीर मामलों में विवेचक को सीआरपीसी की धारा-161 के तहत गवाहों के बयानों की सीडी भी तैयार करनी चाहिए। साथ ही गवाहों के धारा-164 के तहत कोर्ट में भी बयान दर्ज करा देने चाहिए। इससे गवाहों के बयानों से मुकरने की संभावना कम हो जाती है। आरोपियों की संख्या एक से अधिक होने पर मोबाइल लोकेशन का महत्व बढ़ जाता है। विवेचक को मोबाइल की सीडीआर भी कोर्ट में पेश करनी चाहिए। मजबूत साक्ष्य ही दोषियों को अंजाम तक पहुंचा सकते हैं।
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