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हम तो पहिले ते आत्मनिर्भर.. खाना खुदै बनावन.. बर्तन खुदै धोवन- राजू श्रीवास्तव
Mon, 18 May 2020 01:47 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 18 May 2020 01:47 PM IST
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राजू श्रीवास्तव
दोस्तों आत्मनिर्भर भारत.. यानी सब अपना अपना देखौ.. पिछले दिनों मोदी जी आत्मनिर्भर बने का नारा दिहिन.. उनका कहे का मतलब कि आपन अपना खाना खुदै बनाव.. कपड़े-बर्तन खुदै धोवौ.. मतलब उनके कहे का फुल मतलब ई आय कि आपन मेहरारू पे निर्भर ना रहौ.. वइसे भी पिछले दुई महिने से हमै कामवाली बाई हन.. हमै धोबी वाले भैया हन.. समोसा- कचौड़ी अउर चायनीज बनाय रहे हन तो बावर्ची-शैफ भी हमहीं हन.. बच्चन की हेयर कटिंग भी हमै करी रहे हन.. उनका पढ़ाय भी हमही रहे हन..
राजू श्रीवास्तव
इलेक्ट्रीशियन का काम भी कर रहे हन.. मेहरारू केर मेकअप भी हमहीं किये हन.. कपड़े की सिलाई भी घरे पे हुई रहा.. फेस मास्क भी खुदै बनाय लिहेन..अब इससे ज़्यादा आत्मनिर्भर का बनी.. अच्छा आज हमका बैंक वालन का फोन आवा.. लोन की EMI खातिर.. हमहूं कहि दिहेन.. का बेर-बेर पइसे मांगा करत हौ.. आत्मनिर्भर बनौ..!! इन दुई महीनन मा हम एतना लूडो खेल लिये हन कि अगर पांडव हमका खेलने देत तो दुर्योधन का सारा राजपाट हम अकेले जीत सकत रहन..
राजू श्रीवास्तव
अउर भईया जौने तत्परता अउर गंभीरता के साथ लोगे लूडो खेलि रहें हैं.. हमका तो लगत है कि अगला वर्ल्ड कप लूडो का ही होई.. वइसे हमरी माननीय मोदी जी हाथ जोड़ के बिनती आय कि ई लॉकडाउन भले चाहे जब हटाव.. मगर भगवान के लिए ई कोरोना वाली रिंगटोन जरूर हटवाय देव.. कसम से भूल जात हन कि कौने काम खातिर फोन किये रहन.. लेकिन बुढ़ापे खातिर एक डायलॉग तो मिल गवा कि अरे बीमारी तो, हमरे समय फइली रही ..
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राजू श्रीवास्तव
अब ई कोरोना वायरस खतरनाक होत जाय रहा.. ई वायरस हर तरफ से बारात लई के आय चुका है.. मगर आप हुसियार रहेव.. दूल्हे की बुआ बनि के आगे-आगे ना नाचे लगेव.. बल्कि फूफा की तरह मुंह चढ़ाए घर मा एक तरफ बइठे रहेव.. वरना अगली बरात तुम्हरी निकली.. अच्छा कनपुरिये बड़े खखेड़ी होत हैं.. अपने अन्नू अवस्थी आपन कार के सीसे पे एक तरफ कर्फ्यू पास लगाय हैं अउर दूसरी तरफ लिखवाय हैं भूतपूर्व कोरोना पॉजिटिव .. हम कहा ई का.. तो बताईन कि एका पढ़े के बाद पुलिस मुंह नाही सूंघत.. ठेके खुले हैं ना..।
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Raju Srivastav
दोस्तों ई कोरोना भी ‘मेहेरिया’ जईस आय.. पहिले आप एका आपन बस मा करे की कोसिस करत हौ.. फिर बाद मा समझ मा आत है कि ई तो असंभव आय.. फिर ओके बाद आप उसके साथ जीना सीख जात हौ..। अच्छा अन्दर की बात बताई.. ई लॉकडाउन मा सिरिफ वहै आदमी आपन घर का सब काम करि रहा.. जेकी महेरिया उससे जादा सुन्दर आय या फिर उससे जादा खूंखार आय.. बाकी सब तो सुनी सुनाई बातें हैं.. खैर ई सब तो रही हंसी मजाक की बात.. अब कुछ सीरियस बात हुई जाय.. आपका पता है.. जो कोरोना का हलके मा लेत भये लॉकडाउन मा बाहर जात है.. उनका का हाल होत है?..