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बात है 1993 की ...जब अटल बोले ‘आप लोगों ने एक टिकट में देख लिया दो शो’, फिर बांधा ऐसा समा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 17 Aug 2018 07:57 AM IST
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बिंदकी के लोगों के साथ अटल जी की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
बात है 1993 की ...। उत्तर प्रदेश का जिला फतेहपुर...पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी विधानसभा चुनावों के प्रचार के लिए जिस दिन चुनावी जनसभा को आए थे, उसी दिन कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी. नरसिम्हा राव भी शहर में थे। जनसभा में अटल जी ने भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में ऐसा समा बांधा कि उनको सुनने पहुंचे लोग तारीफ करते नहीं थके।
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भारत रत्न व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़े संस्मरण पूर्व मंत्री राधेश्याम गुप्ता ने बृहस्पतिवार को रूंधे गले से बताया। उन्हाेंने बताया कि उस चुनाव में जनसभा में वाजपेयी जी ने चुनावी माहौल को ऐसी हवा दी थी कि चुनाव का रुख पलट गया और भाजपा प्रत्याशी के रूप में खुद ये चुनाव भारी मतों से जीते। गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में एएस इंटर कालेज में जनसभा की थी।
atal bihari
- फोटो : अमर उजाला
जनता पहले नरसिम्हा राव का भाषण सुनने को एकत्र हुई इसके बाद आईटीआई मैदान में चुनावी जनसभा में पहुंचे लखनऊ से सांसद अटल बिहारी वाजपेयी ने जनता से प्रत्याशी के पक्ष में वोट मांगा। चुनावी जनसभा के बाद बाबू जी को चुनाव में सफलता मिली थी। जनसभा में अपने चिरपरिचित अंदाज में वह बोले कि ‘आज तो आप लोगों ने एक टिकट में दो शो देख लिए’। फिर क्या था जनसभा में लोगों को मानों संजीवनी मिल गई।
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Atal Ji
धाता चौराहे पर लगी स्वतंत्रता सेनानी दीप नारायण सिंह की मूर्ति के अनावरण के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का इंतजार बरसों से किया जा रहा था। कस्बे के लोगों का कहना है कि दीप नारायण सिंह अटल जी के राजनैतिक गुरु थे। 1997 से बनकर तैयार मूर्ति कपड़ों से ढकी अभी भी खड़ी है। दोनों लोग स्वतंत्रता संग्राम में एक साथ जेल में भी रहे थे।
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atal bihari vajpayee
बहुआ विकास खंड के ललौली थाना के लदिगवां निवासी दीप नरायण की प्रतिमा बसपा शासन काल के मंत्री राम लखन वर्मा ने 1997 में लगवाया था, तब से क्षेत्र के लोगों को अटल बिहारी वाजपेयी का इंतजार था। धाता के बीच चौराहा पर एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की मूर्ति का मुंह बांध कर खड़ा होना सोचनीय है। कोई जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक इनके अनावरण की हिम्मत नहीं कर सके। क्षेत्र के अनंत सिंह, असलम, अनुपम सिंह, कलीम, छेदी लाल सिंह ने कहा स्वतंत्रता दिवस के दिन लंबे चौड़े भाषण देने वालों की आंख कब खुलेगी। कब तक एक बीर सपूत कपड़े में लिपटे रहेंगे।