सत्ता के गलियारों से लेकर गांव गली मुहल्ले तक हर शख्स अटल जी की वाकपटुता का कायल रहा है। दिल्ली के एम्स में अटल बिहारी वाजपेयी ने 93 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। अटल जी और उनके पिता दोनों ने कानून की पढ़ाई में एक साथ प्रवेश लिया। हुआ यह कि जब अटल जी कानून की पढ़ाई करने के लिए डीएवी कालेज कानपुर आना चाहते थे तो उनके पिता ने कहा कि मैं भी तुम्हारे साथ कानून की पढ़ाई शुरू करूंगा।
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
वह तब राजकीय सेवा से निवृत्त हो चुके थे। इसलिए पिता पुत्र दोनों साथ साथ कानपुर आए। उन दिनों कालेज के प्राचार्य कालका प्रसाद भटनागर थे। जब दोनों लोग प्रवेश के लिए उनके पास पहुंचे तो उनके आश्चर्य का कोई ठिकाना न रहा।
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- फोटो : self
दोनों का प्रवेश एक ही सेक्शन में हो गया। जिस दिन अटल जी किसी कक्षा में न जाएँ तो प्राध्यापक जी उनके पिता जी से पूछते थे कि आपके पुत्र कहां है। जिस दिन पिता क्लास में न जाएं तो अटल जी से प्रश्न किया जाता था कि आपके पिता जी कहां हैं।
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अटल जी को दूध लेने जाना रहता था इसलिए उन्हे सुबह कक्षा में पहुंचे में देरी हो जाया करती थी। इस कारण उन्होने अपना सेक्शन बदलवा लिया था। छात्रावास में पिता पुत्र एक साथ ही एक ही कमरे में रहा करते थे।
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संघ के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में अटल जी पूरी निष्ठा से कार्य में लग गए। साहित्य, राष्ट्र, समाज को जीवन समर्पित करने वाले अटल ने अविवाहित रह कर सेवा धर्म को स्वीकर किया। पं श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पं दीन दयाल उपाध्याय के संपर्क में रह कर अटल जी ने सकारात्मक राजनीति की शिक्षा ग्रहण की।