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मौत का सफर: मासूम समेत पांच लोगों की मौत से कोहराम, बेटी के संतान न होने पर मानी थी मन्नत
Fri, 16 Jul 2021 09:41 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 16 Jul 2021 09:41 PM IST
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भीषण सड़क हादसे में पांच की मौत
- फोटो : amar ujala
लखनऊ के इटौंजा थाना क्षेत्र में सीतापुर रोड पर हुए हादसे में तीन साल के बालक व उसके दो मामा समेत पांच की मौत से गांव में कोहराम मच गया। शव देख सभी की आंखें नम हो गईं। वैन सवार लोग तीन साल पहले मन्नत से पैदा हुए बालक को लेकर बाराबंकी के लोधेश्वर महादेव मंदिर दर्शन करने जा रहे थे। हादसे में मृत बच्चे की मां समेत तीन लोगों की हालत गंभीर है। नंदौली गांव निवासी पेशे से किसान इंद्र बहादुर सिंह (60) ने बेटी बबिता का विवाह कानपुर देहात के रसूलाबाद थाना क्षेत्र के लक्ष्मणपुर पिलक गांव निवासी भूपेंद्र सिंह से किया था। शादी के कई साल बाद तक बबिता के कोई बच्चा नहीं हुआ। इंद्र बहादुर ने बाराबंकी स्थित लोधेश्वर मंदिर में बेटी को संतान होने की मन्नत मांगी थी। मन्नत के एक साल बाद 2018 में बबिता ने बेटे को जन्म दिया। इसका नाम अर्नव उर्फ कार्तिक रखा गया।
मृतक
- फोटो : amar ujala
पूर्व में मानी गई मन्नत पूरी करने के लिए इंद्र बहादुर शुक्रवार सुबह तीन साल के नाती अर्नव, बेटी बबिता (26), बेटे अनुज (24), आर्यन सिंह (18), अजीत सिंह (22) व भतीजे अशोक सिंह के बेटे दुर्गेश (27) व दूसरे भतीजे प्रमोद सिंह के बेटे भवानी सिंह (18) के साथ वैन से मंदिर जा रहे थे। शुक्रवार सुबह नौ बजे सीतापुर रोड पर टिकारी गांव के पास आम लादकर जा रहा ट्रक ओवरटेक करते समय अनियंत्रित होकर वैन के ऊपर पलट गया।
मृतक
- फोटो : amar ujala
हादसे में अर्नव, आर्यन, अजीत, दुर्गेश सिंह व भवानी सिंह की मौके पर मौत हो गई। बबिता, इंद्र बहादुर व वैन चला रहा अनुज गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। हादसे की सूचना घर वालों को मिली तो कोहराम मच गया। एक परिवार के पांच लोगों की मौत से पूरे गांव में मातम मच गया। दो जवान बेटों, भतीजों के दो बेटे (पौत्र) और नाती अर्नव की मौत से इंद्र बहादुर की पत्नी रजनी सिंह बदहवास हो गईं।
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रोते बिलखते परिजन
- फोटो : amar ujala
मृतक दुर्गेश दो भाइयों में बड़ा था। उसकी मौत से मां आलोचना, पत्नी कीर्ति व भाई शिवम सिंह बेहाल हो गए। मृतक भवानी सिंह चार भाई-बहनों में सबसे छोटा और अविवाहित था। उसकी मौत से मां मंजू सिंह, बहन ज्योति, बीना और बड़े भाई गौरव बदहवास हैं। लखनऊ में पोस्टमार्टम के बाद शव देर शाम घर लाए गए तो गांव में कोहराम मच गया।
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रोते बिलखते परिजन
- फोटो : amar ujala
चार मृतकों की आंखें दान दीं
हादसे में मृत चारों युवकों की आंखों को परिजनों ने दान कर दिया। परिजनों का कहना है कि बच्चों के जाने से घर के लोगों का जीवन तो अंधेरे में हो गया पर उनकी आंखें किसी और को रोशनी देंगी।
हादसे में मृत चारों युवकों की आंखों को परिजनों ने दान कर दिया। परिजनों का कहना है कि बच्चों के जाने से घर के लोगों का जीवन तो अंधेरे में हो गया पर उनकी आंखें किसी और को रोशनी देंगी।