झांसी के टोड़ी फतेहपुर के किशोरपुरा गांव में कुएं से मिली युवती की सिर कटी लाश के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। महिला की हत्या प्रेम प्रसंग के चलते उसके प्रेमी एवं महेबा (टोड़ी फतेहपुर) के पूर्व ग्राम प्रधान संजय पटेल ने अपने भतीजे संदीप पटेल एवं गरौठा निवासी अपने दोस्त प्रदीप उर्फ दीपक अहिरवार के साथ मिलकर की थी।
महिला पूर्व ग्राम प्रधान से शादी करने की जिद पर अड़ी थी। लेकिन आरोपी राजी नहीं था। इस वजह से उसने कार में प्रेमिका की गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद शव के टुकड़े करके कुएं में फेंक दिए। शिनाख्त मिटाने के लिए सिर एवं पैर लखेरी नदी में फेंक दिए। खाद की बोरी के सहारे सात दिन की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस हत्या के आरोपियों तक पहुंच पाई। पुलिस ने पूर्व ग्राम प्रधान संजय एवं उसके भतीजे संदीप को गिरफ्तार कर लिया, जबकि प्रदीप फरार है।
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Jhansi Murder
- फोटो : अमर उजाला
एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति ने बताया कि 13 अगस्त को विनोद पटेल के खेत से दो बोरियों में युवती के टुकड़ों में बंटा शव बरामद हुआ था। सिर की तलाश के लिए कुएं को खाली कराया गया लेकिन शिनाख्त नहीं हुई। इसके लिए 10 टीमें लगाई गई थीं।
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सिर कटी लाश की गुत्थी सुलझी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
छानबीन के दौरान पुलिस टीम के महेबा गांव पहुंचने पर गांव के लोगों ने उसके रचना होने की आशंका जाहिर की। उन लोगों ने टीकमगढ़ में रहने वाले रचना के भाई दीपक को इस बारे में बताया। दीपक के अपनी बहन रचना को तलाशने पर उसका पता नहीं चला। फोन भी स्विच ऑफ था। दीपक मंगलवार शाम टोड़ी फतेहपुर पहुंचा।
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रचना यादव की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस ने दीपक से रचना का फोन नंबर लेकर उसे सर्विलांस पर लगाया। इसमें पूर्व ग्राम प्रधान संजय से उसकी कई बार फोन पर बात मिली। तलाश करने पर पूर्व ग्राम प्रधान घर से लापता मिला। देर-रात दबिश देकर पुलिस ने उसे पकड़ लिया। पूछताछ करने पर उसने शव के रचना का होने की बात कुबूल कर ली। उसने बताया कि 9 अगस्त को उसने अपने भतीजे संदीप एवं दोस्त के साथ मिलकर रचना की हत्या की थी। रात में शव के टुकड़े करके कुएं में फेंक दिया।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रचना को घुमाने के बहाने ले गए थे आरोपी
पूछताछ के दौरान संजय की बातें सुनकर पुलिस भी हैरान रह गई। संजय ने बताया कि 9 अगस्त को कार से वह लोग रचना को घुमाने के बहाने ले गए थे। लहचूरा पर मौका मिलने पर उसका गला घोंट दिया। वह लोग उसे लहचूरा बांध में फेंकने की जुगत में थे लेकिन वहां मौका नहीं मिला। इसके बाद वह लोग किशोरपुरा गांव पहुंचे। फरसा दीपक अहिरवार अपने साथ लेकर आया।