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डबल मर्डर से पहले ब्लैकबोर्ड पर लिखा 'मंथन फिनिश', झांसी हत्याकांड का यह सच जान चौंक जाएंगे आप
Sat, 20 Feb 2021 01:16 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 20 Feb 2021 01:16 PM IST
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jhansi murder
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में शुक्रवार की दोपहर बुंदेलखंड महाविद्यालय के एक छात्र ने दुस्साहसिक तरीके से क्लास रूम में पढ़ रहे सहपाठी को गोली मार दी। इसके बाद उसने सीपरी थाना क्षेत्र स्थित गोंदू कंपाउंड चाणक्यपुरी कॉलोनी पहुंचकर कॉलेज की ही एक छात्रा की गोली मारकर हत्या कर दी।
घटनास्थल पर पुलिस और लोगों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
छात्रा कृतिका और छात्र हुकुमेंद्र की हत्या के बाद आरोपी मंथन खुद को भी गोली मारकर खत्म करना चाहता था। क्लासरूम में वो इसका पूरा प्लान तैयार कर दाखिल हुआ था। यही वजह थी कि घटना से पहले उसने ब्लैक बोर्ड पर ‘मंथन फिनिश’ भी लिखा था। लेकिन, वो अपने मंसूबों में पूरी तरह से कामयाब नहीं हो पाया। खुद को मारने के लिए उसने पिस्टल लोड करने की कोशिश की, लेकिन भीड़ ने उसे पकड़ लिया था।
छात्रा के घर बाहर लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
छात्र मंथन सेंगर ने घटना को अंजाम देने का सुनियोजित प्लान तैयार किया था। क्लासरूम में वो कम ही आया करता था। हाल ही में वो क्लासरूम में बुधवार को नजर आया था और उसके बाद शुक्रवार को पहुंचा। कक्षा में महज छह ही विद्यार्थी थे। आगे की पंक्ति में बैठने की पर्याप्त जगह थी। बावजूद, हुकुमेंद्र के पीछे दूसरी पंक्ति में बैठ गया। पीरियड पूरा होने के बाद शिक्षिका क्लासरूम से निकल गईं। इसके बाद उसने चॉक से क्लास के ब्लैक बोर्ड पर ‘मंथन फिनिश’ लिखा और फिर से पीछे आकर बैठ गया।
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आरोपी मंथन
- फोटो : अमर उजाला
लेकिन, वहां मौजूद किसी ने भी ब्लैक बोर्ड पर मंथन द्वारा लिखे गए शब्दों पर ध्यान नहीं दिया। हुकुमेंद्र के पीछे बैठते ही उसने जैकेट के भीतर छुपाई पिस्टल निकाली और फायर झोंक दिया। हुकुमेंद्र कक्षा की टेबल पर धराशायी हो गया। अचानक हुई घटना से वहां मौजूद सभी लोग अवाक रह गए। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, मंथन पिस्टल हाथ में लेकर कॉलेज कैंपस से बाहर निकल गया। छात्रा कृतिका के घर पहुंचने के लिए उसने शॉर्टकट अपनाया।
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मृतक हुकुमेंद्र
- फोटो : अमर उजाला
विकास भवन के पीछे की गली से निकलकर जार पहाड़ होते हुए वो चाणक्यपुरम पहुंच गया। यहां उसने घर के बाहर दादी के साथ बैठी कृतिका के गले में सटाकर गोली मार दी और गली में आगे की ओर भाग गया। आगे का रास्ता उसे समझ नहीं आया तो फिर वो वापस लौटा। इसी दरम्यान कृतिका के पिता सुजीत ने उसे पकड़ लिया। इस दरम्यान मंथन ने खुद को गोली मारने की नीयत से एक बार फिर पिस्टल लोड करने की कोशिश की, उसके पास दो कारतूस थे। लेकिन, इस बार पड़ोसी रिटायर्ड ऑडिटर शिवनारायण मिश्रा ने उसका हाथ पकड़ लिया, जिससे वो खुद को मारने के अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाया।