यूपी के फिरोजाबाद स्थित थाना शिकोहाबाद के गढ़ैया मोहल्ला लाला की सराय गली-2 में प्रेमी के साथ पैर बांधकर डीजल उड़ेलकर आत्मदाह करने वाली 18 वर्षीय खुशी का यह पहला प्यार नहीं था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि खुशी इससे पहले अपने एक और प्रेमी फैसल अब्बासी को जेल भिजवा चुकी थी, जिसके बाद फेसबुक के जरिए उसकी जिंदगी में अरुण कठेरिया की एंट्री हुई थी। पुलिस के पकड़े जाने के डर से दोनों ने आत्मघाती कदम उठाया था।
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पुलिस के पकड़े जाने के डर से प्रेमी जोड़े ने पैर कपड़े से बांधकर खुद को लगाई आग
- फोटो : अमर उजाला
फैसल के साथ फरार हो गई थी खुशी
पुलिस जांच के अनुसार, खुशी जब नाबालिग थी, तब उसका संबंध आवास विकास कॉलोनी निवासी फैसल अब्बासी से था। 16 जनवरी 2024 की रात खुशी अपनी मां ममता के साथ शिकोहाबाद बाजार गई थी, जहां से वह फैसल के साथ चली गई थी, लेकिन उसी रात मां ने उसे पकड़ लिया और फैसल पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद 29 सितंबर को खुशी दोबारा लापता हुई। तब मां ने अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी कराई थी। पुलिस ने खुशी को फैसल के पास से ही बरामद किया था। नाबालिग होने के कारण फैसल पर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ाई गईं। इस मामले में कोर्ट से सजा होने के बाद फैसल वर्तमान में जेल में बंद है। फैसल के जेल जाने के बाद खुशी सोशल मीडिया पर सक्रिय हुई। इसी दौरान फेसबुक के जरिए उसकी दोस्ती मोहब्बत अहीर निवासी अरुण कठेरिया से हुई, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।
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झुलसे हुए प्रेमी प्रेमिका
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क्यों बांधे पैर और क्यों लगाई आग?
पुलिस सूत्रों का कहना है कि जब शिकोहाबाद पुलिस ने घर की घेराबंदी की, तो खुशी और अरुण बुरी तरह घबरा गए। खुशी को अंदेशा था कि पहले प्रेमी फैसल की तरह अरुण भी जेल चला जाएगा और वह हमेशा के लिए अलग हो जाएंगे। इसी खौफ में दोनों ने एक-दूसरे के पैर रस्सी से बांधे ताकि कोई भाग न सके और ज्वलनशील उड़ेलकर खुद को आग के हवाले कर दिया। रसोई से मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस इसे एक शर्तिया सुसाइड पैक्ट मानकर जांच को आगे बढ़ा रही है।
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घर के बाहर खड़ी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
छतों पर दौड़कर पुलिस ने तलाशा रास्ता
खुशी के बंद मकान पर दबिश देने पहुंची, तो खुद को घिरता देख अंदर प्रेमी जोड़े ने आग लगा ली। खिड़की से लपटें उठती देख और अंदर से आ रही चीख-पुकार सुनकर पुलिसकर्मी तुरंत हरकत में आए। मुख्य गेट लोहे का होने के कारण पुलिसकर्मी सबसे पहले मोहल्ले के लोगों के मकानों की छतों पर चढ़ गए, ताकि घर के अंदर जाने का कोई रास्ता मिल सके। मगर चारों तरफ से मकान पैक होने के कारण अंदर जाने का कोई रास्ता नहीं मिला।
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रसोई में रखा फ्रिज
- फोटो : अमर उजाला
नाकाम होने पर मोहल्ले से सबल मंगवाकर तोड़ा दरवाजा
इसके बाद पुलिस नीचे लौटी और मोहल्ले के लोगों से लोहे की सबल और औजार मंगाए। मुख्य लोहे के गेट के बराबर में बने कमरे का दरवाजा प्लाईवुड का था। पुलिस ने सबल के प्रहार से उस गेट को तोड़ा, जिससे दरवाजे के बीच में एक बड़ा सुराख हो गया। उसी के रास्ते पुलिसकर्मी घर के अंदर दाखिल हुए और सीधे रसोईघर में पहुंचे। हालांकि तब तक अरुण और खुशी बुरी तरह से जल गए थे।