उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में दो दोस्तों के मन में नौकरी के साथ-साथ एक कमाल का बिजनेस आइडिया आया। इसके बाद उन्होंने पार्ट टाइम में अपना बिजनेस शुरू कर दिया। हालांकि शुरू में उन्हें अपनों व रिश्तेदारों से काफी ताने मिले। लेकिन उन्होंने तानों को दरकिनार कर अपने बिजनेस पर फोकस रखा। आज इसका नतीजा यह है कि लोग नाम से ही उनकी शॉप पर चाय की चुस्की लेने आते हैं।
कमाल का बिजनेस आइडिया: नौकरी के साथ-साथ बना रहे नई पहचान, तानों को दरकिनार कर जीत रहे लोगों का दिल, तस्वीरें
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दोनों ने नौकरी करने के साथ ही अपना कुछ नया काम करने की सोची और किरतपुर रोड पर एक कपड़े के शोरूम के पास शाम को पार्टटाइम चाय की टपरी शुरू कर दी। कपड़े के शोरूम पर आने वाले और यहां से गुजरने वाले लोग इनके हाथ की चाय पीने जा रहे हैं। आशु और जुनैद की मानें तो शाम सात बजे से रात 12 बजे तक 200 से 250 लोग चाय पीने पहुंचते हैं। जुनैद चाय बनाता है और आशु उसे देने व पैसों का हिसाब-किताब रखता है।
यूट्यूब से आया तंदूरी चाय का विचार
आशु और जुनैद को चाय बनानी नहीं आती थी। इन्होंने यूट्यूब पर तंदूरी चाय बिकती देखी और उसी से चाय बनाना सीखा। दो से तीन घंटे में ही पूरे तंदूर के कुल्हड़ खत्म हो जाते हैं।
ऐसे आया नाम का विचार
चरसी नाम रखे जाने के बारे में इनका कहना है कि चरसी का मतलब चरस का लती होता है। इन्होंने यह नाम रखा, जिससे लोग इनके पास चाय पीने के लिए खिंचे चले आए।
नाम चरसी, खुशबू गुलाब की
दोनों दादोस्त चाय में लोंग, इलायची, काली मिर्च, दालचीनी और खड़े साबुत मसालों के साथ गुलाब की सूखी पंखुड़ी का भी इस्तेमाल करते हैं। इन्हें ग्राहकों के सामने ही डालते हैं, इससे भरोसा बन रहा है।
तानों से नहीं हुए विचलित : आशु
दिनभर मैं नौकरी करता हूं। हमने चाय का काम शुरू किया तो लोगों ने ताने मारे, हम पर कोई फर्क नहीं पड़ा। अपना काम है और अच्छी आमदनी भी हो रही है। - आशु चौधरी
अपनों ने ही किया विरोध: जुनैद
मेरे कुछ खास लोगों को पता चला कि मैं अपने दोस्त के साथ चाय बनाकर बेच रहा हूं तो उन्होंने इसका विरोध किया। हमने उन्हें मना लिया। अब अच्छा परिणाम आ रहा हैं। - जुनैद