बिजनौर में अमन सिंह की हत्या का बदला लेने के लिए उसके तीनों पुत्रों ने पहले से ही ताना बाना बुन लिया था। पिछले दिनों ग्राम प्रधानी के चुनाव के दौरान पूरे कुनबे ने एक साथ इकट्ठा होकर अमन सिंह की पत्नी को चुनाव लड़ाया था। अमन सिंह की हत्या के बाद छह साल से उन्होंने किसी को यह अहसास नहीं होने दिया कि इनके मन में बदले की भावना है।
खौफनाक वारदात: छह साल से भड़क रही थी बदले की आग, चाचा-भतीजे को उतारा मौत के घाट, तस्वीरें
गांव में शांत स्वभाव से अमन के बेटे रहते थे। दोनों पक्षों में कभी कोई टकराव की नौबत नहीं आई। मृतक धीर सिंह व उसके बेटे अंकुर को भी यह नहीं मालूम था कि उनकी हत्या हो सकती है। 15 अगस्त 2015 को युवती से छेड़खानी व अन्य विवाद को लेकर धीर सिंह, उसके भाई जगवीर व अंकुर ने अमन सिंह पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी। इसके बाद ये तीनों जेल चले गए। ढाई साल बाद जेल से जमानत पर आने के बाद धीर सिंह और अंकुर गांव में रहने लगे। गांव वालों के मुताबिक, अंकुर गांव में कम रहता था। गांव में वह आता जाता जरूर था पर ज्यादातर अपनी रिश्तेदारी में ही रहता था। धीर सिंह गांव में ही रहते थे। गांव से ही फरीदपुर दरगो उर्फ नंगली गांव में अपने स्कूल बाइक से जाते थे। अमन सिंह का बड़ा बेटा नितिन सीमा सुरक्षा बल में तैनात है। छोटा भाई अनुज व कृष्णा गांव में ही रहकर खेतीबाड़ी करते हैं। तीनों भाइयों ने पिछले छह साल से किसी को यह अहसास नहीं होने दिया कि इनके मन में पिता की हत्या का बदला लेने का इरादा है। धीर सिंह व उसके परिवार से कभी कोई टकराव की नौबत नहीं आई।
पिछले दिनों ग्राम प्रधानी के चुनाव में अमन सिंह की पत्नी केलो देवी चुनाव लड़ीं। नितिन भी छुट्टी लेकर गांव आया। चुनाव के दौरान भी दोनों पक्षों में आपस में कोई विवाद नहीं हुआ। धीर सिंह गांव में बेखौफ होकर घूमते थे। अमन सिंह के घर के सामने से निकलकर अपने ड्यूटी पर स्कूल जाते थे। रोजाना जंगल भी आते जाते थे। गेहूं की कटाई होने पर पूरा परिवार गेहूं जंगल से लाने के बाद जंगल से भूसा लाने में जुटा था। रविवार को भूसा लाने के दौरान ही धीर सिंह व उसके भतीजे को ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर मार डाला गया।
ट्रैक्टर पर गुमसुम बैठा रहा महाराज सिंह
महाराज सिंह, बेटे धीर सिंह व पोते अंकुर की हत्या के बाद आधे घंटे तक ट्रैक्टर के बोनट पर गुमसुम बैठा रहा। आंखों के सामने दोनों की हत्या कर दी गई थी। पुलिस अधिकारियों के पहुंचने के बाद वह ट्रैक्टर से नीचे उतरा। महाराज सिंह ने दर्ज रिपोर्ट में कहा कि उनकी रंजिश गांव के अनुज से चल रही है, अनुज का भाई नितिन कुछ समय से गांव में था। ये लोग बदला लेने की बात कहकर गांव में घूम रहे थे। रविवार की सुबह साढ़े आठ बजे उसका पुत्र धीर सिंह,पोता अंकुर व पुत्र वधू रीता व बबीता जंगल से घर आ रहे थे। गांव सुंदरपुर निवासी संजीव के खेत के सामने सफेद रंग की कार आकर रुकी। कार कंभौर निवासी देवेंद्र चला रहा था। कार में कृष्णा, गांव रामवणपुर के ललित, अमित व दो अज्ञात ने अंकुर व धीर सिंह पर ताबड़तोड़ गोली चला दी। हत्या कराने में अनुज और नितिन भी शामिल हैं।
रायफल और बंदूक से दिया वारदात को अंजाम
कार में सवार हत्यारोपियों ने धीर सिंह व अंकुर की तो हत्या कर दी पर महाराज सिंह को कुछ नहीं कहा। महाराज सिंह ट्रैक्टर पर बैठे रहे। हत्या को अंजाम देने के बाद कार से सभी फरार हो गए। आसपास खेतों में काम करने वाले किसानों ने भी हत्यारोपियों के हाथों में हथियार देखे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, हत्यारोपियों के पास रायफल और बंदूक थी। इनसे ही उन्होंने दोनों पर गोलियां बरसाईं। अंकुर को चार व धीर सिंह को तीन गोली लगी हैं।