राष्ट्रीय जांच एजेंसी के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या के मामले में दोनों आरोपियों मुनीर और रैय्यान को कोर्ट ने फांसी की सजा सुना दी। एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या करने के तुरंत बाद मुनीर फरार हो गया था जबकि साथी रैय्यान को सहसपुर में ही छोड़ गया। मुनीर हत्याकांड को अंजाम देने के लिए चार पिस्टल लेकर आया था, जिसमें दो रैय्यान को देकर बाइक पर बैठाया। रैय्यान को पहनने के लिए अपनी शर्ट भी मुनीर ने ही दी थी। मुनीर तो भाग गया लेकिन जब रैय्यान को पकड़े जाने का डर लगा तो वह सीसीटीवी फुटेज डिलीट कराने के लिए मोबाइल रिचार्ज की दुकान पर पहुंचा। बस यहीं से पुलिस के हाथ क्लू लगा और रैय्यान को धर दबोचा गया।
सजा-ए-मौत : मुनीर ने इसलिए की एनआईए अफसर की हत्या, रैय्यान को दो पिस्टल देकर पहनाई थी अपनी शर्ट
दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद रैय्यान को छोड़ खुद भाग गया था मुनीर
- रैय्यान के पकड़ में आने के बाद खुलती गई हत्याकांड की परत
- रैय्यान को मुहैया कराई थी दो पिस्टल और अपनी शर्ट
- सीसीटीवी फुटेज डिलीट कराने से रैय्यान पर गहराया था पुलिस का शक
मूलरुप से सहसपुर के रहने वाले एनआईए के डिप्टी एसपी तंजील अहमद अपनी पत्नी फरजाना खातून और बच्चों के संग वैगनआर गाड़ी से स्योहारा आए थे। 2 अप्रैल 2016 की रात को बंधन मैरिज हॉल में भांजी की शादी की रस्मों में उन्होंने भाग लिया। रात में लगभग साढ़े बारह बजे तंजील अपनी पत्नी और दोनों बच्चों के साथ अपने घर सहसपुर के लिए चल दिए। गाड़ी को तंजील अहमद चला रहे थे, पत्नी बराबर वाली सीट पर और बच्चे पिछली सीट पर बैठे थे।
उनकी गाड़ी के पीछे उनके भाई रागिब मसूद अपने बच्चों के साथ दूसरी गाड़ी से पीछे पीछे आ रहे थे। जब तंजील अहमद सहसपुर में ताल कटोरा तालाब के पास निर्माणाधीन पुलिया पर पहुंचे तभी बाइक पर आए दो बदमाशों ने तंजील अहमद और उनकी पत्नी पर गोलियां चला दीं। गोली लगने से तंजील अहमद व उनकी पत्नी फरजाना गंभीर रुप से घायल हो गईं। घायलों को कॉसमॉस अस्प्ताल मुरादाबाद ले जाया गया। जहां तंजील अहमद को मृत घोषित कर दिया गया।
फरजाना को फोर्टिस अस्पताल नोएडा के लिए रेफर किया गया। फरजाना को फोर्टिस अस्पताल से एम्स दिल्ली ले जाया गया। जहां फरजाना की 13 अप्रैल को मौत हो गई। मामले में पुलिस ने मुनीर, रैय्यान के साथ तंजीन, जैनी और रिजवान के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। तंजीन, जैनी और रिजवान पर इस दोहरे हत्याकांड के षडयंत्र में शामिल होने और मुनीर तथा रैय्यान की मदद करने का आरोप था। हालांकि कोर्ट तंजीन, जैनी और रिजवान को बरी कर चुकी है।
ऐसे शुरू हुई थी तंजील अहमद की हत्या की कहानी
2013 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एएमयू में छात्रसंघ के चुनाव हुए। इस चुनाव में मुनीर ने एक करीबी छात्र का साथ दिया। जहां छात्र गुटों के झगड़े में उसका नाम आने लगा। साल 2013 में मुनीर के खिलाफ अलीगढ़ में जमीन कब्जे के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। साल 2014 को अलीगढ़ अमीरनिशां बाजार में पीतल कारोबारी फहद की मुनीर और आशुतोष ने हत्या कर दी थी। वहीं 16 सितंबर 2015 को एएमयू में छात्र आलमगीर की दिनदहाड़े हत्या हुई थी। हत्या की रिपोर्ट मुनीर, रैय्यान व सादाब निवासी आजमगढ़ व आशुतोष मिश्रा निवासी फैजाबाद के खिलाफ दर्ज कराई थी। इस केस में मुनीर नहीं पकड़ा जा सका था।
हत्या और लूट के बाद जब पुलिस पीछे लगी तो मुनीर अलीगढ़ छोड़कर बटाला हाऊस दिल्ली में किराए पर रहने लगा। मुनीर बटाला हाऊस से साढ़े तीन किलोमीटर की दूरी पर शाहीन बाग में सपरिवार रहने वाले तंजील अहमद के संपर्क में आया। सहसपुर के मूल निवासी तंजील अहमद एनआईए में डीएसपी थे। एक ही कस्बे का होने का कारण दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती चली गईं। मुनीर ने तंजील अहमद से फ्लैट और हथियार दिलाने की फरमाईश रख दी।
मुनीर ने पूछताछ में यह खुद स्वीकार किया कि वह अत्याधुनिक हथियार एके-47 खरीदने जा रहा था, ताकि पश्चिमी यूपी व एनसीआर में अपनी किलिंग मशीन ए-कंपनी का डंका बजा सके। इसी बाबत 29 नवंबर 2014 में कमला नगर दिल्ली में आशुतोष के साथ मिलकर मुनीर ने कैश वैन के गार्ड की गोली मारकर हत्या की और डेढ़ करोड़ रुपये लूटे। उसने सादाब के साथ मिलकर धामपुर में पीएनबी कैश वैन के गार्ड की गोली मारकर 95 लाख रुपये की लूट की।
सहसपुर के रिजवान से मुनीर को जानकारी मिली कि पुलिस उसे तलाश कर रही है। यह भी बताया गया कि मुखबिरी तंजील कर रहा है। इसके बाद तंजील अहमद को रास्ते हटाने का प्लान बनाया। आखिरकार मुनीर ने रैय्यान के साथ मिलकर डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी को मार डाला था।