बिजनौर जनपद के गांव स्वाहेड़ी में राशन डीलर के हत्यारोपी के अवैध निर्माण पर प्रशासन का बुलडोजर चल गया। ग्राम समाज की तीन बीघा जमीन पर कब्जा कर बनाए गए घेर की दीवारों को बुलडोजर से गिरा दिया गया। जमीन को कब्जा मुक्त कराते हुए ग्राम पंचायत के हवाले कर दिया गया है। प्रशासन और पुलिस के अफसरों की मौजूदगी में अवैध निर्माण को हटाया गया।
गुरुवार को शहर कोतवाली के गांव स्वाहेड़ी में एसडीएम विक्रमादित्य सिंह मलिक और सीओ सिटी भारी पुलिस फोर्स के साथ बुलडोजर लेकर पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी में प्रशासन की टीम ने करीब तीन बीघा जमीन पर किए गए अवैध कब्जे को हटा दिया। करीब तीन बीघा ग्राम समाज की जमीन पर रामबहादुर और बेटों ने कब्जा करते हुए घेर बना लिया था।
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बुलडोजर से अवैध निर्माण को ढहाया।
- फोटो : amar ujala
आरोपियों ने चहारदीवारी करते हुए एक बड़ा कमरा बना लिया गया था, जिसे घेर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। अब टीम ने घेर की चारों दीवारों समेत निर्माण को बुलडोजर से गिरा दिया। कब्जामुक्त कराई गई जमीन की कीमत दस लाख रुपये बताई जा रही है। बता दें कि 26 मार्च को रामबहादुर और बेटों ने गांव के ही राशन डीलर देवेंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी थी। मामले में रामबहादुर, उसके तीन बेटों और एक पोते को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
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जेसीबी लेकर पहुंची पुलिस।
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जांच के दौरान हुआ अवैध कब्जे का खुलासा
राशन डीलर की हत्या के वक्त ही अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाने की पटकथा लिखी गई। दरअसल, हत्या होने के बाद जांच पड़ताल कर रही पुलिस को अवैध निर्माण किए जाने की जानकारी मिली। जिसे प्रशासन के साथ साझा किया गया। हालांकि कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई को अमली जामा पहनाने में 10 दिन का लग गया।
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प्रशासन ने अवैध निर्माण को ध्वस्त किया।
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बताया गया कि 26 मार्च की सुबह स्वाहेड़ी में देवेंद्र की हत्या के बाद पुलिस पड़ताल में लगी हुई थी, तभी गांव वालों ने पुलिस को जानकारी दी कि आरोपी ने अपना घेर ग्राम समाज की जमीन पर बना रखा है। तभी से इस कब्जे को हटाने के लिए प्रक्रिया चल रही थी। हालांकि अवैध कब्जा ध्वस्त करते हुए कोई विरोध नहीं हुआ। आरोपी पक्ष की महिलाओं ने फोन कर सिर्फ इतना कहा कि अब तो उनके पक्ष के लोग जेल चले गए हैं, फिर जेसीबी क्यों चल रही है। जिस पर अधिकारियों ने अवैध निर्माण का हवाला दे दिया।
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जेसीबी से अवैध निर्माण ढहाया।
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प्रभारी निरीक्षक राधेश्याम ने बताया कि इस निर्माण को हटाते वक्त गांव में कई अन्य जगहों पर सरकारी जमीनों पर किए गए कब्जों की जानकारी ग्रामीणों ने दी है। इस अवैध कब्जे की ग्रामीणों को पहले से ही जानकारी थी, लेकिन कब्जा धारकों के दबंग होने के चलते कोई मुंह नहीं खोल पाया। न ही प्रशासन में कोई शिकायत की गई। अब हत्याकांड के बाद पुलिस ने शिकंजा कसा तो ग्रामीणों को अवैध कब्जे की जानकारी देने का मौका मिल गया।