बरेली के केलाडांडी गांव में शुक्रवार दोपहर को खुराफातियों ने विवादित स्थल की दीवार तोड़ दी। वहां तैनात होमगार्ड प्रेमपाल और छत्रपाल ने विरोध किया तो उन्हें पीटा गया। तीन थानों की पुलिस लेकर पहुंचे एसडीएम और सीओ दीवार बनवाने लगे तो हंगामा शुरू हो गया। क्षेत्रीय भाजपा विधायक डॉ. एमपी आर्या ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठ गए। इस पर अफसरों ने निर्माण रुकवा दिया। गांव में करीब आठ घंटे तक हंगामा हुआ। मामले में पुलिस ने 12 लोगों को हिरासत में लिया। ग्रामीणों ने थाने का घेराव किया। इसके बाद कुछ लोगों को छोड़ दिया गया।
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गांव में तैनात पुलिस फोर्स
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शुक्रवार को दूसरे समुदाय के लोग क्योलड़िया स्थित मस्जिद में नमाज पढ़ने गए थे। तभी गांव के खुराफातियों ने बवाल कर दिया। होमगार्ड जवानों ने सूचना थाना प्रभारी परमेश्वरी को दी। तब एसडीएम अजय कुमार उपाध्याय, सीओ हर्ष मोदी समेत पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिसकर्मियों ने लाठियां फटकारनी शुरू की तो खुराफाती भाग गए। दूसरे समुदाय के लोगों ने आरोप लगाया कि खुराफाती दूसरे मोहल्ले के रहने वाले हैं। इस पर पुलिस आरोपियों की तलाश करते हुए उनके घरों में घुस गई। घरों में मौजूद महिलाएं पुलिसकर्मियों से भिड़ गईं।
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ग्रामीणों को समझाते पुलिस अफसर
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महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने घरों में घुसकर दरवाजे और घरेलू सामान को तोड़ा। यदि उनके लोगों ने गुनाह किया है तो उन्हें पकड़ें। दरवाजे और बर्तन न तोड़ें। पुलिस ने 12 लोगों को हिरासत में लिया। सुरक्षा की दृष्टि से गांव में पीएसी भी लगा दी गई। रात में एडीएम प्रशासन दिनेश, एसपी उत्तरी मुकेश चंद्र मिश्रा ने गांव में डेरा डाल दिया।
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विवादित भवन की टूटी हुई दीवार
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मदरसे पर किया था रंग-रोगन
गांव में अल्पसंख्यक समुदाय के एक भवन में मदरसा संचालित किया जा रहा था। एक पक्ष के लोगों ने आरोप लगाया कि रंग-रोगन करके मदरसे को धर्मस्थल का रूप दिया जा रहा है। दो माह पहले ग्रामीणों ने विरोध किया तो तत्कालीन एसडीएम मल्लिका नैन ने यहां निर्माण रुकवाकर ताले डलवा दिए थे। साथ ही दो होमगार्ड जवानों को सुरक्षा के लिहाज से तैनात कर दिया था। शुक्रवार को दूसरे समुदाय के लोग नमाज अदा करने गांव से बाहर गए तो खुराफातियों को मौका मिल गया था।
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ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे ग्रामीण
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भाजपा विधायक डॉ. एमपी आर्या ने बताया कि कुछ लोगों के खिलाफ पुलिस ने अनावश्यक कार्रवाई की। जिस अवैध निर्माण को लोगों ने गिराया था, उसे पुलिस अपनी देखरेख में बनवा रही थी। इसलिए मुझे कुछ गांव वालों के साथ बैठना पड़ा। जब पुलिस ने निर्माण रुकवा दिया और पकड़े गए लोगों को छोड़ दिया तो मैं वहां से आ गया।