सिक्किम के भूस्खलन में बलिदान हुए पीलीभीत के गांव धुरिया पलिया निवासी हवलदार लखविंदर सिंह 50 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। बेटी के जन्म के बाद करीब डेढ़ माह पूर्व 20 अप्रैल को ड्यूटी पर वापस गए थे। सोमवार शाम उनके बलिदान होने की सूचना घर पहुंची तो कोहराम मच गया। बुजुर्ग माता-पिता, भाई, पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पिता गुरदेव सिंह ने बताया कि करीब चार दिन पहले फोन पर उनकी लखविंदर से बात हुई थी। सभी का हाल-खबर जानी थी। इसके बाद उनसे बात नहीं हो सकी। चार दिन पहले सिक्किम के हालात खराब हो गए। सोमवार शाम बेटे के बलिदान होने की सूचना मिली। यह कहकर उनकी आंखों में आंसू आ गए।
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हवलदार लखविंदर सिंह का फाइल फोटो
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आसपास बैठे लोगों ने उन्हें ढांढस बंधाया। बेटे के देश पर बलिदान होने का हौसला भी बुजुर्ग पिता में नजर आया। भाई पलविंदर की करीब एक सप्ताह पूर्व लखविंदर से बात हुई थी। कहा था कि सब ठीक है। इसके बाद उनकी बात नहीं हो सकी।
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भूस्खलन में बलिदान हुए हवलदार लखविंदर सिंह के परिजन बिलखते हुए
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50 दिन की छुट्टी पर घर आए थे लखविंदर
बताया कि लखविंदर 50 दिन की छुट्टी पर घर आए थे। पत्नी का प्रसव और बेटी के जन्म के बाद वह 20 अप्रैल को ड्यूटी पर लौट गए थे। शाम के समय बलिदान होने की खबर मिली। भाई पलविंदर भी तीन महीने पहले ही विदेश से लौटे हैं।
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पत्नी, मां व अन्य परिजनों के नहीं थम रहे आंसू
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मां बदहवास, बिलख रही थी पत्नी और बच्चे
लखविंदर के बलिदान होने की खबर से माता-पिता, भाई, पत्नी और बच्चों के आंसू थम नहीं रहे। दोपहर के समय पत्नी रुपिंदर कौर रोते-रोते बेसुध हो जा रही थीं। मां की गोद में मौजूद ढाई माह की मासूम मनसिरत कौर भी रो रही थी। लखविंदर का सात वर्षीय बेटा एकमजोत भी पिता को याद कर बिलख रहा था। ढांढस बंधाने पहुंचे ग्रामीण और सगे-संबंधियों की आंखें भी नम थीं।
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शोकाकुल परिजन
- फोटो : अमर उजाला
क्षेत्रीय लोगों की मांग, गांव के दोनों ओर बने शहीद द्वार
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि तीन साल पूर्व एसएसबी जवान मनतेज और सोमवार को हवलदार लखविंदर सिंह ड्यूटी के दौरान बलिदान हुए। दोनों ने देश सेवा के दौरान अपने प्राण त्याग दिए। लोगों का कहना है कि दोनों बलिदान सैनिकों की याद में धुरिया पलिया गांव के दोनों ओर शहीद द्वार बने। इससे लोग इन बलिदानियों की कहानी को हमेशा याद रखें। इसके अलावा लैहारी पुल को भी शहीद का नाम दिया जाए। लोगों का कहना है कि इसको लेकर पूर्व में भी मुख्यमंत्री को पत्राचार किए गए थे।