सर्वे में खुलासा: बरेली में अरिल के किनारे भू-जल की बिगड़ी सेहत, 60 गांवों पर मंडराया खतरा
बरेली जिले में अरिल नदी किनारे के भू-जल में टीडीएस सामान्य से 10 गुना अधिक पाया गया है। एक सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। यह भी पाया गया कि नदी का पानी भी कम हो रहा है।
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बरेली जिले में कभी खेतों और गांवों की प्यास बुझाने वाली अरिल नदी अब बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज है। नदी के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण और जगह-जगह पैदा हुई बाधाओं ने उसकी सांसें रोक दी हैं। नदी का पानी घट रहा है और जमीन के नीचे का पानी बेरोकटोक खींचा जा रहा है। इसी बीच प्रशासन एवं वर्ल्ड वाइड फंड फॉर इंडिया (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के सर्वे में नदी किनारे के भू-जल में कई जगह कुल धुलित ठोस (टीडीएस) की मात्रा सामान्य से 10 गुना अधिक पाई गई है।
संभल जिले के गुमसानी गांव से निकलने वाली अरिल नदी रामपुर होते हुए बरेली जिले में रामगंगा में समाहित होती है। इसकी लंबाई करीब 155 किलोमीटर है, लेकिन चौड़ाई सिमटती जा रही है। बरेली में यह आलमपुर जाफराबाद, रामनगर और मझगवां ब्लॉक के करीब 60 गांव के किनारे से गुजरती है।
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, अरिल के संकट की वजह सिर्फ पानी की कमी नहीं है। नदी के आसपास जमीन के नीचे से पानी खींचने की होड़, नदी के प्राकृतिक रास्ते पर बढ़ता कब्जा और बहाव में खड़ी की गईं रुकावटें इसके अस्तित्व को खत्म कर रही हैं। नदी का प्राकृतिक स्वरूप लगातार बदलता जा रहा है।
भू-जल का लगातार दोहन नदी के लिए बड़ा खतरा बनकर उभरा है। जमीन के नीचे से पानी निकलता जा रहा है, लेकिन उसके रिचार्ज की रफ्तार उतनी नहीं है। इसका सीधा असर पूरे जल तंत्र पर पड़ रहा है। टीडीएस सामान्य स्तर के मुकाबले 10 गुना अधिक पाए जाने से यह स्पष्ट है कि संकट सिर्फ नदी पर नहीं, बल्कि उसके आसपास रहने वाली आबादी पर भी मंडरा रहा है।
ऐसे में अरिल के पुनरुद्धार के साथ ही पूरे जल तंत्र को बचाने की जरूरत है। प्रशासन और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम के सर्वे के बाद उम्मीद जगी है कि अरिल को उसका पुराना स्वरूप लौटाने की दिशा में ठोस काम होगा।
इन गांवों में पानी का बढ़ा टीडीएस
मऊचंदपुर, तिगरा खानपुर, माजरा दौलतपुर, किटोना, बारीखेड़ा, लक्ष्मीपुर, दलीपुर, चक्करपुर गही, महमूदपुर और रामनगर समेत अन्य गांवों को सर्वे में शामिल किया गया था। यहां भू-जल का टीडीएस बढ़ा मिला है।
सीडीओ देवयानी ने बताया कि अरिल नदी को उसके वास्तविक स्वरूप में लाने के लिए सर्वे कराया गया है। अधिकारियों को स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। हर वर्ग को अरिल के पुनरुद्धार के लिए आगे आना चाहिए।