फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Groundwater quality deteriorates along the Aril River in Bareilly 60 villages face looming threat

सर्वे में खुलासा: बरेली में अरिल के किनारे भू-जल की बिगड़ी सेहत, 60 गांवों पर मंडराया खतरा

Sat, 19 Sep 2026 04:57 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Sat, 19 Sep 2026 04:57 PM IST
सार

बरेली जिले में अरिल नदी किनारे के भू-जल में टीडीएस सामान्य से 10 गुना अधिक पाया गया है। एक सर्वे में इसका खुलासा हुआ है। यह भी पाया गया कि नदी का पानी भी कम हो रहा है। 

विज्ञापन
Groundwater quality deteriorates along the Aril River in Bareilly 60 villages face looming threat
अरिल नदी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

बरेली जिले में कभी खेतों और गांवों की प्यास बुझाने वाली अरिल नदी अब बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज है। नदी के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण और जगह-जगह पैदा हुई बाधाओं ने उसकी सांसें रोक दी हैं। नदी का पानी घट रहा है और जमीन के नीचे का पानी बेरोकटोक खींचा जा रहा है। इसी बीच प्रशासन एवं वर्ल्ड वाइड फंड फॉर इंडिया (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के सर्वे में नदी किनारे के भू-जल में कई जगह कुल धुलित ठोस (टीडीएस) की मात्रा सामान्य से 10 गुना अधिक पाई गई है।

विज्ञापन


संभल जिले के गुमसानी गांव से निकलने वाली अरिल नदी रामपुर होते हुए बरेली जिले में रामगंगा में समाहित होती है। इसकी लंबाई करीब 155 किलोमीटर है, लेकिन चौड़ाई सिमटती जा रही है। बरेली में यह आलमपुर जाफराबाद, रामनगर और मझगवां ब्लॉक के करीब 60 गांव के किनारे से गुजरती है। 
विज्ञापन


सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, अरिल के संकट की वजह सिर्फ पानी की कमी नहीं है। नदी के आसपास जमीन के नीचे से पानी खींचने की होड़, नदी के प्राकृतिक रास्ते पर बढ़ता कब्जा और बहाव में खड़ी की गईं रुकावटें इसके अस्तित्व को खत्म कर रही हैं। नदी का प्राकृतिक स्वरूप लगातार बदलता जा रहा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

सिर्फ नदी नहीं, पूरा जल तंत्र खतरे में
भू-जल का लगातार दोहन नदी के लिए बड़ा खतरा बनकर उभरा है। जमीन के नीचे से पानी निकलता जा रहा है, लेकिन उसके रिचार्ज की रफ्तार उतनी नहीं है। इसका सीधा असर पूरे जल तंत्र पर पड़ रहा है। टीडीएस सामान्य स्तर के मुकाबले 10 गुना अधिक पाए जाने से यह स्पष्ट है कि संकट सिर्फ नदी पर नहीं, बल्कि उसके आसपास रहने वाली आबादी पर भी मंडरा रहा है। 

ऐसे में अरिल के पुनरुद्धार के साथ ही पूरे जल तंत्र को बचाने की जरूरत है। प्रशासन और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम के सर्वे के बाद उम्मीद जगी है कि अरिल को उसका पुराना स्वरूप लौटाने की दिशा में ठोस काम होगा।
 

इन गांवों में पानी का बढ़ा टीडीएस
मऊचंदपुर, तिगरा खानपुर, माजरा दौलतपुर, किटोना, बारीखेड़ा, लक्ष्मीपुर, दलीपुर, चक्करपुर गही, महमूदपुर और रामनगर समेत अन्य गांवों को सर्वे में शामिल किया गया था। यहां भू-जल का टीडीएस बढ़ा मिला है।

सीडीओ देवयानी ने बताया कि अरिल नदी को उसके वास्तविक स्वरूप में लाने के लिए सर्वे कराया गया है। अधिकारियों को स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। हर वर्ग को अरिल के पुनरुद्धार के लिए आगे आना चाहिए। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed