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Pilibhit Encounter: इस देश में भागने की फिराक में थे आतंकी! पहले भी आतंकियों का सुरक्षित ठिकाना रहा ये इलाका
Tue, 24 Dec 2024 10:54 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
अमर उजाला नेटवर्क, पीलीभीत
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 24 Dec 2024 10:54 AM IST
सार
पुलिस इस बात की जांच में जुट गई है कि आतंकियों ने छिपने के लिए पीलीभीत को ही क्यों चुना, कहां रुके थे। चूंकि पीलीभीत पहले भी खालिस्तानी आतंकियों का गढ़ रहा है। आतंकी इस देश में भागने की फिराक में थे।
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Pilibhit Encounter
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में सोमवार सुबह हुए एनकाउंटर की जांच जारी है। सोमवार को खालिस्तान समर्थक तीन आतंकियों को पंजाब और पीलीभीत पुलिस ने साझा कार्रवाई में मार गिराया था। अब पुलिस इस बात की जांच में जुट गई है कि आतंकियों ने छिपने के लिए पीलीभीत को ही क्यों चुना, कहां रुके थे। चूंकि पीलीभीत पहले भी खालिस्तानी आतंकियों का गढ़ रहा है। करीब 33 साल पहले 1991 में भी एक ही दिन अलग-अलग तीन मुठभेड़ों में 10 खालिस्तानी आतंकी मारे गए थे। सूत्रों की मानें तो सोमवार को मारे गए तीनों आतंकी दो दिन पहले ही यहां आ गए थे। पीलीभीत के पूरनपुर क्षेत्र के सिख बहुल इलाके में रह रहे थे। चूंकि नेपाल की सीमा भी यहां से सटी हुई है। ऐसे में आशंका है कि ये लोग नेपाल भागने की फिराक में थे।
आतंकियों से बरामद हुईं एके-47
- फोटो : यूपी पुलिस
खुली नेपाल सीमा से तराई का पीलीभीत जिला बन रहा अपराधियों की पनाहगाह
नेपाल की खुली सीमा की वजह से वर्तमान में तराई का शांत माना जाने वाला इलाका पीलीभीत आतंकियों और कुख्यात अपराधियों की शरणगाह बनता जा रहा है। जिले में कई स्थानों पर नेपाल की सीमा लगती है। वहां लोगों का आवागमन रहता है। ऐसे में कई बार इस तरह की गतिविधियां सामने आई हैं। कुछ माह पहले गैंगस्टर की हत्या करने वाले अपराधी भी यहां पकड़े जा चुके हैं। मुख्य रूप से पूरनपुर और कलीनगर क्षेत्र से नेपाल की सीमा जुड़ती है। जिले में भारतीय सीमा के 17 नंबर पिलर से 28 तक करीब 40 किलोमीटर नेपाल सीमा है।
नेपाल की खुली सीमा की वजह से वर्तमान में तराई का शांत माना जाने वाला इलाका पीलीभीत आतंकियों और कुख्यात अपराधियों की शरणगाह बनता जा रहा है। जिले में कई स्थानों पर नेपाल की सीमा लगती है। वहां लोगों का आवागमन रहता है। ऐसे में कई बार इस तरह की गतिविधियां सामने आई हैं। कुछ माह पहले गैंगस्टर की हत्या करने वाले अपराधी भी यहां पकड़े जा चुके हैं। मुख्य रूप से पूरनपुर और कलीनगर क्षेत्र से नेपाल की सीमा जुड़ती है। जिले में भारतीय सीमा के 17 नंबर पिलर से 28 तक करीब 40 किलोमीटर नेपाल सीमा है।
Pilibhit Encounter
- फोटो : अमर उजाला
कई स्थानों पर खुला है आवागमन
कई स्थानों पर यह सीमा पूरी तरह खुली है। सिर्फ सीमा पिलर ही लगे हैं। कच्चे रास्ते और जंगल के बीहड़ इलाके भी हैं। आवागमन भी काफी सुगम है। इसके अलावा उत्तराखंड राज्य की सीमा भी जिले से सटी है। यही वजह है कि जिले में कुख्यात अपराधियों और आतंकियों की आवाजाही रहती है। मार्च 2024 में जम्मू के गैंगस्टर राजेश डोगरा की हत्या के बाद पांच शूटरों ने पूरनपुर के शाहगढ़ इलाके में स्थित एक घर में आकर शरण ली थी।
कई स्थानों पर यह सीमा पूरी तरह खुली है। सिर्फ सीमा पिलर ही लगे हैं। कच्चे रास्ते और जंगल के बीहड़ इलाके भी हैं। आवागमन भी काफी सुगम है। इसके अलावा उत्तराखंड राज्य की सीमा भी जिले से सटी है। यही वजह है कि जिले में कुख्यात अपराधियों और आतंकियों की आवाजाही रहती है। मार्च 2024 में जम्मू के गैंगस्टर राजेश डोगरा की हत्या के बाद पांच शूटरों ने पूरनपुर के शाहगढ़ इलाके में स्थित एक घर में आकर शरण ली थी।
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Pilibhit Encounter
- फोटो : अमर उजाला
पीलीभीत में 33 साल पहले भी हुई थी मुठभेड़... मारे गए थे 10 आतंकी
33 साल बाद एक बाद फिर से पीलीभीत जिला खालिस्तानी आतंकियों का कब्रगाह बना। 1991 में भी पीलीभीत में 16 घंटे में हुईं तीन अलग-अलग मुठभेड़ों में पुलिस ने पंजाब के 10 खतरनाक आतंकवादियों को मार गिराया था। इनमें खालिस्तानी लिबरेशन आर्मी के स्वयंभू कमांडर बलजीत सिंह ''पप्पू'' और लेफ्टिनेंट कमांडर जसवंत सिंह भी शामिल थे। मुठभेड़ में सब इंस्पेक्टर हरपाल सिंह भी घायल हुए थे। बता दें सोमवार तड़के हुई मुठभेड़ में भी पंजाब के तीन आतंकी मारे गए हैं।
33 साल बाद एक बाद फिर से पीलीभीत जिला खालिस्तानी आतंकियों का कब्रगाह बना। 1991 में भी पीलीभीत में 16 घंटे में हुईं तीन अलग-अलग मुठभेड़ों में पुलिस ने पंजाब के 10 खतरनाक आतंकवादियों को मार गिराया था। इनमें खालिस्तानी लिबरेशन आर्मी के स्वयंभू कमांडर बलजीत सिंह ''पप्पू'' और लेफ्टिनेंट कमांडर जसवंत सिंह भी शामिल थे। मुठभेड़ में सब इंस्पेक्टर हरपाल सिंह भी घायल हुए थे। बता दें सोमवार तड़के हुई मुठभेड़ में भी पंजाब के तीन आतंकी मारे गए हैं।
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Pilibhit Encounter: आरोपियों से बरामद हुईं एके-47 और कारतूस
- फोटो : यूपी पुलिस
दरअसल, पीलीभीत, शाहजहांपुर और लखीमपुर खीरी में आतंकवाद की जड़ें पुरानी हैं। तराई का यह इलाका पहले भी आतंकवादियों का सुरक्षित ठिकाना रहा है। आतंकियों ने कई आम लोगों की हत्या की तो सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में कई आतंकियों को ढेर भी किया। 12-13 जुलाई 1991 को होक के जंगल में छिपे आतंकियों को पुलिस ने आत्मसमर्पण करने के लिए कहा तो फायरिंग शुरू कर दी थी। जवाबी फायरिंग में चार आतंकवादी मारे गए थे।