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Mulayam: यूं ही नहीं...बड़ी मुश्किल से बनते ‘मौलाना मुलायम’, 'नेताजी की राजनीति में थी मुस्लिम हितों की चिंता'

Wed, 12 Oct 2022 01:30 PM IST
शाहरुख खान शशांक वर्मा, अमर उजाला, बरेली
शशांक वर्मा, अमर उजाला, बरेली Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 12 Oct 2022 01:30 PM IST
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Mulayam Singh Yadav Death Maulana Mulayam On Muslim polarization
मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद पांचजन्य पत्रिका ने मुलायम सिंह यादव को ‘मौलाना मुलायम’ की पदवी से नवाजा था। यह सियासी सच्चाई भी है कि इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश में तेजी से मुस्लिम ध्रुवीकरण हुआ, जिसका फायदा भाजपा और सपा दोनों ने उठाया। लेकिन इस घटनाक्रम के आगे भी कुछ है, जिसकी बदौलत मुलायम सिंह मुस्लिमों के राजनीतिक पैरोकार बने। सपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. यासीन अली उस्मानी का कहना है कि सिर्फ एक घटना की बदौलत लंबे समय तक कोई कौम किसी के पीछे नहीं खड़ी रह सकती। मुलायम सिंह ने अपनी पूरी राजनीति में मुसलमानों को तरजीह दी। उर्दू टीचर, उर्दू अनुवादक रखने का मामला हो या अन्य नौकरियों में मुसलमानों की भर्ती का मसला रहा हो। राजनीतिक भागीदारी में भी उन्होंने मुसलमानों का ख्याल रखा। खूब टिकट बांटे। मंत्री बनाए। मैं खुद राजनीति में नहीं आना चाहता था। 

 
Mulayam Singh Yadav Death Maulana Mulayam On Muslim polarization
मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
नेता जी ने बदायूं में एक बार मेरी स्पीच सुनी तो मुझे राजनीति में आने को प्रेरित किया। बाद में उर्दू एकेडमी का अध्यक्ष बनाया। नेता जी का मानना था कि जिससे वोट लिया जाए, उसे कुछ वापस भी किया जाए। बरेली कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. सोमेश यादव का कहना है कि इसमें कोई दो राय नहीं कि अयोध्या की घटना के बाद मुलायम सिंह के पक्ष में मुस्लिम ध्रुवीकरण हुआ। लेकिन उनकी सेक्युलर राजनीति का पक्ष काफी मजबूत रहा है।

 
Mulayam Singh Yadav Death Maulana Mulayam On Muslim polarization
मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
एसएस कॉलेज शाहजहांपुर के पूर्व प्राचार्य डॉ. अवनीश मिश्रा मुलायम सिंह को सामाजिक समरसता का आक्रामक लीडर बताते हैं। कहते हैं कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान उनका बयान ‘मेरे जीते जी अयोध्या में कोई नुकसान नहीं हो सकता’ मुसलमानों को काफी अपील किया। लंबे समय तक मुसलमानों को जोड़े रखना, उनका राजनीतिक कौशल था। 

 
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) - फोटो : Instagram
शाहजहांपुर के ही जीएफ कॉलेज के अवकाश प्राप्त प्रोफेसर सैयद मो. नोमान का कहना है कि नब्बे के दशक में मुसलमानों का कांग्रेस से मोहभंग हो चुका था। वे वंचित महसूस करने लगे। इसी दौरान मुलायम सिंह यादव एक नया चेहरा बनकर उभरे, जिसे मुसलमानों ने अपना हमदर्द माना। इलाहाबाद विवि में छात्र नेता रहे अजीत यादव इन दिनों बदायूं में राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। 

 
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
अजीत कहते हैं कि वीपी सिंह के नेतृत्व में जिस राजनीतिक मोर्चे का गठन हुआ, उसमें मुलायम सिंह, लालू यादव, शरद यादव प्रमुख नेता रहे। अयोध्या को लेकर भाजपाई राजनीति के विरोध में यूपी में मुलायम सिंह काफी मुखर नेता के रूप में उभरे। बाद के दिनों में जब मोर्चा टूटा तो मुस्लिम वोट सपा में शिफ्ट हुआ।

 
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