तब भी सितंबर का महीना था और अब भी। फर्क केवल तारीख और वर्ष का है। संत आसाराम को सलाखों के पीछे भिजवाने वाली लड़की भी शाहजहांपुर की थी और स्वामी चिन्मयानंद को जेल पहुंचाने वाली छात्रा भी शाहजहांपुर की है। यौन शोषण का शिकार हुईं इन बेटियों ने हौसले को नहीं तोड़ा। शोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ी और जंग भी जीती।
शुक्रवार को चिन्मयानंद को जेल भेजे जाने पर आसाराम की काली करतूत की कहानी भी ताजा हो गई। कई आश्रमों का मालिक आसाराम ने शहर की बिटिया को उपचार के बहाने अपने जोधपुर स्थित आश्रम में बुलाया जहां उसके साथ यौन शोषण किया गया। आसाराम के खिलाफ मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। लंबी लड़ाई के बाद आसाराम को 1 सितंबर 2013 को रात 12:30 बजे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
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- फोटो : सोशल मीडिया
शहर की बिटिया की लड़ाई यहीं नहीं रुकी। उसने न्यायालय में डटकर पैरवी की और अंतत: आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। ऐसे ही हौसले वाली एक और शाहजहांपुर की बेटी सामने आई। उसने मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता और कई कॉलेजों का प्रबंधन संभाल रहे चिन्मयानंद की काली करतूतों को उजागर किया तो लगा कि आसाराम की तरह चिन्मयानंद को पुलिस बचाने का काम कर रही है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी पर पीड़ित छात्रा ने सवाल खड़े किए और अपनी लड़ाई जारी रखी।
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जेल जाते स्वामी चिन्मयानंद
- फोटो : अमर उजाला
24 अगस्त को फेसबुक पर स्वामी पर गंभीर आरोप लगाते हुए वीडियो वायरल करने के बाद बेटी ने आखिर बाजी जीती और अंतत: 20 सितंबर को सुबह चिन्मयानंद को गिरफ्तार कर लिया गया।
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- फोटो : अमर उजाला
चिन्मयानंद ने की थी आसाराम को बचाने की कोशिश
आसाराम के खिलाफ लड़ने वाली पीड़ित छात्रा के केस को कमजोर करने और आसाराम की मदद करने के लिए स्वामी चिन्मयानंद ने अपने स्कूल से केजी, नर्सरी की फर्जी मार्कशीट और टीसी बनाकर दे दी थी, ताकि आसाराम पर लगा पॉक्सो एक्ट हट सके और उनका जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गए, पर पिता ने जो स्कूली अभिलेख कोर्ट में रखे उसके हिसाब से पीड़िता को नाबालिग माना गया और आसाराम कानूनी शिकंजे में कसता चला गया। इतना ही नहीं चिन्मयानंद ने अपने स्कूल की प्रधानाचार्या को भी जोधपुर आसाराम के पक्ष में गवाही देने के लिए भेजा था।