प्रयागराज में तिहरे हत्याकांड के बाद मकान मालकिन सुशीला देवी और उनके बेटे पंकज की लापरवाही भी जांच के दायरे में आ गई है। मूक-बधिर दंपती पिछले छह माह से इनके मकान के एक कमरे में रह रहे थे लेकिन मकान मालकिन ने इनके नाम-पते का कोई विवरण अपने पास नहीं रखा।
पुलिस की जांच में भी अभी तक कमरे से ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मिला है, जिससे मृतकों की पहचान हो सके। किरायेदारों का सत्यापन नहीं कराया जाना भी शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन गया है।
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प्रयागराज में तिहरा हत्याकांड के बाद जांच के लिए पहुंची पुलिस की टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मकान मालकिन के अनुसार, मूक-बधिर दंपती करीब ढाई साल पहले इसी मकान में रह चुके थे। छह माह पहले दोबारा किराये पर कमरा लिया था। वहीं, कमरे में मिली 45 वर्षीय एक अन्य महिला के बारे में भी मकान मालकिन को कोई जानकारी नहीं थी।
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प्रयागराज में तिहरा हत्याकांड के बाद जांच के लिए पहुंची पुलिस की टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने बताया कि महिला को पहली बार देखा था। उसे किरायेदार की रिश्तेदार समझ लिया था। एसीपी कोतवाली रवि गुप्ता के अनुसार, जांच की जा रही है कि किरायेदारों की जानकारी मकान मालकिन के पास क्यों नहीं है? अब पुलिस अन्य किरायेदारों की जानकारी भी जुटा रही है। दूसरी मंजिल पर रहने वाले तीन युवकों से भी पूछताछ की जा रही है।
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प्रयागराज में तिहरा हत्याकांड, मकान मालिकन से पूछताछ करती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मालकिन बोलीं-रात में आई थी महिला
मकान मालकिन सुशीला देवी ने बताया कि उन्होंने कमरे में आई महिला को पहले कभी नहीं देखा था। उसे रिश्तेदार समझकर पूछताछ नहीं की। रात करीब 11 बजे वह सोने चली गई। रोजाना सुबह मूकबधिर दंपती ही पानी की मोटर चलाते थे। जब सात बजे तक मोटर नहीं चली तो वह पूछने ऊपर गईं। कमरे का दरवाजा खुला था। झांककर देखा तो चीख निकल गई।
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प्रयागराज में तिहरा हत्याकांड के बाद छतों से देखती महिलाएं
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अस्थायी मजदूरों का रिकॉर्ड चुनौती
शहर में कबाड़ बीनने, मजदूरी और छोटे-मोटे काम करने वाले बड़ी संख्या में लोग किराये पर रहते हैं। इनमें से कई लोगों का स्थायी पता और पहचान सत्यापित नहीं होने से पुलिस के लिए रिकॉर्ड तैयार करना मुश्किल होता है। अब पुलिस थाना स्तर पर किराये के मकानों का रिकॉर्ड जुटाने की तैयारी में है।