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मरीजों पर भारी पड़ रही निजी कोविड अस्पतालों की मनमानी

Mon, 10 May 2021 12:08 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 10 May 2021 12:08 AM IST
सार

  • उपचार के नाम पर तय शुल्क से ज्यादा वसूल रहे, एक दर्जन से ज्यादा शिकायतें आईं सामने
  • मामले में पांच अस्पतालों के नाम आ रहे सामने, मांगा गया है जवाब
  • रूटीन वार्ड के लिए प्रतिदिन 1800 रुपये
  • एचडीयू वार्ड के लिए प्रतिदिन 2700 रुपये
  • आईसीयू वार्ड के लिए प्रतिदिन 3600 रुपये
  • आईसीयू विथ वेंटिलेटर वार्ड के लिए प्रतिदिन 4500 रुपये

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The arbitrariness of private Covid hospitals is falling on the patients
prayagraj news : money - फोटो : prayagraj

अल्लापुर के रहने वाले लवकुश स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट थे। 14 अप्रैल को एंटीजन जांच में पॉजिटिव होने के बाद टैगोर टाउन स्थित एलटू निजी अस्पताल में भर्ती हो गए। वहां दो दिनों तक भर्ती रहे। हालत खराब हुई तो निजी अस्पताल ने एसआरएन रेफर कर दिया। जहां उनकी मौत हो गई। दो दिनों तक भर्ती रहने के दौरान निजी अस्पताल ने सवा लाख रुपये ले लिए और दवाओं और जांच का पैसा अलग से खर्च हुआ। कोविड मरीज के साथ हुई ये घटना तो बानगी मात्र है। मरीजों के साथ मनमानी वसूली की एक दर्जन से ज्यादा शिकायतें सामने आई हैं। इन अस्पतालों के संचालक सत्ताधारी पार्टी से भी जुड़े हुए हैं।

The arbitrariness of private Covid hospitals is falling on the patients
prayagraj news : एसआरएन में मरीज को भर्ती कराने लेकर आते परिजन। - फोटो : prayagraj

कोरोना संक्रमण के दौर में निजी अस्पतालों ने आपदा में मनमानी करने का अवसर खोज लिया है। कुछ नर्सिंग होम तथा अस्पताल संचालक भर्ती होने वाले मरीजों से चाहे वे माइल्ड हों या गंभीर हों, अस्पताल पहुंचते ही पहले डेढ़ लाख रुपये जमा करा ले रहे हैं और फिर उनसे डॉक्टर के राउंड के नाम पर, जांच , दवाओं के नाम पर अलग-अलग चार्ज वसूल रहे हैं। मरीज को ऑक्सीजन लग गई, वह वेंटिलेटर या फिर एचएफएनओ पर है तो दोगुना वसूली की जा रही है। वेंटिलेटर चार्ज भी प्रतिदिन के हिसाब से 15 हजार रुपये वसूला जा रहा है।

The arbitrariness of private Covid hospitals is falling on the patients
prayagraj news : एसआरएन में मरीज को भर्ती कराने लेकर आते परिजन। - फोटो : prayagraj

आईसीयू में भर्ती मरीजों से एक दिन का बिल 60-60 हजार रूपये वसूला जा रहा है।  कोरोना के नोडल ऑफिसर, सीएमओ से लेकर डीएम तक भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। बताया जा रहा है इस मामले में कुछ निजी अस्पताल के संचालकों को डीएम ने फटकार भी लगाई है। लेकिन मरीजों से लूट थमी नहीं है। मामले में एक दर्जन से अधिक मरीजों ने शहर के पांच निजी कोविड अस्पतालों की शिकायत भी की है। इसमें टैगोर टाउन, सिविल लाइंस, फाफामऊ स्थित निजी अस्पतालों के खिलाफ जांच चल रही है। अस्पतालों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। जवाब सही नहीं मिलने पर कार्रवाई करने की बात कही जा रही है। 

शहर के कुछ निजी कोविड अस्पतालों में कोरोना मरीजों से उपचार के लिए अधिक पैसे लिए गए हैं। जांच की जा रही है। अस्पतालों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। डॉ. प्रभाकर राय, मुख्य चिकित्साधिकारी

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The arbitrariness of private Covid hospitals is falling on the patients
prayagraj news : एसआरएन में मरीज को भर्ती कराने लेकर आते परिजन। - फोटो : prayagraj

कोविड जांच के लिए ले रहे पांच-पांच हजार रुपये

निजी कोविड हॉस्पिटल भर्ती होने वाले मरीजों से कोविड जांच कराने के नाम पर पांच-पांच हजार रुपये वसूल रहे हैं। इस बात की शिकायत भी सीएमओ से भी की गई है। उधर, स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण से निपटने में व्यस्तता के कारण इस संबंध में पूरी तरह से ध्यान नहीं दिया गया। इस वजह से निजी कोविड अस्पताल जांच कराने के नाम पर भी सरकार द्वारा निर्धारित रेट से चार गुना अधिक पैसे वसूल कर रहे हैं।  

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The arbitrariness of private Covid hospitals is falling on the patients
prayagraj news : एसआरएन में मरीज को भर्ती कराने के लिए परेशान दिखे परिजन। - फोटो : prayagraj

हल्के मरीजों को रखा भर्ती, गंभीर को कर दिया किनारे

निजी कोविड अस्पताल मरीजों से उपचार के नाम पर मनमानी वसूली तो कर ही रहे हैं। उन्होंने एक चालाकी और की। अस्पतालों ने अपने यहां गंभीर मरीजों को भर्ती ही नहीं किया। कोरोना के हल्के मरीजों को भर्ती कर रिकार्ड में अस्पताल को फुल कर लिया और जब गंभीर मरीज पहुंचे तो उनसे कहा कि उनके यहां बेड ही खाली नहीं है। विगत अप्रैल माह में निजी कोविड अस्पातलों ने दो हजार से अधिक मरीजों को भगा दिया और हल्के मरीजों का उपचार कर कमाई की।

इन अस्पतालों ने दिखाया कि उनके यहां किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई। जो मरीज भर्ती रहे, उनकी हालत जरा भी गंभीर हुई तो उन्हें तुरंत ही स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय रेफर कर दिया। कोरोना के नोडल ऑफिसर डॉ. ऋषि सहाय भी यह मानते हैं। उन्होंने कहा कि शुरू में अस्पतालों को भर्ती करने की छूट मिल गई थी। इसका उन्होंने लाभ उठाया। इसलिए मरीजों को भर्ती करने के लिए दो हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए साथ ही निजी अस्पतालों को भर्ती करने से पहले स्वास्थ्य विभाग की स्वीकृति लेने की व्यवस्था बनाई गई थी। 

आयुष्मान में निर्धारित किए गए हैं रेट

प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के तहत निजी कोविड मरीजों के उपचार के लिए रेट निर्धारित कर दिए गए हैं। पीएमजेएमवाई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी की ओर से 28 अप्रैल को जारी आदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों को कोविड मरीजों के लिए चार रेट निर्धारित किए गए हैं। कोई भी मरीज आयुष्मान के तहत भर्ती होगा तो अस्पतालों को इन्हीं रेट के हिसाब से सरकार उपचार के पैसे का भुगतान करेगी। यह आदेश देश के सभी जिलाधिकारियों, मुख्य चिकित्साधिकारियों को भेजा गया है। निर्धारित रेट से अधिक पैसा लेने पर अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। 
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