शहर में शंकर घाट से मिले कोरोना पॉजिटिव युवक की टूर हिस्ट्री मिस्ट्री बन गई है। उसकी टूर हिस्ट्री पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि दुनिया में अभी तक कोई भी ऐसा मरीज सामने नहीं आया है, जिसमें 53 दिन के बाद लक्षण नजर आए हों। आमतौर पर कोरोना के लक्षण सात से आठ दिनों में नजर आने लगते हैं। अगर 53 दिनों के बाद कोई पॉजिटिव हो रहा है तो यह पूरी दुनिया में अजूबा होगा।
Prayagraj: शंकर घाट के कोरोना पॉजिटिव युवक की टूर हिस्ट्री बनी मिस्ट्री
चार को वंदेभारत एक्सप्रेस से प्रयागराज आ गया। इसके बाद से वह कहीं नहीं गया। उसकी इसी बात को लेकर चिकित्सक सवाल खड़े कर रहे हैं। चिकित्सकों ने आशंका जताई है कि वह 10 से 12 दिनों के अंदर ही कहीं बाहर गया होगा और कोरोना पॉजिटिव के संपर्क में आ गया होगा। क्योंकि प्रयागराज में इसके संक्रमण की अभी कोई आशंका भी नहीं है।
इंडोनेशियाई नागरिक के अलावा शहर में कोरोना का कोई मामला भी अभी सामने नहीं आया। ऐसे में युवक कैसे संक्रमित हो गया है, इसको लेकर सवाल खड़े हैं। मामले में प्रशासनिक अफसरों की ओर से जांच की जा रही है लेकिन डॉक्टर का यही कहना है कि ऐसा लग रहा है कि शंकरघाट का युवक अपनी टूर हिस्ट्री के बारे में सही जानकारी नहीं दे रहा है। कोटवां बनी स्थित कोविड 19 लेवल1 हॉस्पिटल के नोडल ऑफिसर डॉ विवेक कुमार मिश्रा कहते हैं कि शंकरघाट के कोरोना पॉजिटिव युवक से जानने की कोशिश की गई लेकिन उसने कोई नई जानकारी नहीं दी है। उन्होंने यह भी बताया कि देश और दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति की हिस्ट्री आठ से दस दिनों की है।
टीबी की मरीज है प्रतापगढ़ की कोरोना पॉजिटिव महिला मरीज
कोटवां बनी में भर्ती प्रतापगढ़ की महिला कोरोना पॉजिटिव टीबी की भी मरीज है। वह मुंबई से लौटी है। लक्षण देख उसकी जांच कराई गई तो रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। वह शनिवार की देर रात प्रतापगढ़ से यहां आई है।
कोविड 19 लेवल1 हॉस्पिटल में प्रतापगढ़ की महिला मरीज के आने से कोरोना के मरीजों की संख्या चार हो गई है। इसमें तीन मरीज प्रयागराज के हैं। हॉस्पिटल के नोडल ऑफिसर डॉ0 विवेक मिश्रा ने बताया कि अभी सभी सामान्य हैं। मरीजों को उनकी जरूरत के मुताबिक उपचार किया जा रहा है। प्रतापगढ़ से आई महिला में लक्षण साफ दिख रहे हैं। उसे जुकाम व बुखार-खांसी के साथ सांस फूलने की शिकायत है। वह मुंबई से यहां इलाज कराने के आई है। इसी आधार पर उसे यहां आने भी दिया गया है।
बाहरियों की मॉनिटरिंग में लापरवाही पड़ सकती है भारी
देश के दूसरे प्रदेशों या फिर प्रदेश के दूसरे जिलों से पलायित होकर आ रहे लोगों की मॉनिटरिंग बहुत अहम हो गई है। अगर ऐसा नहीं होता है तो हालात बदतर हो सकते हैं। तीन पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद ही पुलिस प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की परेशानियां बढ़ गईं हैं। अगर इन तीनों को रोककर पहले ही कहीं क्वारंटीन कर दिया जाता तो परेशानी नहीं बढ़ती।कोरोना के नोडल ऑफिसर डॉ रिषी सहाय का कहना है कि बाहर से आने वाले लोगों की मॉनिटरिंग बहुत जरूरी है। कोरोना का कोई दूसरा मामला सामने न आने पर 15 अप्रैल के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। प्रशासनिक अफसरों ने थोड़ी ढील देनी शुरू की। उसी का नतीजा रहा कि शंकरगढ़ के कपारी गांव के युवक बाहर से सीधे अपने घरों को पहुंच गए। इससे संक्रमण के फैलने का खतरा बढ़ गया।
शंकरगढ़ में 200 से अधिक लोग क्वारंटीन
क्षेत्र के कपारी गांव में करोना के मरीज मिलने से वहां के लगभग 200 से ऊपर लोगों को क्वारंटीन किया जा चुका है। जिससे उनके घर में बंधे मवेशियों को चारा पानी की दिक्कत होने लगी। जिस पर ग्राम पंचायत के सचिव रामसेवक द्वारा सफाई कर्मियों के सहयोग से उनको चारा पानी दिया गया। उपजिलाधिकारी बारा संदीप भागिया ने रविवार को खंड विकास अधिकारी शंकरगढ़ को आदेश दिया कि कपारी गांव में जितने भी पशु हैं। जिनके घर में कोई चारा पानी देने वाला नहीं है । उन्हें बेमरा गांव में बने अस्थाई गौशाला में पहुंचाया जाए।गांव के लोगों को खाने पीने की दिक्कत न हो इसलिए गांव में ही एक सब्जी तथा दूसरी किराने की दुकान खुलवा दी गई है। स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक द्वारा एक सेक्टर इंचार्ज की टीम बनाई गई है। जिसमें डॉ. अभिषेक सिंह, डॉ. संजय सिंह, डॉ. अजीत राजाराम यादव, डॉ. राजेश कुमार इनके माध्यम से स्वास्थ्य विभाग की 41 टीमें गठित की गई हैं। जिसमें सारी टीमें घर-घर जाकर सर्वे करेंगी तथा सभी लोगों से पूछताछ करेेंगी। कपारी गांव में बचे हुए अन्य लोगों के लिए उपजिलाधिकारी द्वारा बस लगाई गई जिसमें आज लगभग 80 लोगों को प्रयागराज क्वांरटीन के लिए भेजा गया।