वेलपत्र, धतूरा, आम केबौर और जौ की बालियों से शुक्रवार को महाशिवरात्रि पर देवाधिदेव महादेव की सविधि आराधना की गई। रंग-बिरंगे फूलों, गजरों और झालरों से सजे शिव मंदिरों में तरह-तरह की झांकियां सजाई गईं। दिन भर बाबा का दूध और गंगा जल से अभिषेक किया जाता रहा। इस दौरान शिवालयों में देर शाम तक हर हर महादेव के उद्घोष गूंजते रहे।
महाशिवरात्रि पर बम-बम भोले के उद्घोष से गूंजा प्रयागराज
यमुना किनारे सरस्वती घाट पर स्थित मनकामेश्वर महादेव का गेंदा, गुलाब, बेला और रजनीगंधा के फूलों से मोहक शृंगार किया गया। पूरे मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया था। भोर से देर शाम तक मंदिर में रुद्राभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर के महंत स्वामी श्रीधरानंद महाराज के निर्देशन में भव्य शृंगार झांकी सजाई गई थी। इसी तरह संगम स्थित अकबर के किले में स्थित पातालपुरी में भी भगवान शूलटंकेश्वर महादेव की फूलों से भव्य झांकी सजाई गई। दिन भर रुद्राभिषेक के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।
प्रधानपुरी रवींद्र नाथ योगेश्वर के निर्देशन में महाआरती हुई। इसी तरह कीडगंज स्थित निर्मलपंचायती अखाड़ा परिसर में स्थित निर्मलेश्वर महादेव की भव्य शृंगार झांकी सजाई गई। महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री की मौजूदगी में शृंगार किया गया। बादशाहीमंडी स्थित बड़ा गणेश मंदिर परिसर में स्थित शूलटंकेश्वर महादेव की सुबह शृंगार झांकी सजाई गई। रंग-बिरंगे फूलों की झांकी के बीच बाबा के रुद्राभिषेक के लिए भीड़ लगी रही। रात को चार पहर की आरती हुई। इसी तरह बैरहना स्थित प्राचीन सिद्धपीठ निंबार्क आश्रम में महंत स्वामी राधा माधव दास के निर्देशन में शिवरात्रि महोत्सव किया गया।
पं शिवाकांत पांडेय के निर्देशन में सुबह सात बजे से ही रुद्राभिषेक प्रारंभ हो गया। इस दौरान जलाभिषेक व षोडशोपचार पूजन भी होता रहा। शाम को सर्वेश्वर महादेव का भव्य पुष्प शृंगार किया गया। मंदिर परिसर में 1001दीप जलाए गए। देर रात तक कीर्तन-भजन में भीड़ लगी रही। इसी तरह जीरो रोड़ स्थित हाटकेश्वर नाथ महादेव मंदिर में भी भव्य शृंगार झांकी सजाई गई।सुबह पांच बजे से दोपहर एक बजे तक रुद्राभिषेक के बाद पट बंद कर दिए गए।
सिविल लाइंस स्थित बुद्धेश्वर महादेव की भी मनोहारी शृंगार झांकी के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ लगी रही। रात आठ बजे बुद्धेश्वर महादेव की विशेष रुद्र-भस्म आरती उतारी गई।