प्रयागराजः मुगलकालीन स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है खुसरो बाग
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करीब चार सौ वर्ष पहले मुगल सल्तनत का केंद्र रही संगम नगरी में उस दौर के वास्तुशिल्प की निशानी के तौर पर मौजूद दर्शनीय स्थलों में खुसरो बाग एक है। लेकिन इसे भी प्रचार-प्रसार के अभाव में पर्यटन के मानचित्र पर अब तक नहीं उभारा जा सका है। वर्ष 1605 में अकबर के इंतकाल के बाद उद्यानों के प्रेमी उसके पुत्र सलीम उर्फ जहांगीर ने अपनी सैरगाह के लिए इस बाग का निर्माण कराया था।
बहुक्म हजरत शहंशाही खिलाफत पनाही जिल्ले इलाही नूरुद्दीन मुहम्मद जहांगीर बादशाह गाजी बहतमाम मजीद खास आकारजा मुसब्बिर ई बिनाय अली सूरत इत्माम याफ ...। फारसी के ये अल्फाज खुल्दाबाद की सड़क की उत्तर पटरी पर स्थित खुसरोबाग के 60 फीट ऊंचे लकड़ी के फाटक के ऊपरी हिस्से में आज भी खुदे हुए देखे जा सकते हैं। इसका आशय यह है कि बादशाह जहांगीर के हुक्म से आका नामक चित्रकार के हाथों तैयार डिजाइन पर इसे तैयार कराया गया था।
खुसरो बाग की हरियाली के बीच चार मकबरे मुगल वास्तुशिल्प की समृद्धि बयां करने के लिए काफी हैं। इसमें पहला मकबरा जहांगीर की पहली पत्नी शाह बेगम के बड़े पुत्र खुसरो मिर्जा का है। अपने पिता जहांगीर के प्रति विद्रोह करने के बाद इसी बाग में नज़रबंद खुसरो भागने के प्रयास में मारा गया था। दूसरा मकबरा मुगल बादशाह जहांगीर की पहली पत्नी मानबाई उर्फ शाह बेगम का और तीसरा खुसरो की बहन निसार बेगम का है। चौथा बाग के पश्चिमी हिस्से में तमोलन बीबी का मकबरा तो है, लेकिन उसे यहां दफनाया नहीं गया था।
-64 एकड़ क्षेत्रफल में फैला है खुसरो बाग
-1606-1607 के बीच मुगल वास्तुकार अक्का रजा ने इस मकबरे का नक्शा तैयार किया था
-06 स्तंभों पर खड़ी है खुसरोबाग की तीन मंजिा इमारत
-मकबरे पर उत्कीर्ण अभिलेख जहांगीर के प्रसिद्ध लेखाकार मीर अब्दुल मस्कीन कलाम की ओर से बेल-बूटों जैसे दिखने वाले अरबी भाषा में लिखे गए हैं।
-जहांगीर की सैरगाह के रूप में तैयार ऐतिहासिक बाग बाद में परिवार के सदस्योें की बन गया कब्रगाह
-खुसरो का मकबरा उसकी बहन निसार बेगम ने बनवाया था
- मेहराबदार दीवारों वाले प्रस्तर स्तंभों पर टिकी अष्टकोणीय आकार की इस इमारत पर गुंबद दर्शनीय हैं
-गुंबद पर गोलाकार वृत्तों और तारों का ज्यामितीय शैली में चित्रण किया गया है।
-मकबरों के कोनों पर छोटी-छोटी छतरियां बनी हैं।
-मकबरे के भीतरी हिस्से फूलों और सनोवर के वृक्षों की डिजाइन से सजाए गए हैं।
-12 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष भर पहले पीडीए ने पाथवे और फव्वारे का कराया है निर्माण
कोट-
खुसरो बाग के संरक्षण और इसे और सजाने-संवारने के लिए एएसआई की ओर से प्रस्ताव महानिदेशालय को भेजा गया है। स्वीकृति मिलने पर कार्य आरंभ कराया जाएगा। भगवत प्रसाद पांडेय, मानूमेंट निरीक्षक-एएसआई।