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प्रयागराजः फिर बढ़ा बाढ़ का खतरा, अलर्ट

Fri, 27 Sep 2019 01:18 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 27 Sep 2019 01:18 AM IST
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Prayagraj: Flood risk increased, alert
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज

बृहस्पतिवार को गंगा का जलस्तर छतनाग में स्थिर हो गया। जबकि यमुना के घटने की रफ्तार बेहद कम हो गई। गंगा-यमुना के जलस्तर में शुरू हुए उतार-चढ़ाव ने बाढ़ को लेकर फिर चिंता बढ़ा दी है। राजस्थान के कोटा और एमपी के माताटीला बांधों से फिर पानी छोड़े जाने की खबर है। इस बीच मौसम विभाग ने पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के अलावा पश्चिमी यूपी व तराई इलाकों में भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। इससे पहले 24 घंटे से कहीं तेज तो कहीं धीमी गति से लगातार हो रही बारिश ने कछारी इलाकों में मुसीबतें बढ़ा दी हैं। सिंचाई विभाग के अभियंताओं के अनुसार बारिश और बांधों से छोड़े गए पानी की वजह से अभी बाढ़ से राहत के आसार नहीं दिख रहे हैं। 



गंगा-यमुना के जलस्तर के ट्रेंड में बृहस्पतिवार को दिन भर उतार-चढ़ाव बना रहा। सुबह छह बजे दोनों नदियों का जलस्तर स्थिर हो गया। आठ बजे गंगा स्थिर रही, जबकि यमुना के जलस्तर में एक सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से घटाव होने लगा। इसी तरह दिन के 10 बजे फिर गंगा पांच सेमी प्रति घंटा और यमुना एक सेमी प्रति घंटा की दर से घटने लगी। इसके बाद शाम छह बजे तक फिर दबाव बढ़ गया और दोनों नदियां एक-एक सेमी प्रति घंटा की दर से घटने लगीं। छतनाग में गंगा का जलस्तर शाम को स्थिर हो गया। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड के अभियंताओं के अनुसार राजस्थान के कोटा और एमपी के माताटीला बांधों से पानी छोड़ा गया है।

इसके साथ ही एमपी, पश्चिमी यूपी के अलावा तराई क्षेत्रों में भारी बारिश की आशंका है। पिछले तीन दिनों से जल स्तर घटने की वजह से बाढ़ प्रभावित कछारी इलाके की अभी 40 फीसदी आबादी पानी से घिरी हुई है। वहां गलियों से लेकर घरों तक बाढ़ का पानी लगा हुआ है। साथ ही पखवारे भर से लगातार पानी में डूबे घरों की दीवारों के भी कमजोर होने को लेकर चिंता लोगों को सताने लगी है। कहा जा रहा है कि जल स्तर केदबाव का यही हाल बना रहा तो बाढ़ प्रभावित इलाकों में डूबे घरों को अब नुकसान बी पहुंच सकता है।

गंगा का जलस्तर शाम छह बजे
--------------------------------
फाफामऊ -83.51मीटर
छतनाग -  82.58 मीटर
यमुना का जलस्तर
नैनी - 83.30 मीटर
-------------------------
खतरे का निशान- 84.73 मीटर

Prayagraj: Flood risk increased, alert
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज

महापौर ने पूछा बाढ़ पीड़ितों का हाल

प्रयागराज। करेलाबाद क्षेत्र में बृहस्पतिवार को महापौर ने बाढ़ पीड़ितों का हाल पूछा। प्रभावित मोहल्लों का निरीक्षण किया। उन्हें कहीं गंदगी मिली तो कहीं जलजमाव, लेकिन नगर निगम कर्मी काम करते दिखे। उन्होंने लोगों को दिक्कत और संक्रामक रोगों से बचाने के लिए अफसरों को सफाई के साथ कीटनाशक छिड़काव के निर्देश भी दिए। 

महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने करेलाबाग बालू मंडी से निरीक्षण शुरू किया। यहां बाढ़ का पानी उतरा था, लेकिन सड़कें गलियां क्षतिग्रस्त पाई गईं। खाली भूखंडों में गंदा पानी भरा था। निषाद पार्क के बगल नाला मलबे और सिल्ट से पटा था। नाले से निकाली गई गंदगी-कूड़ा फैला था। स्थानीय लोगों ने नाले के गंदे पानी की निकासी न होने की शिकायत करते हुए एसटीपी से जोड़ने की मांग उठाई। वहीं करेलाबाग मस्जिद के पास बस्ती में पानी भरा मिला। यहां पंप से पानी निकाला जा रहा था। महापौर ने सड़क-गलियों की मरम्मत कराने, मैलाथियान, नुआन, ब्लीचिंग पाउडर और चूना छिड़काव के निर्देश दिए। इस मौके पर स्थानीय पार्षद फजल खान, मोइनउद्दीन, ऋषि निषाद के साथ जोनल अधिकारी और नगर निगम के विभिन्न विभागों के अफसर मौजूद रहे।

Prayagraj: Flood risk increased, alert
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 15 दिनाें तक हो छिड़काव

प्रयागराज। प्रशासन का बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अब गंदगी तथा बीमारियों से निपटने पर जोर है। इसके तहत जहां से पानी निकल गया है उन क्षेत्रों में15 दिनों तक लगातार कीटनाशक का छिड़काव किया जाएगा। डीएम भानु चंद्र गोस्वामी ने बृहस्पतिवार को बैठक में छिड़काव तथा सफाई की बाबत विस्तार से चर्चा की तथा अफसरों को जरूरी निर्देश दिए। उन्होंने अफसरों की जवाबदेही भी तय की। शहरी क्षेत्र में सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की होगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में एडीएम प्रशासन सफाई व्यवस्था पर निगरानी रखेंगे। डीएम ने कहा कि  राहत केंद्रों पर अब भी जो लोग रूके हुए हैं, उनके खाने-पीने की व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे। बाढ़ पीड़ितों की परेशानी जल्द से जल्द दूर हो इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य, बिजली, लोक निर्माण तथा अन्य विभाग के अफसरों को जरूरी निर्देश दिए।

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Prayagraj: Flood risk increased, alert
prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज

पानी में डूबे सैकड़ों मकानों की नींव हिली

प्रयागराज। बाढ़ के पानी में डूबे सैकड़ों मकानों की नींव हिल गई है। अब तक दो निर्माणाधीन समेत चार मकान गिर चुके हैं, अन्य पर भी खतरा मंडरा रहा है। किसी घर के पिलर टेढे़ हो गए हैं तो कहीं दीवारों से प्लास्टर छोड़ रहा है। कई दो मंजिला मकानों की पहली मंजिल पानी में डूबी है और दूसरी पर नमी के कारण ईंटों में लोना पकड़ रहा है। तकनीकी जानकारों के मुताबिक ऐसे घरों में फिलहाल रहना खतरे से खाली नहीं है। 

शहर के दारागंज, बक्शी कला, सलोरी, छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा, बेली, ढरहरिया, द्रौपदी घाट समेत अन्य इलाकों में हजारों घरों में पानी भरा। इनमें करीब एक हजार मकान ऐसे भी हैं, जो पूरी तरह पानी में डूब गए। एक मंजिल वाले कुछ घरों की सिर्फ छत दिख रही थी। वहीं दो मंजिला मकानों को लोग छोड़कर कहीं और चले गए। अब तीन दिन से पानी कम होने लगा तो लोग लौटने लगे, लेकिन कछार के सैकड़ों मकानों में अभी पानी लगा है। आर्थिक नुकसान के साथ ऐसे मकानों में रहना जोखिम भरा होगा।

जानकारों के मुताबिक  कछारी इलाकों में मिट्टी की पटाई करा कर बनाए गए घरों में पानी का भरना नींव को कमजोर करता है। कुछ इलाकों में कूड़े की पटान के बाद मिट्टी डालकर घर बनाए गए। 12 से 15 दिन तक पानी डूबे ऐसे मकानों की नींव हिलना खतरा बढ़ा रहा है। पानी निकलने के तेज धूप निकले तो एक महीने बाद परीक्षण के बाद ही वहां रहने के बारे में सोचना चाहिए। 

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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज

आफत बनकर बरसी बारिश, बढ़ीं दुश्वारियां

प्रयागराज। शहर के कछारी मोहल्लों में बाढ़ का पानी उतरने के बाद घर लौटे लोगों पर बृहस्पतिवार को बारिश आफत बनकर बरसी। तेज हवा और झमाझम बारिश से साफ सफाई पर पानी फिर गया। नालियां उफना गईं। हर तरफ कचरा और कीचड़ ही फैल गया। बारिश और नदियों का जल स्थिर होने से फिलहाल बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। 

गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ने के साथ ही बक्शी बांध और मोरी गेट स्लूज गेट और फाटक बंद कर दिए गए थे। नालों का पानी पंप के सहारे निकला जा रहा था कि तेज बारिश से जलभराव मुसीबत बन गया। राजापुर, गंगानगर, ऊंचवागढ़ी, छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा, ढरहरिया, सलोरी, करेलाबाग समेत अन्य क्षेत्रों में नालियों के उफनाने से हर तरफ गंदगी फैल गई। 

बाढ़ प्रभावित इलाकों में एक बार फिर कीचड़ और कचरा ही दिख रहा है। कहीं नालियां का पानी तो कहीं बारिश का पानी भर गया है। बारिश के कारण राहत और सफाई कार्य भी जैसे तैसे किया गया। गलियों में भरे पानी में जलकुंभी पट गई है। गंदे पानी में बारिश का मेल दिक्कत बढ़ाने वाला रहा। 
गंगानगर में दस दिन बाद घर लौटीं गृहणी संगीता और श्वेता ने बताया कि मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं।

नीचे के कमरों में सफाई करना बेकार हो गया। बारिश ने परेशानी बढ़ा दी है। हम ही नहीं मोहल्ले के सैकड़ों लोग बरसात का पानी भरने से घबराए हैं।
छोटा बघाड़ा में रहने वाले सत्येंद्र सिंह के मुताबिक एक महीने का किराया फालतू चला गया। गंदगी, कीचड़ के साथ मच्छरों की भरमार है। कमरे में बैठना मुश्किल हो रहा है। शाम चार बजे वह तीन दोस्तों के साथ गंदे पानी को देखकर कभी नगर निगम कोसते तो कभी आसमान की तरफ देखकर कहते, भगवान अब बस करो। ये मामले तो बानगी भर हैं, बाढ़ प्रभावित इलाकों में बारिश और जलभराव ने हजारों लोगों की दुश्वारियां बढ़ा दी हैं। 

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