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प्रयागराजः गंगा-यमुना खतरे के निशान से नीचे, तीन दिन बाद राहत की उम्मीद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 24 Sep 2019 12:51 AM IST
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- फोटो : प्रयागराज
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सोमवार की रात 12 बजे तक गंगा-यमुना दोनों खतरे केनिशान से नीचे आ गईं। जलस्तर तेजी से घटने के बावजूद तटवर्ती इलाकों में तीन लाख से अधिक लोग चौतरफा मुसीबतों की बाढ़ से घिरे हुए हैं। उधर, सिंचाई बाढ़ खंड के अभियंताओं ने अगले तीन दिन के भीतर बाढ़ का पानी कछारी इलाके की बस्तियों से निकलने का अनुमान व्यक्त किया है।
गंगा-यमुना का जलस्तर घटने की दर सोमवार को बढ़ गई। भोर में 3.50 मीटर प्रति घंटे घटाव की रफ्तार दोपहर में बढ़कर पांच सेमी प्रति घंटा हो गई। इससे देर रात आठ बजे तक नैनी में यमुना खतरे के निशान से नीचे आ गई, जबकि, गंगा में उफान बना रहा। सिंचाई विभाग के अभियंताओं के अनुसार कई इलाकों में बारिश के बावजूद फिलहाल चंबल, केन या बेतवा से अभी तक बड़ी जलराशि यमुना छोड़े जाने की जानकारी नहीं है।
अगर कुछ पानी एमपी, राजस्थान से छोड़ा भी जाता है, तो अब यमुना के जलस्तर पर बहुत असर नहीं डाल सकेगा। मंगलवार तक दोनों नदियों का जलस्तर घटने की दर में और वृद्धि होने की बात कही जा रही है। हमीरपुर में और बांदा में यमुना का जलस्तर तेजी से घट रहा है, जबकि यहां टोंस के दवाब के चलते गंगा के घटने की गति तेज नहीं हो पा रही है।
कोट
अब बाढ़ की चिंता नहीं रह गई है। चंबल, केन और बेतवा से बड़ी जलराशि यमुना में छोड़े जाने की आशंका न के बराबर है। ऊपर जल दबाव नहीं रह गया है। गंगा-यमुना का जल स्तर जल्द ही सामान्य स्थिति में आ सकता है।
बृजेश सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई बाढ़ खंड, प्रयागराज
गंगा का जलस्तर रात आठ बजे
फाफामऊ -84.80मीटर
छतनाग - 83.94 मीटर
यमुना का जलस्तर
नैनी - 84.55 मीटर
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खतरे का निशान- 84.73 मीटर
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बाढ़ से हुए नुकसान का अब आंकलन करेगा प्रशासन
प्रयागराज। प्रयागराज जिले में आई बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही उससे हुए नुकसान का आंकलन अब जिला प्रशासन द्वारा किया जाएगा। इसके लिए डीएम प्रयागराज भानु चंद्र गोस्वामी की ओर से एडीए वीसी, चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी, नगर आयुक्त नगर निगम, चीफ इंजीनियर विद्युत विभाग, जीएम जलकल विभाग, सीएमओ, जिला पंचायत राज अधिकारी, सभी एसडीएम को पत्र भेजा गया। पत्र के माध्यम से कहा गया कि बाढ़ की वजह से क्षतिग्रस्त हुई सड़क, पुलिया आदि की सूची तैयारी कर ली जाए। ताकि राष्ट्रीय आपदा मोचन फंड से धनराशि की मांग की जा सके। उन्होंने विद्युत विभाग से बाढ़ की वजह से क्षतिग्रस्त पोल, तार, ट्रांसफार्मर की सूची मांगी है। जलकल विभाग से क्षतिग्रस्त पाइप लाइनों की मरम्मत, क्लोरीन दवा का वितरण, सीएमओ एवं जिला पंचायत राज अधिकारी से प्रभावित इलाकों में महामारी फैलने की आशंका के मद्देनजर दवाओं का छिड़काव, टीकाकरण करने का निर्देश दिया है। एसडीएम बारा, करछना, फूलपुर, मेजा के बाढ़ प्रभावित गांवों में विद्युत आपूर्ति बहाल होने तक प्रत्येक परिवार को पांच-पांच लीटर मिट्टी का तेल प्राथमिकता के आधार पर नि:शुल्क उपलब्ध कराने को कहा है। नगर आयुक्त को निर्देश दिया है कि शहर के प्रभावित इलाकों में साफ सफाई का बेहतर प्रबंध किया जाए। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सफाई कर्मी भी तैनात किए जाएं।
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गंगा के कछार में बांध निर्माण का प्रस्ताव खारिज
प्रयागराज। गंगा के फ्लड जोन में बसी पांच लाख से अधिक की आबादी को बाढ़ की आपदा से बचाने के लिए तैयार किया गया बांध निर्माण का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। ऐसे में नदी की तलहटी में तेजी से विस्तार ले रही आबादी को आने वाले समय में बाढ़ के दौरान विस्थापन की समस्या से मुक्ति नहीं मिल सकती। तटवर्ती बस्तियों, कॉलोनियों में बाढ़ रोकने के लिए बांध निर्माण का प्रस्ताव सिंचाई विभाग ने शासन को भेजा था। केंद्रीय जल आयोग और गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के विशेषज्ञों की कमेटी की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में इसकी उपयोगिता को रद्द करते हुए प्रस्ताव को अव्यवहारिक करार दे दिया गया है। ऐसे में अब वहां बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए बांध निर्माण नहीं कराया जा सकेगा।
गंगा-यमुना में आई बाढ़ से दो दर्जन से अधिक बस्तियों, कॉलोनियों और छिटफुट हजारों भवनों के जलमग्न होने के बाद एक बार फिर वहां बांध निर्माण को लेकर आवाज उठाई जा रही थी। इसके बाद सिंचाई बाढ़ खंड विंध्याचल मंडल केमुख्य अभियंता डीके मिश्रा ने अभियंताओं की टीम के साथ गंगा किनारे के बाढ़ग्रस्त इलाकों का सर्वेक्षण कर स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद अभियंताओं ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने बताया कि वर्ष 2013 व 2016 की बाढ़ के बाद से ही वहां प्रभावित बस्तियों को बचाने के लिए बांध निर्माण की वकालत शुरू कर दी गई थी। कुछ जन प्रतिनिधियों ने भी विधान सभा में वहां बाढ़ की समस्या से निबटने के लिए बांध निर्माण कराने का मुद्दा उठाया था।
इसके बाद सिंचाई विभाग की ओर से फाफामऊ से शिवकुटी-संगम के बीच बांध निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा तो गया, लेकिन जब इसकी उपयोगिता को लेकर सर्वेक्षण कराया गया तो रिपोर्ट विपरीत आ गई। केंद्रीय जल आयोग और गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग की संयुक्त टीमों ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि वहां बांध का निर्माण कराया ही नहीं जा सकता। बांध हमेशा नदी तट से निर्धारित की गई एक दूरी पर कराया जाता है न कि नदी तट के भीतर। फाफामऊ से संगम के बीच गंगा किनारे लोग गंगा की तलहटी के फ्लड जोन में ही बसे हैं। ऐसे में अगर वहां बांध का निर्माण करा भी दिया जाए तो गंगा आसपास से नया किनारा निर्धारित कर अपने बहाव की दूसरी दिशा तय कर सकती है। ऐसे में उस बस्ती के लिए और भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
प्रयागराज में गंगा किनारे बाढ़ग्रस्त होने वाली बड़ी आबादी के लिए बांध निर्माण का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग और केंद्रीय जल आयोग की कमेटी अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट में वहां बांध की उपयोगिता को खारिज कर चुकी है। नदी तट के भीतर बांध निर्माण संभव नहीं है। डीके मिश्रा, मुख्य अभियंता, सिंचाई बाढ़ खंड, विंध्याचल मंडल।
गंगा के फ्लड जोन में बने सभी मकान दो या तीन मंजिला
प्रयागराज। सिंचाई विभाग के विशेषज्ञों ने गंगा की तलहटी में घर बनाने वालों पर तल्ख टिप्पणी भी की है। उनका कहना है कि फाफामऊ कछार, बेली कछार, नेवादा, नागवासुकि मंदिर से बघाड़ा, सलोरी, शिवकुटी, शंकरघाट, रसूलाबाद, मेहदौरी, गंगानगर राजापुर तक गंगा के फ्लड जोन में जितने भी मकान बने हैं, सभी दो या तीन मंजिला ही निर्मित कराए गए हैं। अभियंताओं का मानना है कि ऐसा इसलिए किया गया है कि बाढ़ के दौरान वो लोग पहली या दूसरी मंजिल पर शिफ्ट हो जाएंगे और हफ्ते-पखवारे भर के बाद बाढ़ का पानी खिसकने पर वह फिर अपने घरों में आ आएंगे।
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अशोक नगर पत्रकार कालोनी में बाढ़ के पानी में कमी के बावजूद मकान पानी में डूबा होने के कारण कुछ ऐसे नाव से सफर करते पीड़ित परिवार।
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सलोरी में बाढ़ का पानी कम होने के बाद लोग खुद भी सफाई कर रहे।
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