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प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर से भगवान राम ने दिया था विश्व बंधुत्व का संदेश

Sun, 23 Feb 2020 02:38 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 23 Feb 2020 02:38 PM IST
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Lord Rama gave the message of universal brotherhood at Shringverpur in Prayagraj
prayagraj news - फोटो : prayagraj

सीता सचिव सहित दोउ भाई/ शृंगवेरपुर पहुंचे जाई/ अनुज सहित सिर जटा बनाए/ देखि सुमंत्र नयन जल छाए/ केवट कीन्ह बहुत सेवकाई/ सो जामिनि सिंगरौर गंवाई/ सई तीर बसि चले बिहाने...। तुलसी की राम चरित मानस की चौपाइयों के अलावा कालिदास के ‘रघुवंश’ में प्रभु श्रीराम व निषादराज की मिलनस्थली के रूप में उल्लिखित शृंगवेरपुर की भव्यता आज भी कम नहीं हुई है।

 

Lord Rama gave the message of universal brotherhood at Shringverpur in Prayagraj
prayagraj news - फोटो : prayagraj

मान्यता है कि भगवान पुत्र प्राप्ति की कामना से दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ को शृंगी ऋषि ने कभी इसी जगह कराया था। ऐसे में सनातनधर्मियों के लिए इस तीर्थ की महिमा अयोध्या से कम नहीं कही जा सकती। अब यहां निषादराज और राम के मिलन की प्रतिमा स्थापित करने की योजना है, ताकि पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके।

Lord Rama gave the message of universal brotherhood at Shringverpur in Prayagraj
prayagraj news - फोटो : prayagraj

गंगा तट पर स्थित यह तीर्थ श्रृंगी ऋषि और माता शांता की साधनास्थली के रूप में भी जाना जाता है। वाल्मीकि रामायण और अन्य ग्रंथों के मुताबिक दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए श्रृंगी ऋषि के आचार्यत्व में ही पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था। तब प्रभुराम समेत चार पुत्रों की उन्हें प्राप्ति हुई थी। इसके बाद दशरथ ने श्रृंगी ऋषि से ही अपनी पुत्री शांता का विवाह भी किया था।

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Lord Rama gave the message of universal brotherhood at Shringverpur in Prayagraj
prayagraj news - फोटो : prayagraj

पर्यटन विभाग की ओर से कराए गए श्रृंगवेरपुर के ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक अध्ययन के अनुसार श्रृंगवेरपुर धाम से ही भगवान राम ने सीता व लक्ष्मण के साथ तपस्वी वेश में 14 वर्ष के वनवास के लिए प्रस्थान किया था। तब इसी जगह भगवान राम ने निषादराज का आतिथ्य स्वीकार करते हुए उन्हें गले लगाकर छुआछूत व भेदभाव मिटाकर सामाजिक एकता का संदेश भी दिया था। ऐसे कई तीर्थ प्रयागराज में विकास की बाट जोह रहे हैं। नागवासुकि तीर्थ भी उनमें से एक है। 

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Lord Rama gave the message of universal brotherhood at Shringverpur in Prayagraj
prayagraj news - फोटो : prayagraj

भोगवती तीर्थ के रूप में नागवासुकि धाम की महिमा 

दशाश्वमेध घाट के पास स्थित नागवासुकि धाम को भोगवती तीर्थ के रूप में जाना जाता है।  पद्मपुराण के मुताबिक ब्रह्मा के कमंडल से निकलकर गंगा पृथ्वी लोक पर आने से पहले नागवासुकि के फन पर गिरी थीं।  वर्ष 1739 में नागपुर के राजा रघुजी भोसले ने आक्रमण कर इस सूबे के प्रधान शासक शुजा खान को हराकर मार डाला था। तब मराठा राजा के पुरोहित श्रीधर ने जीर्ण शीर्ण रहे नागवासुकि मंदिर का नए सिरे से निर्माण कराया था।

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