प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों गंगा जल से भरे परात में पांव पखारे जाने के वर्ष भर बाद भी कुंभ के पांच स्वच्छाग्रहियों का मुश्किलों से नाता खत्म नहीं हुआ है। सरकारी आवास और नौकरी तो दूर, अब तक उनकी पगार भी नहीं बढ़ सकी है। फिर भी, अभाव व संघर्षों के बीच वे अब भी उसी मेले का हिस्सा बने हुए हैं। अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान दो महीने पहले परेड से उनको खदेड़ दिया गया था, लेकिन इन सबके बावजूद उनकी पीएम से आस अभी टूटी नहीं है। अब जबकि मोदी एक बार फिर प्रयागराज आने वाले हैं, उनमें उम्मीद जगी है कि उनकी सुध ली जाएगी और दिन बहुरेंगे।
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कुंभ में जिन पांच स्वच्छाग्रहियों के पांव पखारकर पीएम ने विश्व पटल पर मानवता का संदेश दिया था, उनमें से चार प्रयागराज में ही संगम क्षेत्र की सफाई कर रहे हैं। प्रयागराज मेला प्राधिकरण के तहत इनको तीन सौ रुपये प्रतिदिन की पगार पर रखा गया है। इतना ही पारिश्रमिक उनको कुंभ में भी दिया जा रहा था।
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बांदा जिले के कमासिन ब्लाक स्थित नारायणपुर गांव के नरेश चमके सफाई सुपरावइजर के रूप में मेला प्राधिकरण में रखे गए हैं। तीन पुत्र और दो पुत्रियों के पिता नरेश ने शनिवार को अमर उजाला से बातचीत में अपनी पीड़ा जाहिर की। बताया कि कुंभ खत्म होने के कुछ दिन बाद ही कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने उसको बुलवा लिया था। तब मेलाधिकारी ने भरोसा दिलाया था कि उन सभी पांचों स्वच्छाग्रहियों को अवसर आने पर नियमित कर दिया जाएगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो सका है। जो दिहाड़ी मिल रही थी, उसे भी नहीं बढ़ाया जा सका।
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सरकारी आवास दिलाने का भी वादा किया गया था, लेकिन परेड में टेंट के नीचे भी नहीं रहने दिया जा रहा है। इसी तरह बांदा जिले के ही बबेरू गांव निवासी प्यारे लाल भी परेड में ही शरण लिए हुए हैं। वह कहते हैं कि पीएम का नाम बहुत है। काम भी वो बड़े-बड़े कर रहे हैं। ऐसे में अभी भले ही उनके लिए कुछ नहीं कर सके, लेकिन एक न एक दिन वादा जरूर पूरा होगा। इसी तरह छत्तीसगढ़ की ज्योति महतो व चौबी देवी भी संगम क्षेत्र की सफाई में लगी हैं। ज्योति व चौबी भी पीएम से आस लगाए बैठी हैं।
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ग्रेडर नोएडा में रह रहे संभल जिले के निवासी होरीलाल को कुछ न मिलने पर घर से बाहर तक के लोग ताने मारते हैं। फिर भी पीएम के कामकाज से खुश हैं, वो कहते हैं कि प्रधानमंत्री जो कहते हैं, उसे पूरा किए बिना नहीं छोड़ते।