संगम तट पर रविवार को एक बार फिर आस्था, विश्वास और भक्ति की लहरें एकाकार हुईं। भक्ति के सागर में भावों का जन प्रवाह उठा तो उठता ही गया। कहीं बाजे गाजे के साथ संतों का कारवां चला तो कहीं भक्तों के भाव की धारा फूटती रही। प्रयागराज कुंभ के तीसरे स्नान पर्व वसंत पंचमी पर अरैल से फाफामऊ के बीच 40 घाटों पर पुण्य की डुबकी लगाने के लिए एक समान सैलाब उमड़ा। हेलीकॉप्टर से श्रद्धा के फूल बरसते रहे। कुंभ मेला प्रशासन के अनुसार शाम तक 1.70करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में पुण्य की डुबकी लगाई।
मध्यरात्रि के बाद ही हर हर महादेव और जयश्रीराम के गगनभेदी जयघोष के साथ वसंत पंचमी का स्नान शुरू हो गया। अखाड़ों के शाही स्नान के चलते पांच पांटून पुलों पर शनिवार की रात 12 बजे से यातायात रोके जाने की वजह से नागवासुकि, बख्शीबांध, शिवकुटी से लगे घाटों पर भीड़ का दबाव बढ़ गया। गंगा पार झूंसी, बदरा सोनौटी और अरैल के घाटों पर भी भारी भीड़ का जमावड़ा होने लगा। सबके मन में संगम तट पर पहुंचने की आतुरता थी। भोर में चाहे दारागंज वाली सड़क हो या फिर सिविल लाइंस-बैरहना मार्ग।
काली सड़क हो या लाल सड़क, सभी रास्तों पर रेला उमडऩे लगा। बेनी बांध के नीचे काली त्रिवणी मार्ग और अक्षयवट मार्ग पर भजनानंदियों की टोलियां डफली लेकर राम नाम के भजन में झूम रही थीं, तो दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, बिहार के अलावा अन्य प्रदेशों से आए श्रद्धालुओं के समूह हाथों में लाल, हरी, नीली ध्वजाएं लिए हर हर महादेव का जयकारा लगाते आगे बढ़ रहे थे। आठ से 10 किमी तक की लंबी दूरी तय करने के बाद भी पांव लपकते हुए बढ़ते रहे। कोई दादी को संभाल रहा था तो कोई चाची, मामी को।
बच्चों को कंधे पर या फिर कमर में फेंटा के सहारे बांध कर भी महिलाएं चलती रहीं। अमृतमयी कुंभ में डुबकी लगाकर जीवन को धन्य बनाने और पुण्य कमाने की चाह हर किसी के चेहरे पर कुछ ऐसी ही दिख रही थी। संगम तट पर जन सैलाब के बीच डुबकी लगाने में किसी के कपड़े छूटे, किसी की गठरी खो गई तो किसी का पर्स ढूंढते -ढूंढते नहीं मिला। सैकड़ों की तादाद में लोग बिछड़ते, मिलते रहे।
तीसरे और अंतिम शाही स्नान पर नागाओं ने भांजी लाठी-तलवार-त्रिशूल
वसंत पंचमी के स्नान पर्व पर शस्त्र प्रदर्शन पर रोक के बावजूद नागाओं ने रेती पर लाठी, तलवार के खेल जमकर खेले। भस्मी-भभूत पोतकर नागाओं ने शोभायात्राओं के आगे खुलकर शस्त्रप्रदर्शन किया। इस दौरान नागाओं की झलक पाने की होड़ मची रही।