वसंत पंचमी पर अंतिम शाही स्नान के बाद ‘कढ़ी-पकौड़ा बेसन का, रस्ता पकड़ो टेशन का’ की परंपरा फिर पूरी होगी। अखाड़ों के शाही स्नान के साथ ही आरंभ हुई यह परंपरा अब तक जारी है। अखाड़ों की छावनी में भले ही रोज छप्पन व्यंजनों का भोग लगता है लेकिन तीसरे शाही स्नानपर्व वसंत पंचमी पर डुबकी लगाने के बाद तो बस ‘कढ़ी-पकौड़ी’ की ही बारी रहेगी।
शैव अखाड़े वसंत पर डुबकी के बाद काशी के लिए विदा हो जाएंगे क्योंकि उनका कुंभ पर्व काशी में ही पूरा होगा। लेकिन, रवानगी से पहले संन्यासियों के अखाड़ों की छावनी में ‘कढ़ी-पकौड़ी’ का भोग प्रसाद बनेगा जिसे लेकर ही संन्यासी अखाड़े काशी की राह पकड़ेंगे। इसके तहत पंचदशनाम जूना अखाड़ा, आवाहन अखाड़ा, पंचायती अखाड़ी श्री निरंजनी, तपोनिधि आनंद अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा, अटल अखाड़े के संत अपने देवता संग काशी कूच करके होली तक वहीं रुकेंगे।
निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी कहते हैं, पंचमी पर्व के बाद अखाड़ों की तनियां भी ढीली कर दी जाएंगी। अखाड़ों की पूरी कैबिनेट बदलेगी। अष्टकौशल सहित कारबारियों का भी चुनाव होगा। फिर नई कमान काशी की राह पर ले चलेगी। वहां पहुंचकर सभी होली तक रुकेंगे। इससे पहले महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन करके आशीर्वाद लेंगे। पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने भी जोड़ा, कुंभ पर्व के मेले को तो बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के साथ पूर्णता मिलेगी। सभी यहां से ‘कढ़ी-पकौड़ी’ खाकर काशी के लिए रवाना होंगे।
देवताओं के साथ काशी की पंचकोसी परिक्रमा की जाएगी, जिसमें काशी के सभी देवी-देवताओं का दर्शन पूजन होगा। बाबा विश्वनाथ के दर्शन सहित जलाभिषेक, पूजन के बाद सर्वमंगल के लिए आशीष मांगा जाएगा। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा वसंत के बाद भले ही संगम की रेती पर ध्वजा उतारी जाएगी लेकिन काशी में होली के साथ ही कुंभ पर्व को पूर्णता मिलेगी। वहीं बैरागियों की परंपरा संन्यासियों से इतर है।
पंच निर्मोही अनी अखाड़े के श्रीमहंत राजेंद्र दास बोले, वसंत पंचमी की डुबकी के बाद बैरागियों का कुंभ पर्व पूरा हो जाएगा। इसके बाद सभी अपने-अपने खालसों, स्थान के लिए गंगा र्माई और हनुमान जी का ध्यान करके विदा हो जाएंगे लेकिन इस बीच ‘कढ़ी पकौड़ी’ तो बनेगी ही। निर्वानी अनी के श्रीमहंत धर्मदास ने कहा, ‘कढ़ी-पकौड़ी’ विदा के पूर्व का प्रसाद है, सो इसके बाद ही टेशन यानी अपने-अपने स्थान के लिए स्टेशन की राह पकड़ी जाएगी।