सात समंदर पार रूस में भगवान राम और सीता की लाइफ स्टाइल देखते रह जाएंगे। मास्को में लीला के मंचों पर तपस्वी वेश में वन जाने वाले और धनुष-वाण से रणभूमि में रावण से युद्ध करने वाले रुसी राम निराले शौक हैं। वहीं, नंगे पैर राम के साथ अयोध्या से लंका तक का सफर तय करने वाली सीता को नाइट क्लबों और महंगी पार्टियों में जाना पसंद है। फिलहाल ये दोनों कलाकार राम और सीता के चरित्र को खुद में उतारने और जीने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, ताकि उन्हें दुनिया में एक नई पहचान मिल सके।
कुंभ में रामलीला की प्रस्तुति के लिए मास्को से आए पद्मश्री गेनादी पेचनीकोव मेखाइलोविच स्मृति दिशा रामलीला के इन दोनों प्रमुख पात्रों ने सोमवार को अमर उजाला से बातचीत में अपनी भावनाओं को खुलकर साझा किया। मास्को से हजार किमी दूर ब्रुयातिया शहर की रहने वाली वोल्गा इस लीला में सीता की भूमिका निभा रही हैं। वोल्गा अभी रूस में परफार्मिंग आट्र्स में थर्ड ईयर की छात्रा हैं।
वह आगे चलकर इसी क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाना चाहती हैं। शाकाहारी जीवन जीने वाली वोल्गा को नाइट क्लबों और महंगी पार्टियों में जाने का शौक है। वह बताती हैं कि अभिनय और रिहर्सल से फुर्सत मिलने पर वह दोस्तों के साथ या फिर अकेले भी नाइट क्लबों में जाती हैं। उन्हें नृत्य का भी शौक है। वह क्लबों में डांस कर खुद को तनाव मुक्त महसूस करती हैं। उनका कहना है कि अभी उनका जीवन नदी के बहाव की तरह है। फिलहाल वह रूस में भारतीय नारी के आदर्श रूप सीता के रूप में लोकप्रियता हासिल करना चाहती हैं।
इसी तरह रूसी राम एफगेनी की जिंदगी बहुत की निराली है। वह सुबह उठकर बर्फीले पानी के साथ खेलना और नहाना पसंद करते हैं। सेहत के प्रति बेहद गंभीर रूसी राम रोज घंटों जिम में पसीना बहाते हैं। वह जिम न जाएं तो उनको सबकुछ अधूरा सा लगता है। कार चलाना, फुटबाल खेलना उनकी आदत में शामिल है। वह भी चाहते हैं कि आन वाले समय में वह दुनिया में रूसी राम के रूप में जाने जाएं।
विदेशी हनुमान ने आठ महीने में सीखा राम के चरणों में लेटना
रूस में भी एक रामभक्त हनुमान संकट मोचन की भूमिका निभा रहे हैं। दिशा रामलीला मंडली के निदेशक रामेश्वर सिंह ने सौ से अधिक युवकों में से मास्को के विक्टर का हनुमान के रूप में चयन किया। विक्टर का कहना है कि राम सीता के सेवक के रूप में खुद को तैयार करने में उनको वक्त लगा। लीला मंडली में शामिल होने के बाद आठ महीने में उनको राम के चरणों में लेटना और प्रणाम करना सिखाया गया। जब वह गदा लेकर राम के पीछे चलते हैं तो एक अलग ऊर्जा का एहसास होता है। यह विदेशी रामलीला भारत और रूस के सांस्कृतिक संबंधों में सेतु का काम कर रही है। इससे रूस के कलाकारों के लिए भारत के नए द्वार खुले हैं। विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह इस कोशिश को भविष्य के लिए सुखद बता चुके हैं।