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कुंभ 2019: कुंभ में हथियारों से लैस बाबा, रामनाम की माला की जगह हाथों में असलहे, देखें तस्वीरें

Sun, 20 Jan 2019 01:25 AM IST
shubham अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज
अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: shubham Updated Sun, 20 Jan 2019 01:25 AM IST
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Kumbh Mela 2019:Baba Equipped with weapon in kumbh mela
Baba with Weapon

विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक समागम के कुंभ में पहुंचे कई बाबाओं के हाथों में दंड कमंडल, रामनाम की माला की जगह हथियारों ने ले ली है। संगम तट पर ज्ञान-ध्यान, जप-तप, यज्ञ-भजन के साथ संन्यासियों के असलहों के शौक देखते रह जाएंगे। शिविरों में असलहाधारी बाबाओं का संगम कम दिलचस्प नहीं है। दंड-कमंडल की जगह कमर में कारतूस की पेटी, रिवाल्वर से लैस बाबा दर्शन दे रहे हैं। किसी के हाथ में दो नाली बंदूक है तो किसी के हाथ में राइफल और पिस्तौल। ऐसे असलहाधारी बाबाओं के दर्शन और आशीर्वाद के लिए शिविरों में भीड़ लग रही है।

Kumbh Mela 2019:Baba Equipped with weapon in kumbh mela
Baba with Weapon

शंभू श्री पंचदशनाम अग्नि अखाड़े के शिविर में हथियारों से लैस कई बाबा हैं। दिल्ली से आए श्री महंत अद्वैत हरि चैतन्य ब्रह्मचारी गेरुआ वस्त्र में कमर में कारतूस की पेटी बांधकर और रिवाल्वर लटकाकर दर्शन देते हैं। शनिवार को काफी आग्रह के बाद अमर उजाला से उन्होंने संन्यास ग्रहण करने से लेकर अपने जीवन के संघर्षों को साझा किया। कानपुर देहात में पैदा हुए अद्वैत चैतन्य बताते हैं कि महज 12 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने घर का त्याग कर दिया था। इसके बाद वह मुंबई के उल्लास नगर स्थित माटूंगा मठ में शिव चैतन्य ब्रह्मचारी के संपर्क में आए। वहीं आश्रम में रहकर उन्होंने संन्यास की दीक्षा ली और वेद अध्ययन शुरू किया। कुछ दिन गुजरात और सूरत में भी उन्होंने संस्कृत की पढ़ाई की। शास्त्री पास करने के बाद 1975में पंजाब चले गए। वहां शीतला मंदिर बंगा में रहकर वह सनातनी धर्म-संस्कृति का प्रचार करने के साथ ही शिव सैनिकों को वेद मंत्रों से अभिमंत्रित त्रिशूल का वितरण कर रहे थे। तब इसका खालिस्तानी आतंकवादियों ने विरोध किया था।

Kumbh Mela 2019:Baba Equipped with weapon in kumbh mela
Baba with Weapon

शीतला मदिर में ही आठ मई 1987 की रात तीन आतंकवादियों ने उनको घेरकर गोलियां बरसानी शुरू कर दी। 12 गोली सिर में और छह हाथ में लगी थी। उनको मरा हुआ जानकर आतंकवादी चले गए थे। बाबा ने बताया कि उस रात उनको कुछ शिष्यों ने सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। आपरेशन कर गोलियां निकाली गईं और 13 दिन बाद उनको होश आ गया। इसके कुछ दिन बाद आतंकवादियों ने जब उनके मंदिर को उड़ाने की धमकी दी, तब वहां के तत्कालीन डीएम के कहने पर वह पंजाब छोड़ दिल्ली स्थित रिलीफ कैंप चले गए। उसी समय 1987 में ही पंजाब के गृह सचिव रहे आरपी ओझा के निर्देश पर उनको रिवाल्वर का लाइसेंस जारी किया गया था।

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Kumbh Mela 2019:Baba Equipped with weapon in kumbh mela
Baba with Weapon

फिलहाल बाबा अद्वैत चैतन्य के पास राइफल और एक बंदूक भी है। वह अपने शिविर में हमेशा हथियारों से लैस रहते हैं। हालांकि बाबा का कहना है कि जीवन नश्वर है और उनको मौत से अब डर नहीं लगता, लेकिन फिर भी सुरक्षा का वह पूरा बंदोबस्त रखते हैं। इसी तरह शंभू पंच अग्नि अखाड़े के ही फलाहारी श्रीमहंत राजेशवरानंद ब्रह्मचारी उर्फ भोला बाबा भी बंदूक लेकर शिविर के बाहर निकलते हैं तो उनको देखने वालों की भीड़ लग जाती है। बाबा कमलानंद ब्रह्मचारी के पास भी पिस्तौल है। इनके अलावा कई संतों ने असलहों का लाइसेंस जारी कराया है और वह हथियारों से लैस होकर कुंभ में आए हैं। 

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Kumbh Mela 2019:Baba Equipped with weapon in kumbh mela
Baba with Weapon

महंत अद्वैत चैतन्य ब्रह्मचारी, शंभू पंच अग्नि अखाड़ा का कहना है कि,  परशुराम भगवान के अवतार थे,लेकिन उन्होंने भी शस्त्र धारण किया था। भगवान राम ने भी अत्याचारियों के वध के लिए धनुष-वाण उठाया था। देवी-देवताओं के हाथों में अस्त्र-शस्त्र इसीलिए दिखाया गया है। अत्याचारियों से मुकाबला लेने के लिए शस्त्र उठाना कोई अनुचित बात नहीं है।

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