हाईकोर्ट : कानपुर बिकरू कांड में आरोपी पूर्व पुलिसकर्मी केके शर्मा व शिवम दुबे को मिली जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2020 के बहुचर्चित बिकरू कांड में नामजद पूर्व पुलिसकर्मी केके शर्मा उर्फ कृष्ण कुमार शर्मा और शिवम दुबे उर्फ दलाल को सशर्त जमानत दे दी है। दोनों आरोपी जुलाई 2020 से जेल में बंद हैं और यह उनकी सातवीं जमानत अर्जी थी।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर नगर के चौबेपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 2020 में हुए बहुचर्चित बिकरू कांड मामले में नामजद आरोपी पूर्व पुलिसकर्मी केके शर्मा उर्फ कृष्ण कुमार शर्मा और शिवम दुबे उर्फ दलाल को सशर्त जमानत दे दी। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने दिया है।
याचियों के खिलाफ चौबेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बलवा और घातक हथियारों से लैस होना, हत्या, हत्या का प्रयास, जूट के दौरान चोट पहुंचाना, डकैती की संपत्ति का लेनदेन, डकैती के दौरान हत्या सहित कई अन्य आरोप लगाए गए थे। जुलाई 2020 से जेल में बंद आरोपियों ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में यह सातवीं अर्जी दायर की है। इससे पहले छह जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी पिछले छह वर्षों से अधिक समय से (जुलाई 2020 से) जेल में बंद हैं। मुकदमे में 25 अभियोजन गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और केवल नौ और गवाहों का परीक्षण होना बाकी है। अभियोजन साक्ष्य दर्ज हो चुके हैं और शेष अधिकांश गवाह डॉक्टर तथा पुलिस अधिकारी हैं। इसलिए अब गवाहों को प्रभावित करने की संभावना बेहद कम है। इस मामले के कुल 42 सह-आरोपियों में से लगभग 33 से 35 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। ऐसे में समानता के आधार पर जमानत की मांग की।
राज्य सरकार की ओर से जमानत अर्जी का विरोध किया गया और दलील दी कि केके शर्मा स्थानीय पुलिस चौकी प्रभारी थे और उन्होंने पुलिस की गुप्त कार्रवाई की जानकारी लीक की जिससे पुलिस टीम पर जानलेवा हमला हुआ और कई पुलिसकर्मियों की जान चली गई। हालांकि, अदालत ने जेल में बिताई गई अवधि, ट्रायल की मौजूदा प्रगति और सह-आरोपियों को मिल चुकी जमानत के आधार पर दोनों आवेदकों को सशर्त जमानत दे दी।
कानपुर का बहुचर्चित बिकरू कांड: जानिए क्या था पूरा मामला
कानपुर नगर के चौबेपुर थाना क्षेत्र स्थित बिकरू गांव में 2 और 3 जुलाई 2020 की दरमियानी रात कुख्यात अपराधी विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया गया था। गांव के रास्ते में जेसीबी लगाकर पुलिस का रास्ता रोका गया और छतों से अंधाधुंध गोलीबारी की गई, जिसमें तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (सीओ) देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इस भयावह घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी विकास दुबे और उसके पांच अन्य प्रमुख साथियों को अलग-अलग मुठभेड़ों में मार गिराया।
बिकरू कांड से जुड़े पूरे घटनाक्रम में हत्या, हत्या के प्रयास और डकैती जैसी गंभीर धाराओं में 21 नामजद तथा 60-70 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकियां दर्ज की गईं और कुल मिलाकर लगभग 80 मुकदमे दर्ज हुए। विवेचना के दौरान पुलिस ने मुख्य केस में 42 आरोपियों को चिह्नित कर गिरफ्तार किया और 44 से अधिक आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल कर उन्हें जेल भेजा। इस मामले में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए सितंबर 2023 में एंटी डकैती कोर्ट ने 23 आरोपियों को 10-10 साल की सजा सुनाई, जबकि मुख्य हत्या के मामले में सुनवाई अदालत में जारी है।