इलाहाबाद हाईकोर्ट : 2017 में मौत, 2020 में अपराध कबूलने की अर्जी! खनन विभाग के दावे पर कोर्ट हैरान
जिस व्यक्ति की मृत्यु 2017 में हो चुकी थी, उसके नाम से 2020 में अपराध स्वीकार करने की अर्जी दाखिल होने का दावा सामने आया तो इलाहाबाद हाईकोर्ट भी हैरान रह गया। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कुशीनगर के खनन अधिकारी और जिलाधिकारी से पूरी रिपोर्ट तलब की है।
विस्तार
जिस व्यक्ति की मृत्यु वर्ष 2017 में ही हो चुकी थी, उसने साल 2020 में अपना अपराध स्वीकार करते हुए जब्त वाहन छोड़ने की अर्जी दाखिल कर दी। खनन विभाग के इस अजूबे और हास्यास्पद दावों को सुनकर इलाहाबाद हाईकोर्ट अचंभित रह गया।
न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने कुशीनगर के खनन अधिकारी और जिलाधिकारी से इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। मामला कुशीनगर जिले का है। 13 दिसंबर 2020 को खनन निरीक्षक ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को सीज कर दिया था। इसके दो साल से अधिक समय बाद 23 जनवरी 2023 को खनन अधिकारी ने 2,26,170 रुपये की जुर्माना लगाने का आदेश जारी कर दिया।
वाहन मालिक के बेटे धीरज ने सूचना के अधिकार के तहत आदेश की प्रति हासिल कर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर खनन अधिकारी के आदेश को चुनौती दी। राज्य सरकार ने जवाब में दावा किया कि वाहन मालिक शिवनाथ और उनके बेटे धीरज ने अपराध स्वीकार करते हुए न्यूनतम जुर्माना लगाकर वाहन रिलीज करने की अर्जी दी थी। इसके बाद ही जुर्माना लगाया गया।
12 अक्तूबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
याची धीरज के वकील ने वाहन रिलीज करने की अर्जी की सत्यता पर सवाल उठाया तो कोर्ट के निर्देश पर सरकारी वकील ने मूल अर्जी पेश की। बिना तारीख की इस अर्जी के जवाब में याची के वकील ने 29 मार्च 2017 को जारी मृत्यु प्रमाण पत्र कोर्ट के सामने रख दिया। इससे यह साफ हो गया कि वाहन मालिक शिवनाथ की मृत्यु 8 फरवरी 2017 को ही हो चुकी थी।
वाहन मालिक शिवनाथ की ओर से 2020 में जब्ती के बाद अपराध स्वीकारने के इस अजीब दावे पर हाईकोर्ट हैरान रह गया। सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि पुलिस चौकी में खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली का सारा कीमती सामान गायब हो चुका है। अब वहां केवल गाड़ी का ढांचा ही बचा है। इस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने खनन अधिकारी और जिलाधिकारी से सीज सामानों की रख-रखाव प्रक्रिया, ट्रैक्टर के वर्तमान मूल्य, जब्ती के बाद गाड़ी के संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों और फर्जी अर्जी के आधार पर की गई कार्रवाई पर स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्तूबर 2026 को होगी।