प्रयागराज : अतीक के बेटे अली संग नामजद छह आरोपियों को कोर्ट ने मुहैया कराया वकील, नैनी जेल में बंद हैं आरोपी
गैंगस्टर एक्ट के मामले में माफिया अतीक अहमद के बेटे अली अहमद के साथ नामजद सहआरोपियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने वकील मुहैया कराया है। इसके लिए विकास गुप्ता को आरोपियों का वकील नियुक्त किया गया है। जिला जेल नैनी में बंद आरोपियों का कहना था कि पैसे की तंगी के चलते वह अपना वकील नियुक्त नहीं कर पा रहे हैं।
विस्तार
माफिया अतीक अहमद के बेटे अली अहमद के साथ नामजद छह आरोपियों ने धन की कमी का हवाला देते हुए वकील मुहैया कराने की गुहाई लगाई है। मामले का संज्ञान लेते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने आरोपियों की ओर से पैरवी करने के लिए विकास गुप्ता को अधिवक्ता नामित है। यह आरोपी जिला कारागार नैनी में निरुद्ध हैं। मामले में करीब 14 आरोपी हैं और इनमें कई अलग-अलग जेलों में भी बंद हैं।
मुकदमा अपराध संख्या 495/2024 के तहत उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम की धारा 2/3(1) में यह मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई आरोप तय किए जाने की अवस्था में है। इसमें माफिया अतीक अहमद के बेटे अली अहमद समेत 14 लोगों के खिलाफ धूमनगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
इन आरोपियों ने लगाई थी गुहार
नैनी जिला जेल में निरुद्ध मोहम्मद अरशद, कैश अहमद, राकेश उर्फ नाकेश, शाहरुख, सदाकत खान और नियाज अहमद समेत अन्य आरोपी निरुद्ध हैं। इन लोगों ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कहा था कि गरीबी के चलते वह लोग अपनी पैरवी कराने के लिए अधिवक्ता करने में सक्षम नहीं हैं। यह भी बताया कि लंबे समय से उनसे कोई मिलने नहीं आया है।
अदालत ने उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें विधिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। विधिक सहायता के तहत नियुक्त अधिवक्ता इन आरोपियों से मुलाकात कर मामले से संबंधित जानकारी और उनकी ओर से आवश्यक कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। मुख्य प्रतिरक्षा अधिवक्ता विकास गुप्ता ने बताया कि आरोपियों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने के संबंध में उन्हें नियुक्त किया गया है। उन्होंने मामले की पत्रावली की प्रतियां उपलब्ध कराने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र भी दिया है, ताकि आरोपियों की ओर से प्रभावी पैरवी की जा सके।
आरोप तय होने से पहले आरोपमुक्ति का विकल्प
मामला फिलहाल आरोप तय किए जाने की अवस्था में है। अधिवक्ता के अनुसार, आरोप तय होने से पहले बचाव पक्ष के पास आरोपमुक्ति के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल करने का कानूनी विकल्प होता है। यदि संबंधित आरोपी इस कानूनी उपाय का लाभ लेने की इच्छा जताते हैं तो उनकी ओर से नियमानुसार आरोपमुक्ति प्रार्थना पत्र दाखिल किया जा सकता है।