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पंद्रह दिनों के लिए शहर, गांव वेंटिलेटर पर, मुंबई दिल्ली से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे गांव, ग्रामीण परेशान

Tue, 31 Mar 2020 12:11 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 31 Mar 2020 12:11 AM IST
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For fifteen days the city, on the village ventilator, a large number of people arrived from Mumbai Delhi, the villagers were upset
prayagraj news - फोटो : prayagraj

जिले के शहर या ग्रामीण इलाकों में दूसरे प्रांतों से आए लोगों की वजह से स्थिति खतरनाक हो चुकी है। दिल्ली, मुंबई से बड़ी संख्या में लोग यहां आएं हैं। इनमें से कोई एक भी संक्रमित होगा तो बीमारी पूरे जिले को अपनी चपेट में ले सकती है। फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से सतर्कता बरतने का दावा किया जा रहा है लेकिन, जानकारों का मामना है कि जिले के लिए 15 दिन सबसे गंभीर हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पलायन से बहुत ही सजग रहने की जरूरत है। सरकार को और सख्ती बरतने की जरूरत है। वरना हालात अमेरिका, इटली की तरह हो सकते हैं।

For fifteen days the city, on the village ventilator, a large number of people arrived from Mumbai Delhi, the villagers were upset
prayagraj news - फोटो : prayagraj

स्वास्थ्य विभाग के पूर्व सीएमओ डॉ. निसार अहमद कहते हैं कि सरकार ने पहले इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दौरे के दौरान ही अगर बाहर से आने वाले लोगों की जांच कर उन्हें एयरपोर्ट पर ही आइसोलेट कर दिया जाता तो बीमारी ही नहीं फैलती। अब बीमारी फैल गई तो दिल्ली, मुंबई, पुणे जैसे शहरों से लोगों का पलायन होना बहुत ही गंभीर बात है। अब ये बीमारी ग्रामीण इलाकों में पहुंचकर घर-घर फैलेगी।

For fifteen days the city, on the village ventilator, a large number of people arrived from Mumbai Delhi, the villagers were upset
prayagraj news - फोटो : prayagraj

दुनिया के दूसरों मुल्कों में जहां यह बीमारी पहले फैली है, वहां पर इन्हीं सब लापरवाहियों से हालात बदतर हुए हैं। सरकार  लॉकडाउन के पहले ही दो-तीन दिनों की छूट देकर लोगों को अपने घरों को भेज देती तो ठीक रहता लेकिन, अब लोग स्वयं ही अपने घरों को जाने लगे तो सरकार ने भी मदद दे दी। इससे तो खतरा व्यापक हो गया है। आने वाले कुछ दिन और ज्यादा खतरनाक हैं। अफसोस है कि बीमारी का न तो उपचार है, न जांच की पर्याप्त सुविधा है और न उपचार करने वाले लोगों के लिए पर्याप्त व्यवस्था। ऐसी दशा में देश के हालात ईरान, अमेरिका, इटली की तरह न पहुंच जाए। जिला प्रशासन को स्वास्थ्य अधिकारियों से परामर्श कर जरूरी कदम तुरंत उठाने की जरूरत है।

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For fifteen days the city, on the village ventilator, a large number of people arrived from Mumbai Delhi, the villagers were upset
लाकडाउन के दौरान राजस्थान के अजमेर से निकले मजदूर लगातार चलकर बनारस जाते हुए। - फोटो : prayagraj
पूर्व अपर स्वास्थ्य निदेशक डॉ. जीके पाठक कहते हैं कि यह प्रशासन की असफलता है। यह व्यवस्था उनकी लापरवाही से खराब हुई है। लेकिन सरकारों ने खुद ही मदद कर बीमारी को पूरे देश में फैलने का मौका दिया है। बेहतर होता कि सरकारें मिलकर दिल्ली, मुंबई से पलायन कर रहे लोगों को जो जहां था, वहीं रोक देतीं और उन्हें खाने, पीने का इंतजाम कर देतीं। वे आइसोलेट रहते। अब जिस तरह से लोग बड़े शहरों से गांवों की तरफ आए हैं। इससे संक्रमण फैलने की संभावना पूरी है। ऐसे में लोग खुद भी सतर्क रहें। प्रशासन को और सख्ती बरतने की जरूरत है। जिससे की लॉकडाउन बना रहे नहीं तो हालात अमेरिका, इंग्लैंड, इटली, स्पेन, ईरान जैसे मुल्कों की तरह हो सकते हैं।
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