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हाईकोर्ट का आदेश : किन अपराधों में चयन रद्द होगा, किनमें नहीं, सरकार स्पष्ट नियम बनाए

Thu, 24 Sep 2026 01:30 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 24 Sep 2026 01:30 PM IST
सार

आपराधिक मुकदमे की जानकारी छिपाने पर चयन रद्द करने के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से स्पष्ट नीति बनाने को कहा, ताकि अपराध की प्रकृति के आधार पर नियुक्ति प्राधिकारियों को निर्णय लेने में दिक्कत न हो।

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High Court Order Government frame clear rules specifying offenses lead cancellation of selection and not.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए जिसमें स्पष्ट हो कि किन आपराधिक मामलों में चयनित अभ्यर्थी की नियुक्ति रद्द की जा सकती है, किन मामलों में नहीं। ऐसी नीति बनने से नियुक्ति प्राधिकारियों को भविष्य में निर्णय लेने में स्पष्टता रहेगी।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकलपीठ ने अनिल कुमार यादव की याचिका स्वीकार करते हुए दिया। कोर्ट ने याची के कांस्टेबल पद पर चयन को निरस्त करने के वाराणसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के 14 जनवरी 2007 के आदेश को रद्द कर दिया। याची के खिलाफ मारपीट, अपमान करना, धमकी देना, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने आदि के आरोप में एफआईआर दर्ज थी। आरोप था कि उसने पुलिस भर्ती के आवेदन के दौरान इस आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई थी। इस आधार पर याची के चयन को निरस्त कर दिया गया था। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि याची के खिलाफ दर्ज अपराध मामूली प्रकृति के थे। केवल इस आधार पर चयन रद्द नहीं किया जा सकता कि अभ्यर्थी ने आवेदन में मामले का उल्लेख नहीं किया। यह भी कहा गया कि नौकरी न मिलने के भय के कारण याची से यह तथ्य आवेदन में अंकित नहीं हो पाया था, लेकिन इससे वह नियुक्ति के लिए अयोग्य नहीं हो जाता।

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सुप्रीम कोर्ट के प्रतिपादित सिद्धांतों का उल्लेख

हाईकोर्ट ने मामले में सुप्रीम कोर्ट के अवतार सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया तथा कमिश्नर ऑफ पुलिस बनाम संदीप कुमार के फैसलों में प्रतिपादित सिद्धांतों का उल्लेख किया। कोर्ट ने परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति को देखते हुए चयन निरस्तीकरण आदेश को उचित नहीं माना और उसे रद्द कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव गृह को आदेश की प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया है, ताकि भविष्य में मामूली आपराधिक मामलों अथवा उनके आवेदन में उल्लेख न किए जाने मात्र के आधार पर चयन निरस्त करने की कार्रवाई में एकरूपता रहे। कोर्ट ने सरकार से ऐसी नीति तैयार करने को कहा है, जिसमें अपराधों की अलग-अलग श्रेणी निर्धारित हो और स्पष्ट किया जाए कि किन मामलों में चयन निरस्त किया जा सकता है और किन मामलों में नहीं।

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