कुंभ मेले के पहले शाही स्नान के लिए जाने वाले तमाम अखाड़ों के नागा साधुओं को देखने के लिए शाही स्नान घाट के रास्ते पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। जैसे ही नागा साधु गुजरते वैसे ही वहां उनके चरण के नीचे की रेत बटोरने के लिए श्रद्धालु टूट पड़ते। मुट्टठी भर रेत बटोरने के बाद उसे श्रद्धालुओं ने सहेज कर रख लिया। दोपहर तक चले शाही स्नान घाट जाने वाले रास्ते पर यही स्थिति रही।
दरअसल शाही स्नान के लिए जाने वाले नागाओं का चरण रज बेहद शुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि नागा देवताओं के ही गण है। इसलिए वे पूज्यनीय है। ऐसे में शाही स्नान के आगमन-प्रस्थान मार्ग से गुजरने के बाद उनके चरण की रेती तो माथे से लगाना देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होने जैसा होता है। मुजफ्फरनगर से आए अतुल कौशिक, कल्पना, मनोज आदि ने बताया कि पिछले कुंभ मेले में भी वे नागाओं का चरण रज ले गए थे।
पूरे घर में उसका छिड़काव करने के बाद बचा हुआ चरण रज पूजाघर में रख दिया था। इस बार भी मुट्ठीभर चरणरज एकत्र किया गया। इसी तरह काशीपुर उत्तराखंड की सीमा भार्गव, रिचा नेगी भी सुबह जूना अखाड़े के नागाओं के शाही स्नान पर जाने का इंतजार करती नजर आई।
सैकड़ों नागाओं के गुजरने के बाद उनके चरण रज को छूने के लिए वे दोनों भी बैरीकेडिंग के नीचे से शाही स्नान मार्ग पर पहुंची। हालांकि भीड़ ज्यादा होने से सीमा गिरी भी, लेकिन गिरने के बाद भी वे चरण रज को माथे से लगाना नहीं भूली।
इसके बाद चरणरज को उन्होंने मुट्ठी में एकत्र कर लिया। इस दौरान नागपुर की रश्मि त्रिसोलिया, लुधियाना के मनोहर कौशल, अंबाला से आए नीरज सहाय समेत सैकड़ों लोगों ने नागाओं के चरण की रेती बटोरी। इस बारे में आचार्य बृजेश शास्त्री का कहना है कि नागाओं का चरणरज घर के पवित्र स्थान पर रखना बेहद शुभ माना जाता है। इससे घर में आने वाले संकट दूर होते हैं। कुंभ में जो नागा स्नान करते हैं उनके चरणरज इसी वजह से श्रद्धालु सहेजते हैं।